Bangladesh Election 2026 : बांग्लादेश में हाल में घटी सांप्रदायिक घटनाओं में एक बड़ा हाथ बांग्लादेश की इस्लामिक कट्टरपंथी पार्टी जमात ए इस्लामी का माना जाता है। अलग अलग दक्षिणपंथी छात्र समूहों के साथ मिल कर इस पार्टी ने शेख हसीना सरकार का तख्तापलट करने में अपनी भूमिका निभाई। आपको बता दें लगभग डेढ़ साल के अस्थिरता के बाद अब बांग्लादेश में आम चुनाव होने जा रहे हैं, ऐसे में जमात ए इस्लामी पार्टी भी मैदान में उतरी है। आइए जानते हैं धुर दक्षिणपंथी पार्टी अपने घोषणापत्र में क्या वादे कर रही है।
Bangladesh Election 2026 : भारत से बेहतर संबंध बनाने का वादा

शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से ही भारत और बांगलादेश के रिश्ते लगातार बिगड़ते दिखे हैं। बीतें कुछ महीनों में यह रिश्ते तब और बिगड़े जब बांगलादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के साथ लिंच की घटनाएं देखने को मिलीं। अब जमात-ए-इस्लामी ने पड़ोसी देशों के साथ संबंध बेहतर बनाने का वादा किया है. जमात ने भारत, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, मालदीव और थाईलैंड जैसे पड़ोसी और निकटवर्ती देशों के साथ आपसी सम्मान और निष्पक्षता के आधार पर शांतिपूर्ण, मैत्रीपूर्ण और सहयोगात्मक संबंध स्थापित करने का वादा जाएंगे. जमात-ए-इस्लामी ने कहा है कि दुनिया के तमाम मुस्लिम देशों के साथ संबंधों को मजबूत करना उसकी विदेश नीति की प्रमुख प्राथमिकता होगी।
Bangladesh Election Manifesto : हिन्दू समुदाय के लिए क्या है वादा

बता दें बांग्लादेश में कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां हिन्दू मतदाता यहां भूमिका निभाते हैं, ऐसे में जमात ए इस्लामी पार्टी ने अपने घोषणापत्र में उन इलाकों को साधने के लिए हिन्दू मतदाताओं को साधना शुरू कर दिया है। पार्टी ने अपने घोषणापत्र में धार्मिक अल्पसंखकों को प्रतिनिधित्व देने की बात की है। उनका कहना है कि अगर वे चुन कर आते हैं तो उनका मंत्रिमंडल देश की विविधता को दर्शाएगा और इसमें धार्मिक व जातीय उपेक्षित समुदाय को जगह मिलेगी। हालांकि पार्टी भले अल्पसंख्यकों को प्रतिनिधित्व देने की बात कह रही हो मगर उनके विचारों में जमीन आसमान का अंतर है जो पार्टी को इस्लामिक मूल्यों पर चलाने पर विश्वास रखती है न कि सैक्यूलर मूल्यों पर।
महिलाओं को लुभाने की कोशिश

जमात ने अपने घोषणापत्र में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने की बात कही है मगर पार्टी की वादों और नेताओं की सोच में जमीन आसमान का अंतर सामने आता है। इस का एक उदाहरण जमात के अमीर पद पर बैठे डाक्टर रहमान का वह बयान है जिसमें उन्होंने कहा था ककाम पर जाने वाली महिलाओं की तुलना वैश्यावृति से की थी और कामकाजी महिलाओं को नैतिक रूप से गलत बताया था। बता दें इस्लामिक पार्टी समय समय पर ऐसे बयान देने के लिए चर्चित रही है।
विकास और आर्थिक उन्नति के वादे
जमात-ए-इस्लामी पार्टी ने 2026 चुनाव के लिए जारी अपने घोषणापत्र में शासन सुधार, आर्थिक पुनरुत्थान, सामाजिक न्याय और युवाओं के नेतृत्व वाले विकास के जरिए देश के जरिए देश के पुनर्निर्माण का दावा किया है. भेदभाव-मुक्त, मजबूत और मानवीय बांग्लादेश” के रोडमैप के रूप में पेश किए गए इस घोषणापत्र में जुलाई क्रांति (शेख हसीना का तख्तापलट) का उल्लेख किया गया है और ईमानदारी, एकता, दक्षता, रोजगार और न्याय पर जोर दिया गया है. घोषणापत्र के केंद्र में शासन व्यवस्था में बुनियादी सुधार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की बहाली का वादा है. हालांकि ये वादे उस पार्टी द्वारा किए जा रहे हैं जिसका इतिहास संकुचित सोच और कट्टरता को बढ़ाने का है।


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