नई दिल्ली, 22 अगस्त (आईएएनएस)। प्रोफेसर एंड्रयू एम रामरूप फैशन की दुनिया का बड़ा नाम है। मॉरिस सेडवेल के क्रिएटिव डायरेक्टर और मालिक जिन्होंने ‘सैविल रो बिस्पोक एकेडमी’ की स्थापना की। रविवार को नई दिल्ली स्थित हैबिटेट सेंटर में ‘बिस्पोकन’ किताब के विमोचन कार्यक्रम में पहुंचे तो अपने उस सफर की कहानी बताई जिसमें चुनौतियां भरपूर थीं। अशोक कुमार बाल की किताब रामरूप के सफर को बयां करती है।
आईएएनएस से बातचीत में ‘टेलरिंग उस्ताद’ रामरूप ने बताया, “त्रिनिदाद छोड़कर इंग्लैंड जाना बहुत चुनौतीपूर्ण था। और चुनौतियां गहरी थीं। चुनौतियां सिर्फ किसी अलग तरह से काम करने के तरीके या ट्रेनिंग की नहीं थीं, बल्कि चुनौतियां उससे कहीं ज्यादा थीं। चुनौतियां मेरे लुक्स, मेरी त्वचा का रंग, मेरे बालों का रंग (हंसते हुए जब मेरे बाल हुआ करते थे) को लेकर थीं। मेरे बोलने के तरीके को लेकर भी कई चुनौतियां थीं। मुझे बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।”
उन्होंने आगे कहा, “फिर पहली बड़ी कामयाबी तब मिली जब मुझे 52 साल पहले मॉरिस सेडवेल में नौकरी मिली। उस समय मैंने खुद को साबित किया। मैंने तीन साल की यूनिवर्सिटी डिग्री दो साल में पूरी की, और मैं उन आठ ग्रेजुएट्स में से एक था। “
रामरूप के सफर के बारे में भारत में त्रिनिदाद और टोबैगो गणराज्य के हाई कमिश्नर चंद्रदत्त सिंह ने कहा, “यहां दो बातें हैं। एक तो उनसे हमें सादगी से जीवन शुरू करने का सबक मिलता है; इससे पता चलता है कि किसी की जिंदगी की शुरुआत कैसी रही, यह मायने नहीं रखता; मायने यह रखता है कि अंत में क्या होता है। हो सकता है कि आपकी शुरुआत बहुत साधारण रही हो, लेकिन अंत में आप क्या हासिल करते हैं, यही असल में मायने रखता है। दूसरी बात, वे अपनी ज़िंदगी में दो दूरियों को पाट रहे हैं: एक त्रिनिदाद और टोबैगो और भारत के बीच। इस तरह वे दो देशों – त्रिनिदाद और टोबैगो और भारत – की कहानियों को एक साथ लाए हैं। “
रविवार को राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने इंडिया हैबिटेट सेंटर के सिल्वर ओक हॉल और पैटियो में ‘बिस्पोकन’ किताब के विमोचन कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता फैशन डिजाइन काउंसिल ऑफ इंडिया (एफडीसीआई) के चेयरमैन सुनील सेठी ने की।
–आईएएनएस
केआर/
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