लंदन : यूरोपीय संघ (ईयू) से अलग होने के ब्रिटेन के फैसले का यहां पढ़ रहे विदेशी छात्रों पर मामूली असर पड़ा है। हाल में हुए एक सर्वेक्षण में इस बात का पता चला। जनवरी और फरवरी 2017 में ‘हॉबसंस’ नामक कंपनी ने सर्वेक्षण ‘इंटरनेशनल स्टूडेंट सर्वे 2017’ आयोजित की। करीब 27,955 भावी विदेशी छात्रों के सर्वेक्षण में पता चला कि यूनीवर्सिटी, पाठ्यक्रम या पसंद का देश चुनते वक्त भावी विदेशी छात्रों के लिये उच्च-गुणवत्ता वाला शिक्षण ही एकमात्र सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारक होता है। माना जाता है कि सर्वेक्षण में शामिल ये छात्र ब्रिटेन में अध्ययनरत हैं।
करीब 68.5 प्रतिशत छात्रों के बीच ब्रेक्जिट का कोई असर नहीं पड़ा है जबकि सिर्फ 12.7 प्रतिशत ने कहा कि वे ब्रिटेन में अध्ययन करने में कम रूचि रखते हैं। शेष 11.3 प्रतिशत ने कहा कि ब्रेक्जिट ने उन्हें ब्रिटेन के प्रति अधिक रूचि पैदा की। ये नतीजे जून 2016 के ईयू जनमत संग्रह के लिये शुरूआती नकारात्मक प्रतिक्रिया में नरमी के संकेत हैं। जनमत संग्रह के दौरान 43 प्रतिशत लोगों ने कहा था कि फैसले ने अध्ययन के उनके स्थान के चयन को प्रभावित किया है।
अब तक 160 यूनीवर्सिटी, शिक्षण संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इसका समर्थन किया है। यूनीवर्सिटी ऑफ शेफील्ड में ग्लोबल इंगेजमेंट डाइरेक्टर मैलकम बटलर ने कहा, ”ब्रिटेन की यूनीवर्सिटी हमेशा अपने दृष्टिकोण और समुदायों में अंतरराष्ट्रीय रही हैं और यह कभी नहीं बदलेगा।” अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने भी लगातार शेफील्ड का उल्लेख उसके दोस्ताना माहौल और आतिथ्य के लिये किया है।
(भाषा)


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