भीषण गर्मी और जेलीफिश के हमले से थमे यूरोप के न्यूक्लियर पावर प्लांट, 20% तक गिरा बिजली उत्पादन

Summary :

भीषण गर्मी और जेलीफिश के हमलों के कारण फ्रांस सहित यूरोप के परमाणु संयंत्रों में बिजली उत्पादन 20 प्रतिशत तक गिर गया है। तटीय और नदी किनारे स्थित कई रिएक्टर बंद होने से पूरे क्षेत्र में बड़ा ऊर्जा संकट खड़ा हो गया है।

JellyFish attack on Nuclear Plant

JellyFish attack on Nuclear Plant : फ्रांस के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की उत्पादन क्षमता में बुधवार को 20 प्रतिशत से अधिक की रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है. भीषण गर्मी, सूखे और समुद्र में जेलीफिश के अचानक हुए हमले के कारण देश में बिजली उत्पादन का यह बड़ा संकट खड़ा हो गया है.

फ्रांस अपनी कुल बिजली जरूरतों का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा परमाणु ऊर्जा से ही पूरा करता है, ऐसे में इस गिरावट ने पूरे देश की बिजली आपूर्ति व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है.

फ्रांसीसी ऊर्जा कंपनी इलेक्ट्रिकसाइट डी फ्रांस (EDF) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मौसम और पर्यावरणीय कारणों से 20.4 फीसदी बिजली उत्पादन फिलहाल पूरी तरह ठप हो चुका है.

कूलिंग पंपों में फंसी जेलीफिश

फ्रांस के कुल 57 परमाणु रिएक्टरों में से 13 रिएक्टर इस पर्यावरणीय संकट की चपेट में आए हैं. इनमें से 8 रिएक्टरों को पूरी तरह से बंद करना पड़ा है, जबकि 5 अन्य रिएक्टरों को बेहद कम क्षमता पर चलाया जा रहा है.

उत्तरी फ्रांस के डनकर्क शहर के पास स्थित ‘ग्रेवलाइंस न्यूक्लियर पावर प्लांट’ पश्चिमी यूरोप का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र है, जहां 900 मेगावाट क्षमता के छह रिएक्टर काम करते हैं. कंपनी के मुताबिक, समुद्र से आए जेलीफिश के एक बड़े झुंड ने इस प्लांट के कूलिंग पंपों को जाम कर दिया. रिएक्टरों को ठंडा रखने वाले वाटर इनटेक सिस्टम में जेलीफिश फंसने के कारण सुरक्षा के लिहाज से तीन रिएक्टरों को तुरंत बंद करना पड़ा.

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन, समुद्र के बढ़ते तापमान, अत्यधिक मछली पकड़े जाने और प्लास्टिक प्रदूषण की वजह से समुद्र में जेलीफिश की आबादी बेतहाशा बढ़ रही है.

भीषण गर्मी और सूखे ने बढ़ाई मुसीबत

जेलीफिश के हमले के अलावा फ्रांस में जारी भीषण गर्मी और सूखे ने भी स्थिति को गंभीर बना दिया है. नदियों के तट पर स्थित परमाणु संयंत्रों को ठंडा रखने के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है. पिछले तीन महीनों में फ्रांस में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया, जिसके कारण जून और जुलाई में भी कई रिएक्टर बंद करने पड़े थे.

ऊर्जा कंपनी EDF ने बयान जारी कर साफ किया है कि इस स्थिति से फिलहाल किसी भी संयंत्र की सुरक्षा, कर्मचारियों या आम जनता को कोई खतरा नहीं है. हालांकि, जलस्रोतों के बढ़ते तापमान और समुद्री जीवों के बढ़ते हमलों ने देश के सामने एक नई तकनीकी चुनौती खड़ी कर दी है.

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।