एश्ले टेलिस के सरकारी दस्तावेज मामले में अमेरिकी सरकार ने आरोप हटाने की कोशिश का किया विरोध

Summary :

वॉशिंगटन, 23 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिकी सरकार ने जाने-माने अमेरिकी पॉलिसी एक्सपर्ट एश्ले जे. टेलिस की उस कोशिश का विरोध किया है जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ लगे गंभीर आरोपों को खारिज करवाने की कोशिश की थी। अमेरिकी सरकार का कहना है कि उन्होंने बहुत संवेदनशील राष्ट्रीय सुरक्षा दस्तावेज को गलत तरीके से सालों तक अपने घर पर रखा। टेलिस को अमेरिका में भारत और दक्षिण एशिया के सबसे बड़े विशेषज्ञों में से एक माना जाता है, जिनका सरकारी और रणनीतिक नीति सर्कल में लंबा करियर रहा है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, टेलिस के पास उच्च स्तरीय सुरक्षा मंजूरी थी। हालांकि, उन…

वॉशिंगटन, 23 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिकी सरकार ने जाने-माने अमेरिकी पॉलिसी एक्सपर्ट एश्ले जे. टेलिस की उस कोशिश का विरोध किया है जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ लगे गंभीर आरोपों को खारिज करवाने की कोशिश की थी। अमेरिकी सरकार का कहना है कि उन्होंने बहुत संवेदनशील राष्ट्रीय सुरक्षा दस्तावेज को गलत तरीके से सालों तक अपने घर पर रखा।

टेलिस को अमेरिका में भारत और दक्षिण एशिया के सबसे बड़े विशेषज्ञों में से एक माना जाता है, जिनका सरकारी और रणनीतिक नीति सर्कल में लंबा करियर रहा है।

सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, टेलिस के पास उच्च स्तरीय सुरक्षा मंजूरी थी। हालांकि, उन पर आरोप है कि उन्होंने सुरक्षित कार्यालय से गोपनीय सामग्री हटाकर उसे अपने घर में रखा। बता दें, वह अमेरिकी विदेश विभाग और रक्षा प्रतिष्ठान के साथ काम कर चुके हैं।

प्रॉसिक्यूटर का आरोप है कि टेलिस ने सरकारी डॉक्यूमेंट्स, जिनमें टॉप सीक्रेट मार्क किए हुए पेपर्स भी शामिल हैं, को बिना इजाजत के हटा दिया और अपने पास अपने घर के अलग-अलग हिस्सों में रखा।

उनका तर्क है कि अगर किसी को काम की जगह पर क्लासिफाइड मटीरियल देखने की परमिशन है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वे उसे घर ले जा सकते हैं या सिक्योर जगहों के बाहर रख सकते हैं।

अपनी फाइलिंग में सरकार ने कहा कि यह कानून राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारी के “किसी भी अनधिकृत कब्जे” पर लागू होता है। यानी कोई भी व्यक्ति, उसकी पदवी चाहे जो भी हो, यदि बिना अनुमति ऐसे दस्तावेज अपने पास रखता है, तो वह इस दायरे में आता है।

हालांकि, टेलिस के वकील इससे पूरी तरह सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि उनके पास सही क्लीयरेंस था और उन्हें अपने काम के हिस्से के तौर पर संवेदनशील जानकारी एक्सेस करने की इजाजत थी। इस वजह से, उनका तर्क है कि उनके साथ ऐसा बर्ताव नहीं किया जाना चाहिए जैसे कि उनका उस मटीरियल पर कोई अधिकार ही नहीं था।

उनकी लीगल टीम का कहना है कि यह केस कानून के गलत हिस्से के तहत लाया जा रहा है। आसान शब्दों में, उनका तर्क है कि प्रॉसिक्यूटर द्वारा इस्तेमाल किया गया प्रोविजन उन लोगों के लिए है जिन्हें ऐसी जानकारी रखने का कभी अधिकार नहीं था, न कि उन अधिकारियों के लिए जिन्होंने इसे अपनी जिम्मेदारी के हिस्से के तौर पर संभाला था।

टेलिस के वकील ने यह भी बताया कि सरकार ने कभी टेलिस से डॉक्यूमेंट्स वापस करने के लिए नहीं कहा, जो उनके अनुसार कानून के दूसरे हिस्से के तहत एक जरूरी कदम है जो इस मामले में लागू होना चाहिए।

वहीं, सरकार इस तर्क को खारिज करती है। अमेरिकी सरकार का कहना है कि मुद्दा यह नहीं है कि टेलिस को कभी एक्सेस मिला था या नहीं, बल्कि यह है कि क्या उन्हें उन डॉक्यूमेंट्स को घर पर रखने की इजाजत थी? अमेरिकी सरकार का कहना है कि उन्हें अपने घर पर दस्तावेज रखने की इजाजत साफ तौर पर नहीं मिली थी।

प्रोसिक्यूटर का यह भी कहना है कि बचाव पक्ष की बात मानने से एक ऐसा रास्ता खुल जाएगा, जिससे अधिकारी क्लासिफाइड मटीरियल घर ले जा सकेंगे और बिना किसी नतीजे के उसे रख सकेंगे, जब तक कि अधिकारियों को पहले पता न चल जाए और वे उसे वापस न मांग लें।

अब मामला एक अहम सवाल पर आ गया है कि क्या काम की जगह पर क्लासिफाइड जानकारी का एक्सेस होने से कोई उसे सुरक्षित जगहों के बाहर रख सकता है? कोर्ट तय करेगा कि आरोपों को आगे बढ़ाया जाना चाहिए या इस शुरुआती स्टेज में खारिज कर दिया जाना चाहिए।

इस मामले ने वाशिंगटन के पॉलिसी सर्कल में ध्यान खींचा है। इस नतीजे का असर इस बात पर पड़ सकता है कि अमेरिका उन अधिकारियों से जुड़े मामलों को कैसे हैंडल करता है जो सुरक्षित सरकारी सिस्टम से सेंसिटिव जानकारी निकालते हैं। यह एक ऐसा मुद्दा है जिसने हाल के सालों में दुनिया का ध्यान खींचा है।

–आईएएनएस

केके/एएस

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

News Desk

News Desk is the editorial team of Punjab Kesari. This article is based on information provided by IANS.