नई दिल्ली, 7 नवंबर (आईएएनएस)। चीन और पाकिस्तान की ओर से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) की छवि सुधारने के लिए शुरू की गई नई पहल ‘चीन-पाकिस्तान इन्फॉर्मेशन कॉरिडोर’ (सीपीआईसी) से इस परियोजना को लेकर लोगों के बीच बढ़ते संदेह को दूर करने की संभावना कम है। एक नई रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह पहल बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के तहत चल रही अन्य परियोजनाओं पर भी सवाल खड़े कर सकती है।
ग्रीस सिटी टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सीपीआईसी का छिपा हुआ उद्देश्य सीपीईसी का बचाव करना है। सीपीईसी को अधूरी परियोजनाओं, उम्मीदों पर खरा नहीं उतरने और वित्तीय स्थिरता को लेकर लगातार आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस पहल के तहत कुछ राजमार्गों का निर्माण जरूर हुआ है, लेकिन रेलवे का बुनियादी ढांचा अब भी अविकसित है। वहीं, सीपीईसी की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना माने जाने वाले ग्वादर बंदरगाह को भी संचालन में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
सीपीआईसी को दोनों देशों के बीच मीडिया सहयोग, सूचनाओं के आदान-प्रदान, कारोबारी भागीदारी, थिंक टैंक के बीच सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत करने वाली पहल के रूप में पेश किया गया है। इसे तथ्य-जांच और जनसंपर्क के एक तंत्र के तौर पर भी बताया गया है।
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने कहा, “अगर सीपीईसी इसका शरीर और साझा भविष्य है, तो सीपीआईसी इसकी आवाज होगा। अगर सीपीईसी हमारी अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ता है, तो सीपीआईसी हमारी समझ को जोड़ेगा।”
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान पर चीन का 29.2 अरब डॉलर का कर्ज है, जो उसके कुल बाहरी कर्ज का करीब एक-तिहाई है। इसके साथ ही सीपीईसी के तहत शुरू की गई बुनियादी ढांचा और बिजली परियोजनाओं की पर्याप्त आय पैदा करने की क्षमता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बीजिंग पाकिस्तान की ओर से कर्ज चुकाने में लगातार हो रही देरी से नाराजगी जता चुका है। चीन ने कई मौकों पर कर्ज के पुनर्गठन से इनकार किया है। वहीं, बकाया भुगतान बढ़ने के बावजूद अनुबंधों पर दोबारा बातचीत करने को लेकर भी उसकी अनिच्छा सामने आई है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जून 2026 तक सीपीईसी की बिजली परियोजनाओं का बकाया भुगतान बढ़कर 423 अरब पाकिस्तानी रुपये हो गया था। इसके चलते पाकिस्तान के आम नागरिकों को बिजली बिलों पर कर्ज सेवा अधिभार चुकाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
रिपोर्ट के मुताबिक, ऊर्जा सुरक्षा बेहतर करने का सीपीईसी का वादा पूरा होने के बजाय पाकिस्तान के लोगों के बीच संदेह और अविश्वास का कारण बन गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान का क्षेत्रीय ट्रांजिट हब बनने का सपना अब भी अधूरा है। आम नागरिकों को लगता है कि उनका पैसा कर्ज भुगतान के रूप में चीन जा रहा है, जबकि सीपीईसी का लाभ पाकिस्तान के कुछ खास और प्रभावशाली वर्गों तक ही सीमित रहा है।
प्रकाशन ने यह भी कहा कि सीपीईसी की नाकामी से चीन की उन योजनाओं को झटका लग सकता है, जिनके जरिए वह बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के माध्यम से दूसरे देशों में अपना कूटनीतिक, आर्थिक और सैन्य प्रभाव बढ़ाना चाहता है।
रिपोर्ट में श्रीलंका का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि कई परियोजनाओं के अव्यावहारिक साबित होने और हंबनटोटा बंदरगाह पर संप्रभु नियंत्रण चीन को सौंपे जाने के बाद श्रीलंका अब बीआरआई को लेकर सतर्क हो गया है।
–आईएएनएस
डीएससी
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