कैनबरा, 9 जूलाई (आईएएनएस)। ऑस्ट्रेलिया में दीर्घकालिक (क्रॉनिक)और मानसिक बीमारियां तेजी से लोगों के स्वास्थ्य पर असर डाल रही हैं। यह जानकारी गुरुवार को जारी ऑस्ट्रेलियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड वेलफेयर (एआईएसडब्ल्यू) की ऑस्ट्रेलिया हेल्थ रिपोर्ट 2026 में सामने आई है।
हर दो साल में जारी होने वाली इस रिपोर्ट में बताया गया कि देश में क्रॉनिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में ऑस्ट्रेलिया की 61 प्रतिशत आबादी यानी 1.54 करोड़ लोग कम से कम एक पुरानी बीमारी के साथ जीवन बिता रहे थे। वहीं 38 प्रतिशत लोग दो या उससे अधिक पुरानी बीमारियों से जूझ रहे थे।
एआईएसडब्ल्यू के मुताबिक, 2024 में ऑस्ट्रेलियाई लोगों ने पुरानी बीमारियों के कारण लगभग 49 लाख (4.9 मिलियन) स्वस्थ जीवन वर्ष गंवा दिए। यह देश में कुल डिजीज बर्डन (रोग भार) का 84 प्रतिशत हिस्सा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2024 में बीमारी के बोझ के पांच सबसे बड़े कारण सभी क्रॉनिक बीमारियां थीं। इनमें डिमेंशिया पहली बार ऑस्ट्रेलिया में मौत का सबसे बड़ा कारण बनकर सामने आया।
इससे पहले ऑस्ट्रेलियन ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के जारी आंकड़ों में बताया गया था कि 2024 में देश में हुई कुल मौतों में 9.4 प्रतिशत मौतें डिमेंशिया के कारण हुईं, जबकि हृदय रोग से 8.7 प्रतिशत मौतें दर्ज की गईं।
रिपोर्ट के अनुसार, 2015 से 2024 के बीच डिमेंशिया से होने वाली मौतों में 39 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि इसी अवधि में हृदय रोग से होने वाली मौतों में 18 प्रतिशत की कमी आई है। एआईएचडब्ल्यू के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जोरान बोलेविच ने इसका प्रमुख कारण ऑस्ट्रेलिया की बुजुर्ग होती आबादी को बताया।
रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में 16 से 85 वर्ष आयु वर्ग के 22 प्रतिशत लोगों ने बताया कि पिछले 12 महीनों में उन्हें किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या का सामना करना पड़ा। वहीं, 16 से 24 वर्ष के युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की दर 2007 के 26 प्रतिशत से बढ़कर 2022 में 39 प्रतिशत हो गई।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन चुनौतियों के बावजूद ऑस्ट्रेलिया में स्वास्थ्य सेवाओं के कारण लोगों की जीवन गुणवत्ता में सुधार जारी है। 2022-24 के दौरान महिलाओं की औसत जीवन प्रत्याशा 85.1 वर्ष और पुरुषों की 81.1 वर्ष दर्ज की गई।
इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया में कैंसर मरीजों की पांच साल तक जीवित रहने की दर भी लगातार बेहतर हुई है। यह 1987-1991 में 50 प्रतिशत थी, जो बढ़कर 2017-2021 के दौरान 72 प्रतिशत हो गई।
–आईएएनएस
वीकेयू/वीसी
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