एफबीआई के पूर्व निदेशक जेम्स कोमी पर ट्रंप को कथित धमकी देने के आरोप में केस दर्ज

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वाशिंगटन, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका में एक फेडरल ग्रैंड जूरी ने पूर्व एफबीआई निदेशक जेम्स कोमी के खिलाफ आरोप तय किए हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी। यह आरोप-पत्र नॉर्थ कैरोलिना के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट में दाखिल किए गए हैं। इसमें कहा गया है कि 15 मई 2025 को कोमी ने जानबूझकर राष्ट्रपति की हत्या करने और उन्हें शारीरिक नुकसान पहुंचाने की धमकी दी। साथ ही, उन पर एक राज्य से दूसरे राज्य तक धमकी भरा संदेश भेजने का भी आरोप है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला एक…

वाशिंगटन, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका में एक फेडरल ग्रैंड जूरी ने पूर्व एफबीआई निदेशक जेम्स कोमी के खिलाफ आरोप तय किए हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी।

यह आरोप-पत्र नॉर्थ कैरोलिना के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट में दाखिल किए गए हैं। इसमें कहा गया है कि 15 मई 2025 को कोमी ने जानबूझकर राष्ट्रपति की हत्या करने और उन्हें शारीरिक नुकसान पहुंचाने की धमकी दी। साथ ही, उन पर एक राज्य से दूसरे राज्य तक धमकी भरा संदेश भेजने का भी आरोप है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला एक इंस्टाग्राम पोस्ट से जुड़ा है, जिसमें सीपियों को “86 47” नंबरों के रूप में सजाया गया था। अधिकारियों का कहना है कि हालात को समझने वाला कोई भी व्यक्ति इसे राष्ट्रपति को नुकसान पहुंचाने के इरादे के रूप में देख सकता है।

कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने कहा कि यह केस महीनों की जांच के बाद दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा, “अमेरिकी राष्ट्रपति की जान को धमकी देना हमारे देश के कानूनों का गंभीर उल्लंघन है। माहौल को शांत करने की जरूरत है, और जो कोई भी इसे भड़काएगा और राष्ट्रपति की जान को धमकी देगा, उसे जवाबदेह ठहराया जाएगा।”

ब्लैंच ने कहा कि यह केस समय के साथ तैयार किया गया है। उन्होंने कहा, “यह जांच अभी शुरू नहीं हुई है। यह पिछले एक साल में कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा किए गए बहुत सारे काम का नतीजा है।” उन्होंने आगे कहा कि ऐसे मामलों में अक्सर डिवाइस, बातचीत और कानूनी सुरक्षा उपायों की जांच करनी पड़ती है।

एफबीआई निदेशक काश पटेल ने कहा कि इस मामले की जांच सामान्य प्रक्रिया के तहत की गई। उन्होंने कहा कि एफबीआई और न्याय विभाग हर मामले में एक जैसी गंभीरता और संसाधनों के साथ काम करते हैं। उनके अनुसार, कोमी ने कथित तौर पर राष्ट्रपति को धमकी दी थी।

पटेल ने बताया कि बाद में यह पोस्ट हटा दी गई थी। उनके अनुसार, पोस्ट करने के थोड़ी देर बाद कोमी ने उसे डिलीट कर दिया और माफी भी मांगी।

अमेरिकी अटॉर्नी एलिस बॉयल ने कहा कि कानून सभी के लिए समान है। उन्होंने कहा कि चाहे कोई कितना भी बड़ा पद क्यों न रखता हो, अगर वह कानून तोड़ता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

कोमी पर संघीय कानूनों के तहत आरोप लगाए गए हैं, जो राष्ट्रपति को धमकी देने और एक राज्य से दूसरे राज्य में धमकी भेजने को अपराध मानते हैं। अगर वे दोषी साबित होते हैं, तो उन्हें अधिकतम 10 साल की सजा हो सकती है।

अधिकारियों ने सबूतों पर विस्तार से बात करने से मना कर दिया। ब्लैंच ने कहा कि इरादा “गवाहों, दस्तावेजों और खुद आरोपी के जरिए साबित किया जाएगा, जहां तक यह सही होगा।”

उन्होंने कहा कि यह मामला भी दूसरे मामलों की तरह ही कोर्ट में चलेगा। उन्होंने कहा कि यह मामला भी हर साल आने वाले सैकड़ों दूसरे मामलों की तरह ही आगे बढ़ेगा और बताया कि इस मामले में भी आरोप तय करने की तारीख तय की जाएगी।

ध्यान देने वाली बात यह है कि आरोप पत्र केवल एक आरोप है। जब तक अदालत में दोष साबित नहीं हो जाता, तब तक कोमी को निर्दोष माना जाएगा। अमेरिका में राष्ट्रपति को धमकी देना एक गंभीर अपराध है और हाल के वर्षों में ऐसे कई मामलों में कार्रवाई की गई है, क्योंकि सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ धमकियों की संख्या बढ़ी है।

–आईएएनएस

एएस/

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