कांगो में इबोला के मामलों की संख्या बढ़कर 689 हुई, मृतकों की संख्या 139 पहुंची

Summary :

किंशासा, 13 जून (आईएएनएस)। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो (डीआरसी) में इबोला के पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 689 हो गई है, जिनमें 139 लोगों की मौत शामिल है। यह जानकारी स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा जारी नवीनतम स्थिति रिपोर्ट में दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को 17 नए पुष्ट मामले सामने आए, जिनमें पांच मौतें शामिल हैं। ये सभी मामले पूर्वी प्रांत इटुरी में दर्ज किए गए। इबोला वायरस के बुंडिबुग्यो स्ट्रेन से फैले इस प्रकोप ने पूर्वी क्षेत्र के तीन प्रांतों- इटुरी, नॉर्थ किवू और साउथ किवू के 29 स्वास्थ्य क्षेत्रों को प्रभावित किया है। गुरुवार तक 168…

किंशासा, 13 जून (आईएएनएस)। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो (डीआरसी) में इबोला के पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 689 हो गई है, जिनमें 139 लोगों की मौत शामिल है। यह जानकारी स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा जारी नवीनतम स्थिति रिपोर्ट में दी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को 17 नए पुष्ट मामले सामने आए, जिनमें पांच मौतें शामिल हैं। ये सभी मामले पूर्वी प्रांत इटुरी में दर्ज किए गए। इबोला वायरस के बुंडिबुग्यो स्ट्रेन से फैले इस प्रकोप ने पूर्वी क्षेत्र के तीन प्रांतों- इटुरी, नॉर्थ किवू और साउथ किवू के 29 स्वास्थ्य क्षेत्रों को प्रभावित किया है।

गुरुवार तक 168 संदिग्ध मामले भी दर्ज किए गए थे, जिनमें 64 लोगों की मौत हो चुकी है।

रिपोर्ट में कई परिचालन चुनौतियों का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें मृत्यु के बाद नमूना परीक्षण (पोस्ट-मॉर्टम स्वैबिंग) कराने में लोगों की अनिच्छा, इबोला उपचार केंद्रों की सीमित क्षमता, नॉर्थ किवू में संक्रमण रोकथाम और नियंत्रण सामग्री की कमी, तीनों प्रांतों में चेतावनी एवं निगरानी रिपोर्टिंग प्रणाली की कमजोरी तथा 2.15 करोड़ डॉलर (21.5 मिलियन डॉलर) की वित्तीय कमी शामिल है।

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) द्वारा गुरुवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, इटुरी में आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों (आईडीपी) के एक शिविर में इबोला से संबंधित दो मौतें दर्ज की गई हैं।

वर्तमान प्रकोप को डीआरसी के स्वास्थ्य मंत्रालय ने 15 मई को आधिकारिक रूप से घोषित किया था। समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, 1976 में वायरस की पहचान होने के बाद से यह देश में इबोला का 17वां प्रकोप है।

मई 2026 में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा दोनों में इबोला प्रकोप की पुष्टि हुई थी। इस बार फैला बुंडिबुग्यो प्रजाति का इबोला ऐसा प्रकार है, जिसके लिए अभी तक कोई स्वीकृत टीका या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है, हालांकि संभावित वैक्सीन और उपचारों के परीक्षण जारी हैं।

यह प्रकोप ऐसे समय में फैल रहा है जब क्षेत्र मानवीय संकट, दूरस्थ और घनी आबादी वाले इलाकों, असुरक्षा की स्थिति तथा लोगों और व्यापारिक गतिविधियों की अधिक आवाजाही जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है।

इबोला रोग पहली बार 1976 में दो अलग-अलग प्रकोपों के रूप में सामने आया था। पहला प्रकोप वर्तमान दक्षिण सूडान के नज़ारा क्षेत्र में सूडान वायरस रोग के रूप में हुआ था, जबकि दूसरा प्रकोप वर्तमान डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के यामबुकु क्षेत्र में इबोला वायरस रोग के रूप में दर्ज किया गया था।

दूसरा प्रकोप इबोला नदी के निकट स्थित एक गांव में हुआ था, और इसी नदी के नाम पर इस बीमारी का नाम इबोला रखा गया।

–आईएएनएस

पीएम

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

News Desk

News Desk is the editorial team of Punjab Kesari. This article is based on information provided by IANS.