सोल, 7 नवंबर (आईएएनएस)। उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ते सैन्य तनाव को कम करने का उपाय संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सुझाया है। उन्होंने दोनों देशों से आपसी संचार माध्यम बहाल करने की अपील की है। विशेष रूप से दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीधा संपर्क फिर शुरू करने पर जोर दिया, ताकि सीमा पर किसी अनचाही सैन्य घटना या गलतफहमी को टाला जा सके।
योनहाप न्यूज एजेंसी में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने गुरुवार को नियमित प्रेस वार्ता में बताया कि महासचिव को कोरियाई प्रायद्वीप की स्थिति और असैन्यीकृत क्षेत्र (डीएमजेड) में तनाव बढ़ने की आशंका को लेकर चिंता है।
दुजारिक ने कहा, “गुटेरेस संबंधित पक्षों को सैन्य स्तर सहित सभी संचार माध्यमों को फिर शुरू करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। इसका उद्देश्य किसी अनचाही घटना या गलत आकलन से पैदा होने वाले टकराव को रोकना है।”
उन्होंने कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव कम करने और स्थायी शांति हासिल करने का एकमात्र रास्ता कूटनीतिक बातचीत और नए सिरे से संवाद कायम करना है।
21 सितंबर को दोनों देशों के बीच स्थित डीएमजेड में बारूदी सुरंग विस्फोट के बाद तनाव बढ़ गया है। इस घटना में दक्षिण कोरिया के तीन सैनिक घायल हुए थे, जिनमें दो की हालत गंभीर थी।
दक्षिण कोरिया की सेना और संयुक्त राष्ट्र कमान की संयुक्त जांच में निष्कर्ष निकाला गया कि यह विस्फोट उत्तर कोरिया की ओर से सैन्य सीमांकन रेखा के दक्षिण में जानबूझकर बिछाई गई कार्मिक रोधी बारूदी सुरंगों के कारण हुआ था। हालांकि, उत्तर कोरिया ने इस आरोप को खारिज करते हुए दक्षिण कोरिया की जांच के निष्कर्षों को मनगढ़ंत बताया।
दक्षिण कोरिया ने इस मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी उठाया है। 22 अक्टूबर को भेजे गए पत्र में उसने उत्तर कोरिया से घटना के लिए माफी मांगने, बारूदी सुरंगें हटाने और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कदम उठाने की मांग की थी।
इससे पहले 23 अक्टूबर को दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया के सामने सैन्य वार्ता का प्रस्ताव रखा था। सोल चाहता है कि दोनों देशों के अधिकारी सैन्य सीमांकन रेखा की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने, सैन्य संचार माध्यमों को बहाल करने और सीमा पर आकस्मिक झड़पों को रोकने के उपायों पर बातचीत करें। दक्षिण कोरिया ने जरूरत पड़ने पर अमेरिका के नेतृत्व वाली संयुक्त राष्ट्र कमान को शामिल करते हुए त्रिपक्षीय वार्ता का विकल्प भी दिया था।
कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव के बीच संचार माध्यमों का बंद होना एक बड़ी चिंता है। उत्तर कोरिया ने पहले दक्षिण कोरिया के साथ अपने कई संचार संपर्क तोड़ दिए थे। ऐसे में सैन्य अधिकारियों के बीच सीधा संपर्क नहीं होने से सीमा पर किसी घटना के दौरान गलतफहमी और टकराव बढ़ने का खतरा बना रहता है।
दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने भी अटलांटा में आयोजित जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान कहा था कि मौजूदा परिस्थितियों में दोनों कोरियाई देशों के बीच संवाद पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
–आईएएनएस
केआर/
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