वाशिंगटन, 7 नवंबर (आईएएनएस)। न्यू जर्सी के ओक ट्री रोड पर रामलीला, शिकागो के पास शानदार आतिशबाजी और टोरंटो में स्ट्रीट मेले ने दीपावली के प्रति बढ़ते रुझान का संकेत दिया। अमेरिका और कनाडा में दीपोत्सव की धूम देखने को मिल रही है। लोग संगीत, मिठाइयों और आपसी मेल-जोल के साथ इस पर्व को मना रहे हैं। इन भव्य आयोजनों ने इस पर्व को अब सिर्फ घरों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि यह त्योहार आस-पड़ोस और शॉपिंग इलाकों तक पहुंच गया है।
रविवार (8 नवंबर) को दिवाली होने के कारण, इस वीकेंड पर मंदिरों में उत्सव, खास दावतें और रोशनी से सजे सार्वजनिक स्थल देखने को मिलेंगे। इससे पहले भी कई कार्यक्रमों के जरिए न्यूयॉर्क के जैक्सन हाइट्स और न्यू जर्सी के इंडियन शॉपिंग कॉरिडोर में परिवारों को एक साथ आने का मौका मिला है।
क्वींस के जैक्सन हाइट्स में, ‘इंडियन मर्चेंट्स एसोसिएशन’ ने 1 नवंबर को 37वें एवेन्यू और 37वें रोड के बीच, 74वीं स्ट्रीट पर एक मेले का आयोजन किया। इस स्थानीय कार्यक्रम में लाइव म्यूजिक और परिवारों व दोस्तों के लिए जश्न मनाने की व्यवस्था थी।
न्यू जर्सी के इसेलिन में ओक ट्री रोड पर, ‘राज ज्वेल्स’ की पार्किंग में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें रामलीला, संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां शामिल थीं।
इस उत्सव में पंडित सत्य नारायण चरका और शास्त्रीय संगीत-नृत्य में प्रशिक्षित 40 कलाकारों ने रामलीला का मंचन किया। शानदार वेशभूषा, नृत्य और अंग्रेजी में सुनाई गई कथा के माध्यम से भगवान राम की कहानी दर्शकों के सामने पेश की गई।
‘पैच’ की शुक्रवार की रिपोर्ट के अनुसार, एडिसन में शनिवार को ‘पापियानी पार्क’ में वार्षिक दिवाली उत्सव मनाया जाएगा। इसमें दीये जलाना, सांस्कृतिक नृत्य, खाने-पीने के स्टॉल, और मुफ्त चाय व मेहंदी जैसी सुविधाएं होंगी।
यहां 1 लाख से अधिक रोशनियां लगाने की योजना है, और शाम का समापन ‘पटेल ब्रदर्स’ द्वारा प्रायोजित ड्रोन शो और आतिशबाजी के साथ होगा। इस टाउनशिप की थीम “सेलिब्रेटिंग दिवाली इन अमेरिका 250” है, जो इस त्योहार को अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ से जोड़ती है।
‘ऑफिस ऑफ कल्चरल अफेयर्स’ के अनुसार, जर्सी सिटी में भी शनिवार को दोपहर 12 बजे से शाम 7 बजे तक ‘एक्सचेंज प्लेस’ पर “दिवाली टुगेदर 2026” का आयोजन किया जाएगा।
शिकागो में, एक भारतीय रेस्तरां रविवार तक शेफ जीत सिंह द्वारा तैयार किए गए खास दिवाली व्यंजन परोस रहा है। इनमें राज कचौरी चाट से लेकर जामुन के साथ चॉकलेट मूस तक कई तरह के पकवान शामिल हैं।
पास के बार्टलेट में, बीएपीएस श्री स्वामीनारायण मंदिर में शनिवार को आतिशबाजी और साउंड शो का आयोजन किया गया है। रविवार को यहां ‘चोपड़ा पूजन’ (अकाउंट बुक्स) होगा, जिसमें नई शुरुआत के प्रतीक के रूप में बही-खातों की पूजा की जाएगी।
लॉस एंजिल्स क्षेत्र में, चिनो हिल्स स्थित बीएपीएस मंदिर में शनिवार और रविवार को एक सामुदायिक उत्सव मनाया जाएगा, जिसके बाद सोमवार को ‘अन्नकूट’ और गुजराती नव वर्ष का जश्न होगा। इस कार्यक्रम में कार्निवल राइड्स, मिठाइयों की दुकान और लाइट-एंड-साउंड प्रेजेंटेशन शामिल हैं। संगीत की प्रस्तुतियां और इंटरैक्टिव प्रदर्शनी भगवान स्वामीनारायण के युवा स्वरूप ‘नीलकंठ’ की यात्रा को दर्शाएंगी।
सैन फ्रांसिस्को में ‘इंडियन रेस्टोरेंट वीक’ मनाया जा रहा है, जिसमें भारतीय वाणिज्य दूतावास (इंडियन कॉन्सुलेट) के सहयोग से छह रेस्तरां शामिल हैं। 14 नवंबर तक चलने वाले इस आयोजन में ‘रूह’, ‘कोपरा’ और ‘न्यू दिल्ली रेस्टोरेंट’ जैसे रेस्तरां हिस्सा ले रहे हैं।
वाशिंगटन के कोलंबिया हाइट्स इलाके में, ‘तमाशा’ रेस्तरां अपने डिनर मेन्यू में सोने की परत (गोल्ड लीफ) वाला बटर चिकन, रसगुल्ला चाट और दौलत की चाट पेश कर रहा है।
‘पॉपविले’ में छपी एक घोषणा के अनुसार, रविवार तक उपलब्ध इस मेन्यू को रेस्तरां ने “एक ऐसा दिवाली मेन्यू बताया है, जो दावत और आतिशबाजी दोनों का संगम है।”
कनाडाई सीमा के पार, टोरंटो के ‘जेरार्ड इंडिया बाजार’ में शनिवार शाम को एक वार्षिक आउटडोर मेले का आयोजन किया जाएगा। इसमें लाइव डीजे, डांस, फुलझड़ियां और फुटपाथ पर लगने वाली सेल शामिल होगी। जेरार्ड स्ट्रीट इलाके में 125 से ज्यादा दुकानें और रेस्तरां हैं।
मॉन्ट्रियल और उसके पड़ोसी इलाके ब्रोसार्ड में, ‘इंडिया रोजा’ रेस्तरां में रविवार तक चलने वाले जश्न के हिस्से के रूप में एक ‘विश ट्री’ (इच्छाओं का पेड़) लगाया गया है, जहां आने वाले लोग दिवाली के लिए अपनी कोई इच्छा या संदेश लिख कर छोड़ सकते हैं।
ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में दिवाली की तैयारियों के केंद्र में मिठाइयां हैं।
स्थानीय व्यवसायों के अलावा, कॉस्टको की अमेरिकी वेबसाइट पर 2026 की दिवाली सीरीज के तहत एक औंस का 24-कैरेट ‘पैम्प’ गोल्ड बार भी लिस्ट किया गया है।
दीपावली, जिसे मुख्य रूप से ‘रोशनी के त्योहार’ के रूप में जाना जाता है, हिंदू, जैन, सिख और कुछ बौद्ध समुदायों द्वारा मनाई जाती है। अलग-अलग समुदायों में इसे मनाने की परंपराएं और धार्मिक महत्व भी अलग-अलग होते हैं। आमतौर पर, दीये और रोशनी को अंधकार पर प्रकाश की, और अज्ञानता पर ज्ञान की जीत का प्रतीक माना जाता है।
–आईएएनएस
केआर/
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