अमेरिका के बिना होर्मुज मिशन की योजना बना रहा है यूरोप : रिपोर्ट

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वाशिंगटन, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। यूरोपीय देश अमेरिका और ईरान के बीच एक महीने से ज्यादा समय तक चले संघर्ष के बाद होर्मुज स्ट्रेट को लेकर एक योजना तैयार कर रहे हैं। यूरोपीय देश यह योजना होर्मुज स्ट्रेट से बिना अमेरिका के सीधे दखल के शिपिंग को सुरक्षित करने के लिए बना रहे हैं। ईरान-अमेरिका संघर्ष के दौरान ट्रांस-अटलांटिक संबंधों को नया रूप दिया है। बता दें, ट्रांस-अटलांटिक अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच एक रणनीतिक, सुरक्षा, राजनीतिक और आर्थिक साझेदारी है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से विश्व व्यवस्था की आधारशिला माना जाता रहा है। द वॉल स्ट्रीट…

वाशिंगटन, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। यूरोपीय देश अमेरिका और ईरान के बीच एक महीने से ज्यादा समय तक चले संघर्ष के बाद होर्मुज स्ट्रेट को लेकर एक योजना तैयार कर रहे हैं। यूरोपीय देश यह योजना होर्मुज स्ट्रेट से बिना अमेरिका के सीधे दखल के शिपिंग को सुरक्षित करने के लिए बना रहे हैं। ईरान-अमेरिका संघर्ष के दौरान ट्रांस-अटलांटिक संबंधों को नया रूप दिया है।

बता दें, ट्रांस-अटलांटिक अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच एक रणनीतिक, सुरक्षा, राजनीतिक और आर्थिक साझेदारी है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से विश्व व्यवस्था की आधारशिला माना जाता रहा है।

द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन और फ्रांस की अगुवाई में एक प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिसके तहत लड़ाई समाप्त होने के बाद समुद्री मार्गों पर भरोसा बहाल करने के लिए एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाया जाएगा।

अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि इस पहल में समुद्र में बिछी माइंस को हटाने के अभियान (माइन-क्लियरिंग ऑपरेशन) और नौसेना की तैनाती जैसे कदम शामिल होंगे। हालांकि, अमेरिका, इजरायल और ईरान जैसे सीधे तौर पर संघर्ष में शामिल देशों को इस गठबंधन से बाहर रखा जाएगा।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि यह मिशन डिफेंसिव होगा। यूरोपीय जहाज अमेरिकी कमांड के तहत काम नहीं करेंगे। इसका मकसद शिपिंग कंपनियों को यह भरोसा दिलाना है कि लड़ाई रुकने के बाद वापस लौटना सुरक्षित है।

यह प्लान तभी लॉन्च किया जाएगा जब शांति बहाल हो जाएगी। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने कहा कि गठबंधन ईरान और ओमान सहित स्ट्रेट से सटे देशों के साथ सहयोग करेगा। इससे पता चलता है कि किसी भी डिप्लॉयमेंट के लिए तेहरान की मंजूरी की जरूरत हो सकती है।

जर्मनी से एक अहम भूमिका निभाने की उम्मीद है। बर्लिन लंबे समय से विदेशी मिलिट्री ऑपरेशन को लेकर सतर्क रहा है। लेकिन अधिकारियों का कहना है कि वह जहाज और सर्विलांस एसेट्स दे सकता है, जिससे मिशन और भी अहम हो जाएगा।

इस प्लान के तीन मुख्य मकसद हैं। पहला, लॉजिस्टिक्स तैयार करना ताकि स्ट्रेट में फंसे सैकड़ों जहाज निकल सकें। दूसरा, लड़ाई की शुरुआत में ईरान द्वारा पानी के रास्ते के कुछ हिस्सों में माइनिंग करने के बाद बड़े पैमाने पर डीमाइनिंग करना। तीसरा, सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करने के लिए नेवल एस्कॉर्ट्स और सर्विलांस तैनात करना।

विश्लेषकों का मानना है कि डीमाइनिंग में समय लगेगा। यूरोप के पास अमेरिका के मुकाबले ऐसी ज्यादा क्षमता हैं, जिसने अपने माइनस्वीपिंग फ्लीट को कम कर दिया है। सीजफायर के बाद भी, इंश्योरेंस कंपनियों और शिपर्स को भरोसा दिलाने के लिए पश्चिमी नेवी की मौजूदगी की जरूरत पड़ सकती है। यूरेशिया समूह के मुजतबा रहमान ने कहा, “जहाजों की सुरक्षा के लिए किसी न किसी पॉइंट पर एस्कॉर्ट सिस्टम या किसी कॉन्वॉय की जरूरत होगी।”

यह प्लान कुछ हद तक रेड सी में यूरोपीय संघ के ऑपरेशन एस्पाइड्स पर आधारित है। उस मिशन ने हूती हमलों से कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा के लिए नेवी एस्कॉर्ट्स को सहयोग किया था। होर्मुज की कोशिश उस इलाके में पहले से तैनात अमेरिका के नेतृत्व वाले बड़े ऑपरेशन से अलग होगी।

यह प्रस्ताव यूरोप और वाशिंगटन के बीच बढ़ते मतभेदों के बीच आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय सहयोगियों से जबरदस्ती स्ट्रेट को फिर से खोलने में मदद करने की अपील की है। हालांकि, यूरोपीय नेताओं ने इसका विरोध किया और चेतावनी दी कि इस तरह के कदम से लड़ाई बढ़ सकती है और जहाजों को मिसाइल का खतरा हो सकता है।

अधिकारियों ने कहा कि चीन और भारत को बातचीत के लिए बुलाया गया है, हालांकि यह साफ नहीं है कि वे इसमें हिस्सा लेंगे या नहीं।

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल ले जाता है। कोई भी रुकावट ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर असर डालती है, जिसमें भारत जैसे बड़े इंपोर्टर भी शामिल हैं।

यह प्लान एक बड़े बदलाव को दिखाता है। अमेरिका की लंबे समय की मिलिट्री लीडरशिप पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में यूरोपीय देश ज्यादा सुरक्षा जिम्मेदारी लेने की तैयारी कर रहे हैं, खासकर जरूरी ट्रेड मार्ग पर।

–आईएएनएस

केके/एएस

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