मिल्वौकी, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। जी20 देशों ने खाने-पीने की चीजों को व्यापार के जरिए हथियार बनाने की निंदा करने पर सहमति बना ली है। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने इसका ऐलान किया और इसे एक अहम कदम बताया, ताकि कृषि उत्पादों का इस्तेमाल आर्थिक या राजनीतिक दबाव के लिए न किया जा सके।
यह सहमति मिल्वौकी में हुई जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में कई दिनों की चर्चा के बाद बनी है, जहां अमेरिका ने इस मुद्दे को दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के एजेंडे में रखा था।
जैमीसन ग्रीर ने पत्रकारों को बताया, “कई दिनों की चर्चा और सदस्यों की तरफ से कार्रवाई करने की इच्छा के बाद, हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हम व्यापारिक कार्रवाई के जरिए खाने को हथियार बनाने पर जी20 के बयान पर सहमति पर पहुंच गए हैं और हम इसे आज बाद में जारी करेंगे।”
उन्होंने कहा, “यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है कि कृषि उत्पादों का इस्तेमाल आर्थिक या राजनीतिक दबाव के औजार के रूप में न किया जाए।”
जैमीसन ग्रीर ने कहा कि अमेरिका की जी20 अध्यक्षता के दौरान यह मुद्दा इसलिए उठाया गया क्योंकि खाने, कृषि उत्पादों और कृषि से जुड़े सामानों के व्यापार का इस्तेमाल देशों पर दबाव डालने के लिए किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, “अमेरिकी अध्यक्षता के दौरान, हमने जी20 सत्रों में चर्चा की कि कैसे खाने और कृषि उत्पादों के व्यापार को आर्थिक या राजनीतिक कारणों से दबाव डालने के हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे लक्षित देशों में लोगों की रोजी-रोटी को खतरा होता है, प्रतिस्पर्धा बिगड़ती है और वैश्विक व्यापार प्रणाली पर भरोसा कम होता है।”
जैमीसन ग्रीर ने कहा कि खाने को हथियार बनाना जी20 की चर्चा के लिए एक नया विषय था, लेकिन यह समस्या नई नहीं है।
उन्होंने कहा, “जी20 सदस्यों के पास इस हफ्ते खाने को हथियार बनाने की निंदा करते हुए एक सामूहिक बयान देने का अनोखा मौका था, ताकि इस महत्वपूर्ण विषय पर जागरूकता बढ़ाई जा सके और वैश्विक स्तर पर इसके इस्तेमाल और प्रभाव को कम करने में मदद मिल सके।”
खाने के मुद्दे पर बनी सहमति के उलट, जी20 सदस्य मिल्वौकी बैठक में उठाए गए दो अन्य बड़े मुद्दों (जबरन मजदूरी और अतिरिक्त उत्पादन क्षमता) पर सहमत नहीं हो पाए।
जैमीसन ग्रीर ने कहा कि अमेरिका और अन्य सदस्य वैश्विक सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी के मुद्दे पर बयान पर सहमति नहीं बना सके।
उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हम जबरन मजदूरी पर बयान पर सहमति नहीं बना सके।”
जैमीसन ग्रीर ने बताया कि इसके बजाय कुछ व्यापारिक साझेदारों का एक छोटा समूह वैश्विक सप्लाई चेन से जबरन मजदूरी को खत्म करने पर संयुक्त बयान जारी करेगा।
जी20 अतिरिक्त उत्पादन के मुद्दे पर भी बयान पर सहमत नहीं हो पाया, हालांकि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि इस बात को व्यापक रूप से माना गया कि इस समस्या पर कार्रवाई की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि अतिरिक्त क्षमता को स्टील में एक समस्या के रूप में माना जाता है और यह ऑटोमोबाइल, बैटरी, सोलर पैनल, केमिकल और अन्य क्षेत्रों को भी प्रभावित करती है।
अमेरिका 2026 में जी20 की मेजबानी कर रहा है। जैमीसन ग्रीर ने कहा कि यह समूह वैश्विक जीडीपी का लगभग 85 प्रतिशत और दुनिया की दो-तिहाई आबादी का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे वैश्विक व्यापार प्रणाली की समस्याओं को हल करने में इसकी संभावित भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
–आईएएनएस
वीकेयू/एएस
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