सीएटल, 21 सितंबर (आईएएनएस)। मजबूत डिजिटल आधार और इंजीनियरिंग टैलेंट का बड़ा पूल भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित इनोवेशन में ग्लोबल लीडर बनने और साथ ही उद्यमियों की एक नई पीढ़ी तैयार करने की मजबूत स्थिति में लाता है। यह जानकारी टेक्नोलॉजी एग्जीक्यूटिव्स की ओर से सोमवार को दी गई।
सीएटल में आईएएनएस को दिए अलग-अलग इंटरव्यू में, रिदम के सीईओ और को-फाउंडर वेट्री वलोर और वीम के सीईओ आनंद ईश्वरन ने कहा कि देश को सिर्फ नौकरियां पैदा करने पर ही नहीं, बल्कि एक ऐसा इनोवेशन-आधारित इकोसिस्टम बनाने पर भी ध्यान देना चाहिए, जिससे लाखों भारतीय अपना बिजनेस शुरू कर सकें और उसे बढ़ा सकें।
ईश्वरन ने कहा कि भारत ने अपनी डिजिटल पहचान और डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए बड़े पैमाने पर तकनीकी बदलाव के लिए जरूरी आधार पहले ही तैयार कर लिया है।
उन्होंने कहा, “अभी भारत के पास एआई का इस्तेमाल करने और ऐसे नतीजे दिखाने का मौका है, जिनका इस्तेमाल करके दुनिया मानवता के भले के लिए एआई के फायदे हासिल कर सकती है।”
उन्होंने ग्लोबल इनोवेशन में भारत की स्थिति को मजबूत करने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को दिया। उन्होंने कहा, “एक अरब से ज्यादा लोगों के लिए काम करने वाला डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना एक बहुत बड़ी और मुश्किल उपलब्धि थी।”
ईश्वरन का कहना था कि भारत में खेती, हेल्थकेयर और पब्लिक सर्विस जैसे क्षेत्रों में एआई-आधारित समाधान विकसित करने की क्षमता है। इससे ऐसे एप्लिकेशन बनाए जा सकते हैं जो फसल की पैदावार बढ़ा सकें, संक्रामक बीमारियों से लड़ सकें और समाज को साफ तौर पर फायदा पहुंचा सकें।
उनके अनुसार, देश का टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम न सिर्फ घरेलू जरूरतों को पूरा करने का मौका देता है, बल्कि ऐसे समाधान भी बनाने का अवसर देता है जिन्हें दुनिया भर में अपनाया जा सके।
वैलर ने इनमें से कई विचारों से सहमति जताई, लेकिन कहा कि भारत को रोजगार के अवसर पैदा करने के साथ-साथ उद्यमी तैयार करने पर भी ज्यादा जोर देना चाहिए।
वैलर ने कहा कि आर्थिक विकास पर होने वाली चर्चाओं में अकसर नौकरियों के सृजन पर ध्यान दिया जाता है, लेकिन देश को एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने की दिशा में भी काम करना चाहिए जो लोगों को बिजनेस शुरू करने में मदद करे। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी, टैलेंट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक पहुंच के साथ, भारत में लाखों एंटरप्रेन्योर तैयार करने की क्षमता है।
वैलर के अनुसार, भारतीय-अमेरिकी समुदाय इस बदलाव में अहम भूमिका निभा सकता है। वे अपनी तकनीकी विशेषज्ञता साझा कर सकते हैं, फाउंडर्स को मेंटरिंग दे सकते हैं और ऐसे पॉलिसी आइडिया दे सकते हैं जो भारत को उभरते तकनीकी बदलावों को समझने और अपनाने में मदद करें।
उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी के अलावा, अमेरिका में भारतीयों के एंटरप्रेन्योरशिप सफर से मिली सीख भारत में पॉलिसी बनाने वालों और नए फाउंडर्स के लिए उपयोगी जानकारी दे सकती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर चर्चा करते हुए, वैलर ने एआई को एक शक्तिशाली माध्यम बताया जो जानकारी और ज्ञान तक पहुंच को सबके लिए सुलभ बना सकता है। उन्होंने कहा कि जानकारी की कमी के कारण अतीत में कई लोग अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर पाए, और एआई विशेषज्ञता और जानकारी को ज्यादा सुलभ बनाकर उस कमी को दूर करने में मदद कर रहा है।
–आईएएनएस
एबीएस
(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)


Download Android App
Download iOS App



