वाशिंगटन, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत और अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर 20 दिन तक चलने वाला एंटी-सबमरीन युद्ध अभ्यास सफलतापूर्वक पूरा किया। यह अभ्यास ‘एक्सरसाइज सी ड्रैगन 2026’ के तहत गुआम में आयोजित किया गया, जो 28 मार्च को एंडरसन वायु सेना बेस पर समाप्त हुआ।
इस अभ्यास में अमेरिका और भारत के साथ-साथ जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने हिस्सा लिया। इसका मुख्य उद्देश्य समुद्र के भीतर मौजूद खतरों की पहचान और उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता को बेहतर बनाना था।
अभ्यास की मेजबानी कमांडर टास्क फोर्स 72 ने की। इसमें अमेरिकी नौसेना के अत्याधुनिक पी-8ए पोसाइडन विमान के साथ भारतीय नौसेना, जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स, रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स और रॉयल न्यूजीलैंड एयर फोर्स के विमान शामिल हुए। सभी देशों ने मिलकर जटिल समुद्री माहौल में संयुक्त ऑपरेशन की क्षमता को परखा।
अधिकारियों के अनुसार, इस अभ्यास का मकसद देशों के बीच तालमेल बढ़ाना और समुद्री गतिविधियों की साझा निगरानी को मजबूत करना था। अभ्यास के दौरान ‘एमके-30’ नाम के मोबाइल एंटी-सबमरीन ट्रेनिंग टारगेट का इस्तेमाल कर ट्रैकिंग ड्रिल कराई गई। साथ ही एक सक्रिय नौसेना पनडुब्बी को खोजने और उस पर कार्रवाई करने का लाइव अभ्यास भी किया गया।
इस साल अभ्यास साइपन के आसपास भी हुआ, जहां प्रतिभागी देशों ने रिकवर किए जा सकने वाले एक्सरसाइज टॉरपीडो का इस्तेमाल किया। इससे उनकी ऑपरेशनल क्षमता में और विस्तार देखने को मिला।
अभ्यास में एक प्रतिस्पर्धात्मक पहलू भी शामिल था, जिसमें हर देश के प्रदर्शन को वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर आंका गया। इस बार जापान की पैट्रोल एंड रिकॉनिसेंस स्क्वाड्रन 3 ने ‘ड्रैगन बेल्ट’ अवॉर्ड जीता, जो पिछले साल ऑस्ट्रेलिया के पास था।
अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि ऐसे अभ्यास क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे साझेदार देशों की ताकत और तैयारी दोनों बढ़ती हैं और इंडो-पैसिफिक में किसी भी संभावित खतरे को रोकने में मदद मिलती है।
2019 से हर साल आयोजित हो रहा यह अभ्यास अब इंडो-पैसिफिक में सैन्य सहयोग का एक मजबूत मंच बन चुका है। इसमें भारत की भागीदारी क्षेत्र में उसकी बढ़ती रणनीतिक भूमिका और समुद्री सुरक्षा को लेकर उसकी सक्रिय नीति को भी दर्शाती है।
–आईएएनएस
वीकेयू/एएस
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