जुलाई चार्टर कुछ और नहीं अंतरिम सरकार का दिया धोखा: बांग्लादेश के गृह मंत्री

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ढाका, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। बांग्लादेश में जुलाई चार्टर को लेकर राजनीति जारी है। देश के गृहमंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के दौरान जारी ‘जुलाई नेशनल चार्टर (कॉन्स्टिट्यूशनल रिफॉर्म) इम्प्लीमेंटेशन ऑर्डर, 2025’ की कड़ी निंदा की और इसे “धोखे का कभी न खत्म होने वाला डॉक्यूमेंट” और “नेशनल फ्रॉड” बताया है। स्थानीय मीडिया ने उनके बयान को प्रमुखता से छापा है। विपक्ष के नेता और जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने संसद में अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि “ये निर्देश कानूनी तौर पर वैध नहीं हैं।” बांग्लादेशी डेली ढाका ट्रिब्यून ने अहमद के हवाले से कहा,…

ढाका, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। बांग्लादेश में जुलाई चार्टर को लेकर राजनीति जारी है। देश के गृहमंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के दौरान जारी ‘जुलाई नेशनल चार्टर (कॉन्स्टिट्यूशनल रिफॉर्म) इम्प्लीमेंटेशन ऑर्डर, 2025’ की कड़ी निंदा की और इसे “धोखे का कभी न खत्म होने वाला डॉक्यूमेंट” और “नेशनल फ्रॉड” बताया है।

स्थानीय मीडिया ने उनके बयान को प्रमुखता से छापा है। विपक्ष के नेता और जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने संसद में अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि “ये निर्देश कानूनी तौर पर वैध नहीं हैं।”

बांग्लादेशी डेली ढाका ट्रिब्यून ने अहमद के हवाले से कहा, “इस आदेश का कोई कानूनी आधार नहीं है और यह शुरू से ही गैरकानूनी है।”

उन्होंने अंतरिम सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि डॉक्यूमेंट पेश करने से पहले अलग-अलग सियासी दलों की ओर से जमा किए गए “असहमति के नोट्स” को शामिल नहीं किया गया।

अहमद ने आगे कहा, “यह अंतरिम सरकार की लगातार धोखा देने की प्रवृत्ति दर्शाती है। सियासी पार्टियों की अलग राय के बावजूद इसे जनता के सामने पेश करना देश के साथ धोखा है।”

उन्होंने पिछली अंतरिम सरकार की सलाह पर जुलाई चार्टर पर जारी प्रेसिडेंशियल ऑर्डर की वैधता पर भी सवाल उठाया, यह तर्क देते हुए कि ऐसे निर्देश जारी करने का अधिकार 7 अप्रैल, 1973 के बाद खत्म हो गया था।

उन्होंने सवाल किया, “7 अप्रैल, 1973 के बाद, राष्ट्रपति के पास ऐसा ऑर्डर जारी करने का अधिकार नहीं रहा। तो यह ऑर्डर कैसे जारी किया गया?”

अहमद ने आगे कहा कि जो ऑर्डर शुरू से ही अवैध है, वह कानूनी तौर पर “वॉयड-अब-इनिशियो” (शुरू से ही शून्य) है और इसलिए उसे अध्यादेश या कानून के तौर पर मान्यता नहीं दी जा सकती।

12 फरवरी को राष्ट्रीय चुनाव के साथ हुए जनमत संग्रह बैलेट स्ट्रक्चर (मत पत्र संरचना) की आलोचना करते हुए, गृहमंत्री ने कहा कि मतदाताओं को चार अलग-अलग सवालों का जवाब एक सामान्य “हां” या “नहीं” में देने के लिए मजबूर किया गया था, और इस बात पर बल दिया कि इस तरह से जनता पर कोई कानून नहीं थोपा जाना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि पिछली अंतरिम सरकार के पास मूल राष्ट्रीय मुद्दों पर फैसले लेने का अधिकार नहीं था।

अहमद ने कॉन्स्टिट्यूशनल रिफॉर्म काउंसिल सदस्यों के शपथ लेने को लेकर बांग्लादेश के चुनाव आयोग की भी आलोचना की, और कहा कि “एक ऐसी बॉडी जो है ही नहीं” को शपथ दिलाने का कोई कानूनी आधार नहीं है।

इस बीच, विपक्ष ने दावा किया कि जुलाई नेशनल चार्टर (कॉन्स्टिट्यूशनल रिफॉर्म) इम्प्लीमेंटेशन ऑर्डर, 2025, कानूनी था और जनमत और जुलाई चार्टर की भावना का सम्मान करने की मांग की।

बांग्लादेश के बड़े अखबार ने विपक्षी नेता रहमान के हवाले से कहा, “गृहमंत्री ने इस आदेश को कभी न खत्म होने वाला धोखा बताया। उन्होंने कहा कि अंतरिम सरकार और राष्ट्रपति ने मिलकर यह किया। यह ऑर्डर पिछले साल 13 नवंबर को जारी किया गया था और इस साल 12 फरवरी को वोटिंग हुई। उनकी (बीएनपी की) मांग की वजह से, संसद और रेफरेंडम एक ही दिन हुए, और सरकार ने उन्हें औपचारिक बधाई दी। इसलिए, ये माना जा सकता है कि जनमत संग्रह भी उनकी मांग थी।”

जमात नेता ने आगे कहा कि अहमद और प्रधानमंत्री तारिक रहमान दोनों ने जनमत संग्रह में “हां” को सपोर्ट किया था।

रहमान ने कहा, “हमने अपनी स्थिति नहीं बदली है,” और अगर रेफरेंडम को गैर-संवैधानिक घोषित कर दिया जाता है, तो पिछले कई जनमत संग्रह जांच के दायरे में आ जाएंगे।

सत्ताधारी बीएनपी सरकार अंतरिम सरकार के कार्यकाल में लाए गए संवैधानिक बदलावों से पैदा हुई चुनौतियों का सामना कर रही है।

–आईएएनएस

केआर/

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