वाशिंगटन, 19 मई (आईएएनएस)। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने भारत-अमेरिका रिश्तों में तनाव को लेकर उठ रही चिंताओं को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और इन्हें अमेरिका की दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियों का समर्थन प्राप्त है। साथ ही, ये रिश्ते व्यापार, तकनीक, रक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्रों में लगातार आगे बढ़ रहे हैं।
अमेरिका-भारत मैत्री परिषद की ओर से आयोजित ‘कैपिटल हिल समिट 2026’ को संबोधित करते हुए क्वात्रा ने कहा कि संबंधों में तनाव को लेकर बनाई जा रही कई धारणाएं जमीनी हकीकत पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने कहा, “हम स्वाभाविक साझेदार हैं, सिर्फ भौगोलिक वजह से नहीं, बल्कि हमारे साझा मूल्यों की वजह से भी।” इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी कांग्रेस में दिए गए भाषण को भी याद किया।
राजदूत ने कहा कि पिछले 20 वर्षों में हर अमेरिकी सरकार ने भारत के साथ रिश्तों को मजबूत करने के लिए पिछली सरकार की उपलब्धियों को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा, “अगर आप पिछले दशकों और अलग-अलग सरकारों के दौरान रिश्तों की कड़ी को देखें, तो पाएंगे कि हर सरकार ने पिछली सरकार की उपलब्धियों को आगे बढ़ाने की कोशिश की और उसमें सफलता भी हासिल की।”
क्वात्रा ने कहा कि 2014 के बाद भारत की आर्थिक तरक्की अमेरिका के साथ बढ़ते सहयोग का एक बड़ा कारण रही है। उन्होंने कहा, “मैं यह जरूर बताना चाहूंगा कि भारत में इस समय कई बड़े बदलाव और विकास कार्य चल रहे हैं।”
आर्थिक रिश्तों पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि भारत और अमेरिका ने सालाना व्यापार को मौजूदा लगभग 220 अरब डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को दोनों देशों की साझेदारी का सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र बताया और कहा कि दोनों देशों के बीच बेहतर तालमेल और लंबे समय के रक्षा समझौते हो रहे हैं।
उन्होंने कहा, “आज भारत, अमेरिका के बाहर अमेरिकी रक्षा उपकरणों का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है।”
क्वात्रा ने सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिजों और असैन्य परमाणु सहयोग में हुई प्रगति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत में हाल ही में पारित सिविल न्यूक्लियर कानून ने निजी क्षेत्र के सहयोग के नए रास्ते खोल दिए हैं।
तकनीकी सहयोग पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि माइक्रॉन जैसी अमेरिकी कंपनियों समेत कई बड़ी कंपनियां भारत के सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में निवेश कर रही हैं।
राजदूत ने सवाल-जवाब के दौरान भारत की बौद्धिक संपदा (आईपी) सुरक्षा का भी मजबूती से बचाव किया। उन्होंने कहा, “भारत में करीब 2,000 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर हैं, जिनमें से लगभग आधे अमेरिकी कंपनियों के हैं। इससे भारत में पेटेंट, ट्रेडमार्क और आईपी सुरक्षा की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।”
शिक्षा सहयोग पर एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भारत ‘वैश्विक स्तर की उत्कृष्ट संस्थाएं’ बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय छात्रों और शोधकर्ताओं को आकर्षित कर सकें।
–आईएएनएस
एवाई/एएस
(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)


Download Android App
Download iOS App


