विदेश मंत्री जयशंकर ने विज्ञान और गणित में भारत के योगदान को मान्यता देने का किया आग्रह

Summary :

संयुक्त राष्ट्र, 12 मई (आईएएनएस)। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने गणित और विज्ञान के इतिहास को लेकर प्रचलित “एक-आयामी दृष्टिकोण” से आगे बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने ऐसी समावेशी और लोकतांत्रिक ऐतिहासिक सोच की वकालत की, जो इन क्षेत्रों में भारत के मूलभूत योगदान को उचित पहचान दे। सोमवार को यहां गणित में भारत के योगदान पर एक एग्जिबिशन का उद्घाटन करते हुए, उन्होंने तीसरी सदी में भारत में विकसित हुए बाइनरी सिस्टम का उदाहरण दिया, जिसकी नींव पर डिजिटल युग और एआई में दुनिया का सफर टिका है। उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे हम एआई के…

संयुक्त राष्ट्र, 12 मई (आईएएनएस)। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने गणित और विज्ञान के इतिहास को लेकर प्रचलित “एक-आयामी दृष्टिकोण” से आगे बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने ऐसी समावेशी और लोकतांत्रिक ऐतिहासिक सोच की वकालत की, जो इन क्षेत्रों में भारत के मूलभूत योगदान को उचित पहचान दे।

सोमवार को यहां गणित में भारत के योगदान पर एक एग्जिबिशन का उद्घाटन करते हुए, उन्होंने तीसरी सदी में भारत में विकसित हुए बाइनरी सिस्टम का उदाहरण दिया, जिसकी नींव पर डिजिटल युग और एआई में दुनिया का सफर टिका है।

उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे हम एआई के सफर पर निकलेंगे, ये सच और साफ होते जाएंगे, जहां अतीत की हमारी समझ भविष्य के टूल्स से फायदा उठाएगी। यह एग्जिबिशन याद दिलाती है कि गणित यूनिवर्सल है और इसके विस्तार से दुनिया भर में अच्छा काम हुआ है और हो रहा है।”

उन्होंने कहा कि फरवरी में भारत में हुए एआई इम्पैक्ट समिट ने एक मजबूत मैसेज दिया कि क्रिएटिविटी और इनोवेशन कुछ लोगों तक सीमित नहीं रह सकते।

विदेश मंत्री ने कहा, “अतीत की गलतियों को ठीक करके ही हम भविष्य के मुद्दों को सही तरीके से सुलझा सकते हैं। यह यूएन के लिए मायने रखता है, क्योंकि एक अलग-अलग तरह का और लोकतांत्रिक समूह एक ही तरह की कहानी पर नहीं बन सकता।”

डॉ एस जयशंकर ने आगे कहा, “हमें यह समझने की जरूरत है कि तकनीक के लोकतंत्रीकरण के लिए, असल में, दुनिया के लोकतंत्रीकरण के लिए, इतिहास के लोकतंत्रीकरण की जरूरत है।”

उन्होंने कहा, “बहुत लंबे समय से वैज्ञानिक तरक्की को एक छोटी नजर से देखा जाता रहा है, जो समय और भूगोल में सीमित है।”

लेकिन उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे भू-राजनीतिक उथल-पुथल से राजनीतिक और आर्थिक पुनर्संतुलन हो रहा है, यह जरूरी तौर पर सांस्कृतिक पुनर्संतुलन का रास्ता भी बना रहा है और यह अलग-अलग तरह की बातों के लिए जगह बनाकर किया जाएगा।”

इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के एसएएमएचआईटीए प्रोग्राम के तहत इंटरैक्टिव एग्जिबिशन, ‘ग्लोबल डिफ्यूजन ऑफ मैथमेटिक्स’ बनाई गई थी ताकि भारत की सीखी हुई विरासत को दिखाया जा सके। यह विरासत मेडिसिन, गणित, आर्किटेक्चर, फिलॉसफी, एस्थेटिक्स और लिटरेचर जैसे फील्ड्स में फैली हुई है।

डिजिटल पैनल्स की एक सीरीज भारत की पुरानी मैथमेटिकल ताकत को दिखाती है, जिसमें बेसिक बाइनरी न्यूमेरिकल सिस्टम से लेकर अलजेब्रा और कैलकुलस तक शामिल हैं।

डिस्प्ले पर मैथमेटिकल लैंडमार्क थे जिनका जिक्र विदेश मंत्री जयशंकर ने किया: बाइनरी सिस्टम जिसकी जड़ें पिंगला के तीसरी सदी के छंद सूत्र में हैं; पुराने श्लोकों की रिदम जो असल में एल्गोरिद्मिक थी; पाई के लिए इनफिनिट सीरीज और जिसे अब पाइथागोरस थ्योरम कहा जाता है, उसके प्रिंसिपल्स।

डॉ. जयशंकर ने कहा कि प्रतिनिधियों के प्रवेश द्वार पर लगाई गई यह प्रदर्शनी, जो संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों के शीर्ष राजनयिकों के लिए एक प्रमुख मार्ग है, आज के दौर में तकनीक को अपनाने को लेकर मौजूद पूर्वाग्रहों और धारणाओं को दूर करने में भी मददगार साबित होगी।

भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा, “यह प्रदर्शनी शून्य, दशमलव प्रणाली, बीजगणित, त्रिकोणमिति और अनंत जैसी मूलभूत अवधारणाओं की यात्रा को दर्शाती है, जिनकी शुरुआती सोच भारत में विकसित हुई और जो बगदाद तथा टोलेडो जैसे ज्ञान केंद्रों के माध्यम से विभिन्न संस्कृतियों तक पहुंचते हुए पूरी दुनिया में फैली।”

उन्होंने कहा, “भारत ने हमेशा अपना ज्ञान पूरी दुनिया को दिया है। आज की भाषा में ओपन सोर्स, यह बहुत पुराने समय से एक भारतीय मंत्र रहा है।”

–आईएएनएस

केके/एएस

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

News Desk

News Desk is the editorial team of Punjab Kesari. This article is based on information provided by IANS.