नई दिल्ली, 7 मई (आईएएनएस)। ऑपरेशन सिंदूर ने 2026 में पाकिस्तान के आर्थिक संकट को और गहरा कर दिया। इसके कारण निवेशकों का भरोसा कम हुआ है। वहीं, पर्यटन, विमानन क्षेत्र और सैन्य निर्यात जैसे उभरते हुए क्षेत्रों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।
ग्रीस के मीडिया हाउस ग्रीस सिटी टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि मई 2025 के सैन्य अभियान ने महंगाई को बढ़ा दिया है। साथ ही, विकास की गति और निवेशकों के विश्वास को कम कर दिया। इससे देश की पहले से ही कमजोर आर्थिक स्थिति को और खराब हो हई है।
इससे पहले से ही भारी ऋण दायित्वों, बाहरी वित्तपोषण के दबाव, कमजोर विदेशी मुद्रा भंडार और बहुपक्षीय सहायता पर निर्भरता से जूझ रही अर्थव्यवस्था के लिए अनिश्चितता और बढ़ गई।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि ऑपरेशन सिंदूर ने निवेशकों का विश्वास कम कर दिया और संभवतः कई निवेशकों को प्रतीक्षा करने और स्थिति का सामना करने के लिए मजबूर कर दिया है।
2025 में, देश को लगातार राजकोषीय घाटे, सीमित कर आधार और उच्च ऋण-सेवा लागतों का सामना करना पड़ा।
रिपोर्ट में कहा गया है, “पिछले वर्षों में मुद्रास्फीति के कारण परिवारों की क्रय शक्ति पहले ही कम हो चुकी थी। पिछले तीन वर्षों में जीडीपी वृद्धि भी औसतन लगभग 3 प्रतिशत पर स्थिर रही, जो कमजोर औद्योगिक गति, सुस्त निवेश और सीमित उत्पादकता वृद्धि को दर्शाती है।”
पर्यटन उद्योग को सैन्य अभियान का सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा क्योंकि अंतरराष्ट्रीय यात्रियों ने अपनी यात्राएं रद्द कर दीं, जिससे होटलों, रेस्तरां, टूर ऑपरेटरों और पर्यटन आय पर निर्भर स्थानीय समुदायों को भारी झटका लगा। पहले से ही संरचनात्मक और वित्तीय संकट से जूझ रहा विमानन क्षेत्र भी ऑपरेशन सिंदूर का शिकार हुआ।
रिपोर्ट में कहा गया है, “संपर्क में किसी भी प्रकार की बाधा से न केवल एयरलाइंस बल्कि निर्यातकों, आयातकों और यात्रियों के लिए भी लागत बढ़ जाती है। माल ढुलाई में देरी विशेष रूप से कपड़ा, नाशवान वस्तुएं, फार्मास्यूटिकल्स और हल्के इंजीनियरिंग सामान जैसे समय-संवेदनशील क्षेत्रों के लिए हानिकारक है।”
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय खरीदारों द्वारा बांग्लादेश, वियतनाम और भारत से माल खरीदने के कारण व्यापारिक विश्वास कमजोर हुआ।
ऑपरेशन सिंदूर ने मुद्रास्फीति के दबाव को भी फिर से बढ़ा दिया है क्योंकि पाकिस्तान में उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति 2025 में 4.5 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 7.2 प्रतिशत और 2027 में 8.4 प्रतिशत होने का अनुमान है।
–आईएएनएस
एबीएस/
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