इस्लामाबाद, 19 अगस्त (आईएएनएस)। पाकिस्तान सरकार पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को अस्पताल स्थानांतरित करने से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करेगी। कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने बुधवार को कहा कि सरकार का मानना है कि अदालत का आदेश जेल में बंद किसी दोषी को उपलब्ध कराई जा सकने वाली सुविधाओं से जुड़े कानूनी प्रावधानों से आगे चला गया है।
पाकिस्तानी अखबार ‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ के अनुसार, तरार ने एक वीडियो बयान में कहा कि कानून की समीक्षा के बाद अधिकारियों का मानना है कि यह आदेश किसी दोषी कैदी को जेल में उपलब्ध कराई जा सकने वाली सुविधाओं से संबंधित कानूनी दायरे में नहीं आता।
उन्होंने कहा कि आदेश के कुछ पहलुओं को लेकर जेल अधिकारियों और इस्लामाबाद प्रशासन के साथ विचार-विमर्श किया गया है। खासतौर पर इमरान खान की शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में चिकित्सकीय जांच कराने के निर्देश पर चर्चा हुई।
तरार ने कहा कि सरकार आदेश में उचित संशोधन का अनुरोध करेगी, ताकि इमरान खान की जांच किसी सरकारी तृतीयक स्तर के अस्पताल में कराई जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत के निर्देशों के अनुरूप या अदालत की अनुमति से अन्य प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञों को मेडिकल बोर्ड में शामिल किया जा सकता है।
कानून मंत्री के मुताबिक, कानून में मेडिकल बोर्ड के गठन का प्रावधान है, जो यह तय करता है कि किसी कैदी का इलाज जेल के भीतर कराया जाना चाहिए या जेल के बाहर।
उन्होंने कहा कि यदि कैदियों को मेडिकल जांच के लिए निजी अस्पतालों में भेजा जाने लगे तो पूरे पाकिस्तान में विभिन्न बीमारियों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हजारों कैदियों के लिए भी यही व्यवस्था करनी पड़ेगी।
इससे पहले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि राज्य और सुप्रीम कोर्ट का संवैधानिक एवं कानूनी दायित्व है कि हिरासत में रखे गए लोगों के जीवन, स्वास्थ्य, गरिमा और सुरक्षा की रक्षा की जाए।
इमरान खान पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक और पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री हैं तथा लंबे समय से जेल में बंद हैं। उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर पार्टी और समर्थकों की ओर से लगातार चिंता जताई जाती रही है।
वहीं, पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ ने बुधवार को अपने संपादकीय में इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता जताई। अखबार ने कहा कि उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर ऐसा लगता है कि पीटीआई नेता पिछले कई महीनों से किसी न किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं, जबकि जेल प्रशासन लगातार उनके बीमार होने से इनकार करता रहा है।
‘डॉन’ ने संपादकीय में कहा कि किसी राज्य के लिए पूर्व नेताओं के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है। अखबार ने पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के वरिष्ठ नेताओं के साथ अतीत में हुए व्यवहार का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान प्रतिद्वंद्वी नेताओं के साथ बेहतर व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप किया होता, तो इससे उन्हें काफी सद्भावना मिलती।
–आईएएनएस
डीएससी
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