वाशिंगटन, 21 मई (आईएएनएस)। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने गुरुवार को कहा कि ईरान के साथ चल रही बातचीत में “अच्छे संकेत” हैं। हालांकि, उन्होंने बहुत ज्यादा उम्मीद न रखने की चेतावनी दी और कहा कि अगर कूटनीति विफल हो जाती है तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास अभी भी दूसरे विकल्प हैं।
यूरोप में रुककर भारत के लिए निकलने से पहले मियामी में मीडिया से बातचीत के दौरान रुबियो ने कहा कि सरकार टकराव के बजाय बातचीत से समझौता करना पसंद करती है।
रुबियो ने कहा, “राष्ट्रपति की पसंद एक अच्छा सौदा करना है। यह हमेशा से उनकी पसंद रही है।” उन्होंने कहा कि अमेरिका का मानना है कि तेहरान के साथ हाल के कॉन्टैक्ट में कुछ विकास हुआ है।
उन्होंने ईरानी पॉलिटिकल स्ट्रक्चर का जिक्र करते हुए कहा, “मुझे लगता है कि हमने कुछ विकास किया है, लेकिन जाहिर है कि हम एक ऐसे सिस्टम से निपट रहे हैं जो खुद थोड़ा टूटा हुआ है।”
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से जुड़ी क्षेत्रीय कूटनीतिक गतिविधि भी बातचीत को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है।
रुबियो ने कहा, “मेरा मानना है कि पाकिस्तानी आज तेहरान जाएंगे, इसलिए उम्मीद है कि इससे यह बातचीत और आगे बढ़ेगा।”
उन्होंने कहा, “मैं यहां आपको यह बताने के लिए नहीं हूं कि यह निश्चित ही होगा, लेकिन मैं यहां आपको यह बताने के लिए हूं कि हम यह देखने के लिए हर मुमकिन कोशिश करेंगे कि क्या हमें इस मामले में अचानक से कुछ विकास देखने को मिल सकता है।”
इसके साथी ही, अमेरिकी विदेश मंत्री ने ईरान के न्यूक्लियर लक्ष्य और मिसाइल कैपेबिलिटी के बारे में ट्रंप सरकार की चेतावनियों को दोहराया और कहा, “राष्ट्रपति ने साफ कहा है, उनके पास दूसरे विकल्प भी हैं। मैं विस्तार में नहीं बताऊंगा कि वे क्या हैं, लेकिन हर कोई जानता है कि वे क्या हैं।”
इससे पहले बातचीत में, रुबियो ने ईरान का सामना करने के लिए ज्यादा कुछ न करने के लिए नाटो के साथियों की आलोचना की और कहा, “नाटो में कई देश हैं जो हमसे सहमत हैं कि ईरान के पास न्यूक्लियर हथियार नहीं हो सकता, कि ईरान दुनिया के लिए खतरा है।”
उन्होंने कहा, “उनके पास अभी अमेरिका तक पहुंचने वाली मिसाइलें नहीं हैं, लेकिन उनके पास यूरोप तक पहुंचने वाली मिसाइलें हैं।”
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप उन सहयोगियों से परेशान हो गए थे जो ईरान के बारे में अमेरिका के अंदाजे से तो सहमत थे, लेकिन कार्रवाई करने को तैयार नहीं थे। रुबियो ने कहा, “अगर दुनिया के सभी देश इस बात पर सहमत हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए, लेकिन फिर भी कोई खुलकर आगे नहीं आता, तो यह निश्चित रूप से हमारे लिए चिंता की बात है।”
रुबियो ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि कूटनीति अमेरिका का पसंदीदा रास्ता बना हुआ है। उन्होंने कहा, “उनकी पसंद हमेशा एक डील होती है, उनकी पसंद हमेशा एक समझौता होता है, उनकी पसंद हमेशा कूटनीति होती है। तो देखते हैं कि हम वहां पहुंच पाते हैं या नहीं।”
बता दें, यह बात ईरान की न्यूक्लियर गतिविधियों, क्षेत्रीय मिलिशिया और पश्चिम एशिया में समुद्रीय सुरक्षा को लेकर महीनों से बढ़े तनाव के बाद वाशिंगटन और तेहरान के बीच नए कूटनीतिक एंगेजमेंट के बीच आई है।
–आईएएनएस
केके/डीएससी
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