कीव, 1 जून (आईएएनएस)। यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि अमेरिका में एंटी-बैलिस्टिक मिसाइलों का उत्पादन पर्याप्त नहीं है।
जेलेंस्की ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “अमेरिका में एंटी-बैलिस्टिक मिसाइलों का उत्पादन पर्याप्त नहीं है और इससे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में संकट पैदा हो सकता है। वहीं, रूस अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों का घरेलू उत्पादन लगातार बढ़ा रहा है।”
उन्होंने बताया कि उन्होंने इस बारे में व्हाइट हाउस और अमेरिकी कांग्रेस को भी एक पत्र भेजा है।
जेलेंस्की ने कहा, “मौजूदा चुनौतियों को देखते हुए हर महीने 60-65 एंटी-बैलिस्टिक मिसाइलों का उत्पादन बहुत कम है। यह कोई रहस्य नहीं है और रूस भी यह बात जानता है। हमें उत्पादन बढ़ाने की जरूरत है। मैंने पिछली अमेरिकी सरकार से भी अनुरोध किया था और अब मौजूदा प्रशासन से भी कह रहा हूं कि यूक्रेन को पैट्रियट मिसाइलों के उत्पादन का लाइसेंस दिया जाए।”
उन्होंने आगे कहा, “हम पैट्रियट मिसाइलों का उत्पादन बढ़ा सकते हैं। इससे हमारी मदद होगी। इससे मध्य पूर्व और उन दूसरे देशों को भी फायदा होगा जिनकी मदद करने का फैसला अमेरिका करेगा। जब तक हम यूरोप का अपना एंटी-बैलिस्टिक सिस्टम विकसित नहीं कर लेते, तब तक हमें अमेरिका के समर्थन की जरूरत रहेगी।”
अपने एक इंटरव्यू का हिस्सा साझा करते हुए जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन सभी रूसी ड्रोन को रोकने की कोशिश कर रहा है, भले ही उनमें से कुछ रोमानिया, मोल्दोवा, पोलैंड या बाल्टिक देशों की दिशा में जा रहे हों।
उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि अगली सर्दियों से पहले हमें कोई कूटनीतिक रास्ता निकालना चाहिए। बातचीत करनी चाहिए। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि पुतिन पर उनके अपने समाज का कितना दबाव बनता है, और अमेरिका और यूरोप रूस पर कितने प्रभावी प्रतिबंध लगाते हैं।”
जेलेंस्की ने कहा कि दिसंबर 2025 से रूस ने युद्ध के मैदान में अपनी बढ़त खोनी शुरू कर दी थी। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि संभावित वार्ताओं में यूरोप की ओर से प्रतिनिधित्व कौन करेगा।
जेलेंस्की ने कहा, “ई3 नाम का एक प्रारूप है, जिसमें यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस और जर्मनी शामिल हैं। मुझे नहीं पता कि यह सबसे अच्छा प्रारूप है या नहीं, लेकिन मेरा मानना है कि ये देश यूरोप की ओर से वार्ताकार की भूमिका निभा सकते हैं। हमारे पास भरोसेमंद नॉर्डिक साझेदार भी हैं। तुर्की हमेशा मध्यस्थ बनने की इच्छा रखता रहा है, और युद्धबंदियों को वापस लाने में उसकी मदद से हमें कुछ सफलताएं भी मिली हैं।”
–आईएएनएस
एवाई/एएस
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