न्यूयॉर्क, 11 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की से ब्रिटेन की यात्रा गुपचुप ढंग से एक सैन्य विमान में सवार होकर की थी। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा कारणों के चलते ऐसा किया गया था। दरअसल, सार्वजनिक रूप से डोनाल्ड ट्रंप एयर फोर्स वन में सवार हुए थे, लेकिन ब्रिटेन तक की यात्रा उन्होंने एक सैन्य विमान में की थी।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को तुर्की में एयर फोर्स वन पर सवार होने के बाद गुपचुप ढंग से एक फूड ट्रक में छिपाकर दूसरे सैन्य विमान तक पहुंचाया गया, क्योंकि उनके आधिकारिक विमान के खिलाफ ‘विश्वसनीय सुरक्षा खतरे’ होने की जानकारी मिली थी।
द वॉशिंगटन पोस्ट की सोमवार की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने अंकारा में मीडिया की मौजूदगी के बीच ट्रंप सार्वजनिक रूप से एयर फोर्स वन पर चढ़े। इसके बाद वह और उनके कुछ प्रमुख सहयोगी एक कैटरिंग ट्रक में सवार हो गए, जो कि विमान के दरवाजे पास ही था।
द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, ट्रंप को उस फूड ट्रक से एक कार में ले जाया गया। यह ट्रक विमान के निचले हिस्से से जुड़ा हुआ था। वहां से उन्हें एक छोटे सी-32ए सैन्य जेट में पहुंचाया गया।
दोनों अखबारों ने नाम न बताने वाले अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रंप और उनके कुछ करीबी सहयोगी ब्रिटेन के मिल्डेनहॉल वायुसेना अड्डे तक इसी सैन्य विमान से गए। वहां उन्होंने यात्रा के अगले हिस्से के लिए कतर की ओर से उपहार में दिए गए विमान में सवार होकर अमेरिका के लिए उड़ान भरी।
इस बीच, एयर फोर्स वन में मौजूद अन्य अधिकारी और पत्रकार पुराने विमान से ब्रिटेन पहुंचे और बाद की यात्रा में ट्रंप के साथ शामिल हुए। उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि ट्रंप विमान बदल चुके थे।
विमान में मौजूद पत्रकारों ने बताया कि उड़ान के दौरान उनसे खिड़कियों के पर्दे बंद रखने को कहा गया था।
व्हाइट हाउस ने इन रिपोर्टों की न तो पुष्टि की और न ही खंडन किया। हालांकि, व्हाइट हाउस के संचार निदेशक स्टीवन चेउंग ने संकेत दिया कि राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान सुरक्षा संबंधी चुनौतियां थीं, जिनसे निपटने के लिए विशेष इंतजाम किए गए।
उन्होंने कहा, “जैसा कि राष्ट्रपति हाल में कह चुके हैं, अमेरिका के कई दुश्मन उन्हें निशाना बनाना चाहते हैं और हम उन खतरों से निपटने के लिए अपने पास मौजूद हर संसाधन का इस्तेमाल करते हैं।”
8 जुलाई को अंकारा में हुए नाटो शिखर सम्मेलन से वापसी के दौरान भी इसी तरह की एक और घटना हुई थी।
ट्रंप अंकारा की यात्रा के लिए कतर की ओर से उपहार में दिए गए विमान का इस्तेमाल कर रहे थे। ट्रंप अक्सर उसकी शानदार और लग्जरी सुविधाओं की तारीफ करते रहे हैं। लेकिन सीक्रेट सर्विस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों का मानना था कि विमान में जल्दबाजी में किए गए तकनीकी बदलाव उसे पुराने एयर फोर्स वन विमानों जितनी सुरक्षा नहीं दे पाए थे।
इसी वजह से पहले ट्रंप को पुराने एयर फोर्स वन में स्थानांतरित किया गया और कतर के विमान को ब्रिटेन भेज दिया गया। इसके बाद उन्हें सैन्य जेट में ले जाया गया।
ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने कतर के विमान को ब्रिटेन इसलिए भेजा क्योंकि वहां मौजूद अमेरिकी सैन्यकर्मी उस विमान को देखना चाहते थे।
हालांकि, रिपोर्टों के अनुसार असली कारण वे ‘विश्वसनीय खतरे’ थे, जिनकी जानकारी सुरक्षा एजेंसियों को मिली थी। बताया गया कि कतर के विमान में वे मिसाइल-रोधी सुरक्षा प्रणालियां और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक हमलों से बचाने वाली विशेष वायरिंग नहीं थी, जो पुराने एयर फोर्स वन विमानों में मौजूद हैं।
ऐसा लगता है कि बाद में सीक्रेट सर्विस और दूसरे सुरक्षा अधिकारियों ने यह भी माना कि पुराना एयर फोर्स वन भी पर्याप्त सुरक्षित नहीं है। इसलिए ट्रंप को गुप्त रूप से एक सैन्य जेट में ले जाने का फैसला किया गया। यह बोइंग 757 का एक संस्करण है, जिसमें वे आलीशान सुविधाएं नहीं हैं जिनके लिए ट्रंप जाने जाते हैं।
जब द न्यूयॉर्क टाइम्स ने अधिकारियों के हवाले से कतर की ओर से दिए गए विमान की सुरक्षा कमियों पर रिपोर्ट प्रकाशित की, तब अमेरिकी न्याय विभाग ने रिपोर्टरों और उनके रिश्तेदारों, यहां तक कि एक पत्रकार की मां तक को समन भेजकर उनके फोन की मांग की।
अधिकारियों ने इन असामान्य समनों का बचाव करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य उन लोगों का पता लगाना था जिन्होंने गोपनीय जानकारी लीक की थी और जिनके बारे में उनका दावा था कि उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला। बाद में आलोचना बढ़ने पर इन समनों को वापस ले लिया गया।
जानकारी लीक होने के आरोपों ने अप्रत्यक्ष रूप से उन सुरक्षा चिंताओं की पुष्टि ही की, जिनसे जुड़ी खबरों का पहले ट्रंप और अधिकारी खंडन कर चुके थे।
ट्रंप ने कहा कि उस विमान को सेवा से हटाकर उसमें बड़े स्तर पर तकनीकी सुधार किए जा रहे हैं।
पुराने एयर फोर्स वन विमान और कतर की ओर से दिया गया विमान, जिसे भविष्य में एक अन्य एयर फोर्स वन के रूप में इस्तेमाल किया जाना है, दोनों ही बोइंग 747 के अलग-अलग संस्करण हैं।
–आईएएनएस
एवाई/
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