यूएन शरणार्थी एजेंसी की चेतावनी: मध्य पूर्व संकट के कारण सहायता कार्यों में आ रही बाधा

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जिनेवा, 2 मई (आईएएनएस)। मध्य पूर्व में चल रहे संकट का असर अब सिर्फ उसी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसका प्रभाव पूरी दुनिया की राहत सामग्री पहुंचाने वाली व्यवस्था पर पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) की प्रवक्ता ने चेतावनी दी है कि इससे मानवीय आपूर्ति शृंखलाओं और सहायता वितरण से जुड़े कामों पर बड़ा असर पड़ सकता है। खाड़ी क्षेत्र के अहम समुद्री रास्तों, खासकर होर्मुज स्ट्रेट के आसपास असुरक्षा और अस्थिरता बढ़ने से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इसके कारण दुनिया भर में ईंधन, खाने-पीने की चीजों और माल ढुलाई का खर्च…

जिनेवा, 2 मई (आईएएनएस)। मध्य पूर्व में चल रहे संकट का असर अब सिर्फ उसी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसका प्रभाव पूरी दुनिया की राहत सामग्री पहुंचाने वाली व्यवस्था पर पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) की प्रवक्ता ने चेतावनी दी है कि इससे मानवीय आपूर्ति शृंखलाओं और सहायता वितरण से जुड़े कामों पर बड़ा असर पड़ सकता है।

खाड़ी क्षेत्र के अहम समुद्री रास्तों, खासकर होर्मुज स्ट्रेट के आसपास असुरक्षा और अस्थिरता बढ़ने से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इसके कारण दुनिया भर में ईंधन, खाने-पीने की चीजों और माल ढुलाई का खर्च बढ़ गया है। इससे जरूरी सामान महंगा हो गया है और उसकी सप्लाई में देरी हो रही है।

कार्लोटा वुल्फ ने एक नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि इन बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ रहा है, जो पहले से ही मुश्किल हालात में जी रहे हैं, जैसे शरणार्थी और अपने घरों से बेघर हुए लोग। साथ ही, राहत एजेंसियों के लिए समय पर मदद पहुंचाना भी मुश्किल होता जा रहा है।

प्रमुख समुद्री मार्गों के बंद होने के कारण लंबे और अधिक महंगे विकल्पों का अधिक उपयोग करने की मजबूरी पैदा हो गई है। इससे समय भी ज्यादा लग रहा है और काम और जटिल हो गया है। लड़ाई शुरू होने के बाद से जरूरी सामान लाने वाले देशों से माल ढुलाई का खर्च करीब 18 प्रतिशत तक बढ़ गया है। वहीं, इस साल की शुरुआत से यूएनएचसीआर के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क की क्षमता 97 प्रतिशत से घटकर 77 प्रतिशत रह गई है।

वुल्फ ने कहा, “कुछ खेपों के लिए, लागतें दोगुनी से भी अधिक हो गई हैं; उदाहरण के लिए, दुबई में यूएनएचसीआर के वैश्विक भंडारों से सूडान और चाड में हमारे अभियानों के लिए राहत सामग्री के परिवहन की लागत।”

यूएनएचसीआर ने खास तौर पर अफ्रीका की स्थिति को लेकर चिंता जताई है, जहां पहले से ही कई बड़े विस्थापन संकट चल रहे हैं और अक्सर इन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है।

केन्या में, जहां यूएनएचसीआर का एक वैश्विक भंडार स्थित है, हाल ही में ईंधन की कीमत करीब 15 प्रतिशत बढ़ने से इथियोपिया, कांगो और दक्षिण सूडान तक सामान भेजने में देरी हो रही है और ट्रकों की कमी भी महसूस की जा रही है। सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, सूडान में हाल के महीनों में सहायता पहुंचाने की लागत दोगुनी हो गई है। वहीं, केप ऑफ गुड होप के रास्ते सामान भेजने पर डिलीवरी में लगभग 25 दिन की अतिरिक्त देरी हो रही है।

प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि अगर मध्य पूर्व में अस्थिरता जारी रहती है, तो बढ़ती लागत, देरी और सीमित परिवहन क्षमता के कारण राहत कार्य और भी ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।

–आईएएनएस

एएस/

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