इबोला को फैलने से रोकने के लिए बड़े कदम उठा रहा अमेरिका

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वाशिंगटन, 19 मई (आईएएनएस)। अमेरिका ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) और युगांडा में फैले इबोला वायरस को लेकर बड़ा कदम उठाया है। अमेरिका ने इस खतरनाक बीमारी को फैलने से रोकने के लिए कूटनीतिक, मानवीय और स्वास्थ्य संबंधी कई आपात उपाय शुरू किए हैं। इसके तहत आपात फंड जारी किया गया है, यात्रा नियम सख्त किए गए हैं और दूसरे देशों व अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया कि जैसे ही इस महीने क्षेत्र में इबोला के मामलों की पुष्टि हुई, तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी गई। विभाग ने कहा…

वाशिंगटन, 19 मई (आईएएनएस)। अमेरिका ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) और युगांडा में फैले इबोला वायरस को लेकर बड़ा कदम उठाया है। अमेरिका ने इस खतरनाक बीमारी को फैलने से रोकने के लिए कूटनीतिक, मानवीय और स्वास्थ्य संबंधी कई आपात उपाय शुरू किए हैं। इसके तहत आपात फंड जारी किया गया है, यात्रा नियम सख्त किए गए हैं और दूसरे देशों व अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है।

अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया कि जैसे ही इस महीने क्षेत्र में इबोला के मामलों की पुष्टि हुई, तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी गई। विभाग ने कहा कि बीमारी को अमेरिका तक पहुंचने से पहले रोकना जरूरी है ताकि देश और विदेश में रह रहे अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा की जा सके।

विदेश विभाग के अनुसार, 15 मई को इबोला मामलों की पुष्टि होने के 24 घंटे के भीतर वॉशिंगटन में एक विशेष समन्वय टीम और आपदा प्रबंधन प्रणाली बना दी गई थी। वहीं, डीआरसी, रवांडा, दक्षिण सूडान और युगांडा में मौजूद अमेरिकी दूतावासों ने भी निगरानी समूह तैयार किए हैं, जो हालात पर नजर रख रहे हैं और वहां रह रहे अमेरिकी नागरिकों से लगातार संपर्क में हैं।

बयान में बताया गया कि अमेरिकी प्रशासन रोजाना उच्च स्तर की बैठकें कर रहा है ताकि इस संकट से निपटने की तैयारी सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहे। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल सबसे बड़ा लक्ष्य विदेशों में मौजूद अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा करना और इबोला को अमेरिका पहुंचने से रोकना है।

विदेश विभाग ने बताया कि उसने 18 मई को जारी किए गए ‘टाइटल 42’ आदेश पर अमेरिकी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के साथ मिलकर काम किया। इस आदेश के तहत उन विदेशी नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है, जिन्होंने पिछले 21 दिनों के भीतर डीआरसी, युगांडा और दक्षिण सूडान की यात्रा की हो।

इसके अलावा, अमेरिका का गृह सुरक्षा विभाग भी इस आदेश को दुनिया भर में लागू कराने में सहयोग कर रहा है। सीडीसी द्वारा जारी क्वारंटाइन और आइसोलेशन नियमों को भी लागू किया जा रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका, सीडीसी और अमेरिकी सेना के साथ मिलकर जरूरत पड़ने पर संक्रमित या प्रभावित अमेरिकी नागरिकों को वापस लाने की योजना पर भी काम कर रहा है। यह फैसला व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और संक्रमण के खतरे को देखकर लिया जाएगा।

अमेरिका ने अपनी आपात योजना शुरू करने के 48 घंटे के भीतर 13 मिलियन डॉलर की शुरुआती सहायता राशि जारी कर दी। यह पैसा प्रभावित देशों में निगरानी व्यवस्था मजबूत करने, लैब सुविधाएं बढ़ाने, लोगों को जागरूक करने, सुरक्षित अंतिम संस्कार कराने, सीमा जांच और मरीजों के इलाज में इस्तेमाल किया जाएगा।

विदेश विभाग ने कहा कि जैसे-जैसे संकट की गंभीरता साफ होगी, वैसे-वैसे और मदद भी दी जाएगी। अमेरिका पहले से ही डीआरसी और युगांडा के साथ स्वास्थ्य समझौतों के तहत बीमारी की पहचान और रोकथाम पर निवेश करता रहा है।

अमेरिका संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता तंत्र के जरिए भी मदद पहुंचाने में लगा है। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) के फंड का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि राहत कार्य तेजी से हो सकें। विदेश विभाग ने कहा कि वह यूरोपीय संघ, यूनाइटेड किंगडम और अन्य अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ मिलकर दानदाताओं के बीच समन्वय के प्रयासों का नेतृत्व कर रहा है

अमेरिका ने हाल ही में ओसीएचए फंड के लिए 1.8 बिलियन डॉलर की अतिरिक्त सहायता देने की घोषणा की थी। इसमें से 250 मिलियन डॉलर खास तौर पर डीआरसी और युगांडा के लिए तय किए गए हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि मध्य और पूर्वी अफ्रीका में इबोला का फैलाव पूरी दुनिया के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। इसकी वजह कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था, सीमाओं पर कम निगरानी और संघर्ष प्रभावित इलाकों में चिकित्सा सुविधाओं की कमी है। इससे पहले डीआरसी में इबोला के कई बड़े प्रकोप हो चुके हैं, जिनमें हजारों लोगों की जान गई थी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े राहत अभियान चलाने पड़े थे।

–आईएएनएस

एएस/

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