ईरान : ‘इस्फहान यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी’ में जहां हुई थी बमबारी वहां बनेगा ‘वॉर म्यूजियम’

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तेहरान, 3 मई (आईएएनएस)। ईरान ने इस्फहान यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में अमेरिकी-इजरायली हमलों से क्षतिग्रस्त हिस्से को ‘वॉर म्यूजियम’ में तब्दील करने की योजना बनाई है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम हालिया संघर्ष के दौरान वैज्ञानिक संस्थानों पर हुए हमले के दर्द को दर्शाने के लिए उठाया जा रहा है। संस्थान के प्रमुख जफरोल्लाह कलांतरी ने बताया कि “मौजूदा क्षतिग्रस्त स्थल को संरक्षित किया जाएगा और इसे वॉर म्यूजियम के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि यह देश के वैज्ञानिक दमन का ऐतिहासिक दस्तावेज बन सके।” उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के अन्य हिस्सों में नए भवनों के निर्माण…

तेहरान, 3 मई (आईएएनएस)। ईरान ने इस्फहान यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में अमेरिकी-इजरायली हमलों से क्षतिग्रस्त हिस्से को ‘वॉर म्यूजियम’ में तब्दील करने की योजना बनाई है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम हालिया संघर्ष के दौरान वैज्ञानिक संस्थानों पर हुए हमले के दर्द को दर्शाने के लिए उठाया जा रहा है।

संस्थान के प्रमुख जफरोल्लाह कलांतरी ने बताया कि “मौजूदा क्षतिग्रस्त स्थल को संरक्षित किया जाएगा और इसे वॉर म्यूजियम के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि यह देश के वैज्ञानिक दमन का ऐतिहासिक दस्तावेज बन सके।”

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के अन्य हिस्सों में नए भवनों के निर्माण और उन्नत उपकरणों की व्यवस्था के लिए अलग से स्थान चिन्हित किया गया है। सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, प्रारंभिक आकलन में विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे को करीब 1.1 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी को ईरान के प्रमुख शहरों पर अमेरिका-इजरायल ने संयुक्त हमले किए थे। अगले 40 दिनों तक ये जारी रहा। मार्च माह में ही ईरान के एमआईटी (मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) माने जाने वाले इस संस्थान को निशाने पर लिया गया।

ईरानी अधिकारियों का दावा है कि देशभर में 30 से अधिक विश्वविद्यालयों को इन हमलों में नुकसान पहुंचा, जिनमें राजधानी तेहरान के संस्थान भी शामिल हैं। इसके अलावा रिहायशी इलाकों और अन्य नागरिक ढांचे को भी निशाना बनाए जाने की बात कही गई है।

अमेरिका-इजरायल का मानना है कि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में केवल ज्ञान-विज्ञान की बातें नहीं होतीं बल्कि उन घातक बैलिस्टिक मिसाइलों और शाहेद ड्रोनों का ब्लूप्रिंट निकलता है जो पूरी दुनिया के लिए खतरनाक है।

1974 में जब इसकी नींव रखी गई, तो इसे अमेरिकी तकनीकी शिक्षा की तर्ज पर ईरान को आधुनिक बनाने के लिए बनाया गया था. लेकिन समय बदला और आज यही ‘ज्ञान का मंदिर’ ईरान के सैन्य-औद्योगिक परिसर का सबसे मजबूत स्तंभ बन चुका है.

इस स्थल को संग्रहालय में बदलने का फैसला न केवल हमलों के नतीजे को दर्शाने के लिए है, बल्कि इसे एक प्रतीकात्मक कदम के तौर पर भी देखा जा रहा है, जिसके जरिए ईरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को उजागर करना चाहता है।

–आईएएनएस

केआर/

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