मक्का समझौते पर पलटा पाकिस्तान! कहा- हूतियों के खिलाफ फिलहाल कोई सैन्य कार्रवाई नहीं

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Mecca Defense Pact: पाकिस्तान ने स्पष्ट किया है कि मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के बावजूद फिलहाल हूती विद्रोहियों के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई नहीं होगी। विदेश मंत्रालय ने इसे रक्षात्मक समझौता बताया है। हालांकि, परिस्थितियां बिगड़ने पर पाकिस्तान कदम उठा सकता है। इस्लामाबाद सऊदी अरब के साथ रक्षा और सुरक्षा समन्वय जारी रखेगा।

Mecca Defense Pact: सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ते तनाव को लेकर पाकिस्तान ने अपने बयान से पलटी मार ली है।  पाकिस्तान ने कहा है कि फिलहाल वह ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ कोई सैन्य अभियान शुरू नहीं करेगा। इस्लामाबाद के मुताबिक, सऊदी अरब और तुर्की के साथ हुआ मक्का संयुक्त रक्षा समझौता तत्काल किसी सैन्य कार्रवाई का आदेश नहीं देता। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि मक्का डिफेंस पैक्ट तीनों देशों के बीच व्यापक रक्षा सहयोग का ढांचा है। इसे किसी खास देश या संगठन के खिलाफ तुरंत सैन्य अभियान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार,  विदेश कार्यालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने वीकली  प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि समझौते के तहत हूतियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर इस समय कोई बातचीत नहीं हो रही है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ रक्षा और सुरक्षा से जुड़े मामलों में लगातार संपर्क और समन्वय बनाए हुए है। उनके मुताबिक, इस समझौते को पूरी तरह लागू करने में समय लगेगा और इसके अलग-अलग पहलू धीरे-धीरे सामने आएंगे।

जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान उठा सकता है कदम

इसके साथ ही  पाकिस्तान ने यह भी संकेत दिया है कि अगर भविष्य में हालात ज्यादा गंभीर होते हैं और समझौते के तहत कार्रवाई जरूरी समझी जाती है, तो वह कदम उठा सकता है। पाकिस्तान का कहना है कि मक्का समझौता मूल रूप से रक्षात्मक है। इसके तहत तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति को सामूहिक सुरक्षा के नजरिए से देखा जाएगा। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि सऊदी अरब के सामने आने वाले हर सुरक्षा संकट में पाकिस्तान अपनी सेना भेज देगा।

इस्लामाबाद ने यह भी बताया कि सऊदी अरब में पाकिस्तानी सेना की मौजूदगी पहले से है। वहां पाकिस्तानी जवान प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक सपोर्ट से जुड़े कामों में सहयोग कर रहे हैं। यह व्यवस्था दोनों देशों के पुराने रक्षा संबंधों का हिस्सा है और इसे नए समझौते के तहत शुरू हुई नई सैन्य तैनाती नहीं माना जा रहा है।

हूती हमलों के बीच आया बयान

मक्का समझौते के बाद पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच रक्षा सहयोग को संस्थागत रूप देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए रणनीतिक राजनीतिक और रक्षा समिति के जरिए काम आगे बढ़ाया जा रहा है। पाकिस्तान के अनुसार, आने वाले समय में इस समझौते के तहत नए रक्षा और सुरक्षा तंत्र विकसित किए जा सकते हैं। हालांकि फिलहाल इसका फोकस किसी तत्काल सैन्य अभियान पर नहीं है। पाकिस्तान का यह बयान ऐसे समय आया है जब सऊदी अरब और हूतियों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। सऊदी अधिकारियों के अनुसार, यमन से देश के दक्षिणी हिस्सों में मौजूद ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए।

इन हमलों के कारण कई स्थानों पर आग लगने और काम प्रभावित होने की खबर सामने आई। अधिकारियों के मुताबिक, हमलों में कम से कम 73 लोग घायल हुए। इससे पहले जुलाई में हूती नियंत्रण वाले सना हवाईअड्डे पर हुए हमले के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव और बढ़ गया था। हूतियों ने इस हमले के लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार बताया और आभा हवाईअड्डे समेत अन्य सऊदी ठिकानों पर जवाबी हमले की चेतावनी दी थी। इसके बाद सऊदी अरब ने हूती नियंत्रण वाले क्षेत्रों में फिर से हमले शुरू कर दिए।

ईरान से भी कर चुका है अपील

पाकिस्तान इससे पहले ईरान से अपील कर चुका है कि वह हूतियों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे और सऊदी अरब पर होने वाले हमलों को रोकने में मदद करे।

इस्लामाबाद ने यह भी साफ किया है कि फिलहाल मक्का रक्षा समझौते का विस्तार करने या इसमें किसी अन्य देश को शामिल करने की योजना नहीं है। यानी पाकिस्तान अभी सऊदी अरब के साथ रक्षा सहयोग जारी रखते हुए सीधे हूतियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई से दूरी बनाए रखना चाहता है।

क्या है मक्का संयुक्त रक्षा समझौता?

मक्का संयुक्त रक्षा समझौता सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुआ एक त्रिपक्षीय रक्षा समझौता है। इस समझौते पर 7 अगस्त 2026 को सऊदी अरब के मक्का में स्थित अल-सफा पैलेस में हस्ताक्षर किए गए थे। इसका मकसद तीनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना है।

इस समझौते की सबसे अहम बात इसका सामूहिक रक्षा प्रावधान है। इसके तहत अगर तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। यह व्यवस्था काफी हद तक नाटो के अनुच्छेद-5 जैसी है, जिसमें एक सदस्य देश पर हमला पूरे गठबंधन पर हमला माना जाता है। फिलहाल इस समझौते में तीन देश शामिल हैं—सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की। इन देशों ने आपसी सुरक्षा और रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए यह व्यवस्था तैयार की है।

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Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।