भारतीय सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे ने यहां कई देशों के सैन्य अभ्यास के इतर आयोजित सेना प्रमुखों के एक सम्मेलन में रविवार को हिस्सा लिया। भारतीय सेना के ‘एडिशनल डायरेक्टोरेट आफ पब्लिक इन्फार्मेशन’ (एडीजी पीआई) ने ट्वीट किया कि पांच दिवसीय आधिकारिक दौरे पर यहां आये जनरल नरवणे ने ‘‘वैश्विक संघर्षों की बदलती प्रकृति: संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों की भूमिका’’ पर मुख्य संबोधन दिया।
सेना प्रमुख ने कार्यक्रम के दौरान इसमें हिस्सा लेने वाले देशों के वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य देशों के सैन्य पर्यवेक्षकों के साथ बातचीत भी की। बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान के जन्म शताब्दी और पाकिस्तान से देश की मुक्ति के 50 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में शांतिर अग्रसेना (शांति के अग्रदूत) 2021 अभ्यास बंगबंधु सेनानीबास में 4 अप्रैल को शुरू हुआ था।
अभ्यास में रॉयल भूटान आर्मी, श्रीलंकाई सेना और बांग्लादेश सेना के साथ भारतीय सेना की 30 कर्मियों वाली एक टुकड़ी भाग ले रही है। यह अभ्यास सोमवार को संपन्न होगा। अमेरिका, ब्रिटेन, तुर्की, सऊदी अरब, कुवैत और सिंगापुर के सैन्य पर्यवेक्षक भी अभ्यास में भाग ले रहे हैं।
अभ्यास का उद्देश्य प्रक्रियाओं को मजबूत करना और क्षेत्र में मजबूत शांति व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए पड़ोसी देशों के बीच अन्तरसक्रियता को बढ़ाना है। इसमें हिस्सा लेने वाले देशों की सेनाओं ने अपने बहुमूल्य अनुभव साझा किए और शांति अभियानों में अपने अभ्यास और प्रक्रियाओं को परिष्कृत किया। जनरल नरवणे अपने बांग्लादेशी समकक्ष जनरल अजीज अहमद के निमंत्रण पर यहां आए हैं।
उनकी यात्रा ऐसे समय हो रही है जब करीब दो सप्ताह पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पड़ोसी देश की यात्रा की थी और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की थी। वर्ष 2021 में भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक संबंधों, पाकिस्तान से बांग्लादेश की मुक्ति की 50वीं वर्षगांठ और ‘बंगबंधु’ मुजीबुर रहमान की जन्म शताब्दी है।


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