वॉशिंगटन, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान के साथ वार्ता में “काफी प्रगति” हुई, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। अमेरिका अपनी प्रमुख मांगों पर अड़ा रहा, जिनमें समृद्ध यूरेनियम को हटाना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सत्यापन योग्य सीमाएं शामिल हैं।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने फाक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि पाकिस्तान में उच्च स्तर पर हुई वार्ताओं ने लचीलेपन और अमेरिका की “रेड लाइन्स” दोनों को स्पष्ट किया।
उन्होंने कहा, “मैं यह नहीं कहूंगा कि चीजें गलत हुईं। मुझे लगता है कि कई चीजें सही भी हुईं। हमने काफी प्रगति की,” और जोड़ा कि यह “पहली बार था जब ईरानी और अमेरिकी सरकारें इतने उच्च स्तर पर मिलीं।”
वेंस के अनुसार, मुख्य विवाद का मुद्दा यह रहा कि अमेरिका इस बात पर अड़ा हुआ है कि ईरान “कभी भी परमाणु हथियार नहीं रख सकता,” जो उसकी सभी वार्ता स्थितियों का आधार है।
उन्होंने दो गैर-समझौताकारी मांगों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा,“हमें समृद्ध सामग्री (यूरेनियम) को ईरान से बाहर करना होगा।” दूसरी मांग थी “परमाणु हथियार विकसित न करने की निर्णायक प्रतिबद्धता,” जिसे सत्यापन तंत्र के जरिए सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा, “ईरान यह कह दे कि वह कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, यह एक बात है… लेकिन इन बातों का सत्यापन भी जरूरी है।”
वेंस के मुताबिक, ईरानी वार्ताकार “हमारी दिशा में बढ़े” लेकिन “पर्याप्त नहीं बढ़े” जिसके कारण दोनों पक्षों ने बातचीत रोककर अपने-अपने देशों में लौटने का फैसला किया।
उन्होंने कहा, “अब गेंद उनके पाले में है” और संकेत दिया कि आगे की बातचीत तेहरान की अमेरिकी शर्तें मानने की इच्छा पर निर्भर करेगी।
वेंस ने वार्ता की प्रगति को क्षेत्रीय मुद्दों से भी जोड़ा, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलना शामिल है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है।
उन्होंने कहा, “हमें जलडमरूमध्य को पूरी तरह खुला देखना होगा,” और ईरान पर बातचीत के दौरान “लक्ष्य बदलने” का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि जहाजों की आवाजाही में “कुछ बढ़ोतरी” हुई है लेकिन “पूरी तरह से खुलना अभी नहीं हुआ है।”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पूरी पहुंच बहाल नहीं हुई, तो इससे वार्ता की दिशा “मौलिक रूप से बदल सकती है।”
कार्रवाई के बारे में वेंस ने पुष्टि की कि अमेरिकी नौसैनिक अभियान केवल ईरानी झंडे वाले जहाजों ही नहीं बल्कि ईरानी बंदरगाहों से जुड़े जहाजों को भी निशाना बना रहे हैं।
उन्होंने कहा, “जो भी जहाज ईरानी बंदरगाहों की ओर जा रहा है या वहां से आया है… हमें इसकी जानकारी होगी,” और अमेरिकी खुफिया क्षमताओं का हवाला दिया।
उन्होंने ईरान पर वैश्विक शिपिंग को खतरे में डालकर “पूरी दुनिया के खिलाफ आर्थिक आतंकवाद” करने का आरोप लगाया और कहा, “अगर ईरान ऐसा करता है, तो हम भी एक सिद्धांत पर काम करेंगे कि कोई भी ईरानी जहाज बाहर नहीं जा सकेगा।”
तनाव के बावजूद, वेंस ने कहा कि एक व्यापक समझौते की संभावना अभी भी बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप “खुश होंगे यदि ईरान एक सामान्य देश की तरह व्यवहार करे… और उसके लोग समृद्धि हासिल कर सकें” लेकिन इसके लिए उसे “परमाणु हथियार और आतंकवाद का पीछा न करना” होगा।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ईरानी वार्ताकारों को किसी समझौते से पहले तेहरान में उच्च अधिकारियों से मंजूरी लेनी पड़ सकती है। उन्होंने कहा, “उन्हें वापस जाकर हमारी तय शर्तों के लिए मंजूरी लेनी होगी।”
वेंस ने वार्ता में अमेरिका की स्थिति को मजबूत बताते हुए “सैन्य बढ़त” और “नाकाबंदी के जरिए अतिरिक्त आर्थिक दबाव” का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “हमारे पास बहुत सारे पत्ते हैं। हमारे पास बढ़त है।”
–आईएएनएस
पीएम
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