दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश इंडोनेशिया की चर्चा में आया 1170 साल पुराना ‘प्रामबानन शिव मंदिर’, भारत करेगा जीर्णोद्धार करने में मदद

Summary :

PM Modi Indonesia Visit : प्रधानमंत्री मोदी 6 दिन के लिए विदेश दौरे पर गए हैं, जिसमें से वे 3 देशों की यात्रा पर हैं. उनका पहला दौरा इंडोनेशिया का है, जहां उनका भव्य स्वागत हुआ. इस बीच कई एमओयू पर साइन हुए. हालांकि यह यात्रा धामिक लिहाज से भी जरूरी मानी जा रही है क्योंकि PM नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच एक बेहद ऐतिहासिक कूटनीतिक सहमति बनी है. इसके तहत भारत वहां के सबसे प्रसिद्ध और प्राचीन ‘Prambanan Temple’ परिसर के जीर्णोद्धार कार्य में मदद करने जा रहा है. दुनिया की सबसे बड़ी…

PM Modi Indonesia Visit : प्रधानमंत्री मोदी 6 दिन के लिए विदेश दौरे पर गए हैं, जिसमें से वे 3 देशों की यात्रा पर हैं. उनका पहला दौरा इंडोनेशिया का है, जहां उनका भव्य स्वागत हुआ. इस बीच कई एमओयू पर साइन हुए. हालांकि यह यात्रा धामिक लिहाज से भी जरूरी मानी जा रही है क्योंकि PM नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच एक बेहद ऐतिहासिक कूटनीतिक सहमति बनी है. इसके तहत भारत वहां के सबसे प्रसिद्ध और प्राचीन ‘Prambanan Temple’ परिसर के जीर्णोद्धार कार्य में मदद करने जा रहा है.

दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर स्थित यह 1170-Year-Old Temple भारत और इंडोनेशिया के सदियों पुराने गहरे सांस्कृतिक रिश्तों का सबसे बड़ा गवाह है. इस ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के विशेषज्ञों ने पहले ही मंदिर का दौरा कर अपनी जांच शुरू कर दी है, ताकि इस अनोखे पायलट प्रोजेक्ट को जल्द अमलीजामा पहनाया जा सके.

दीवारों पर रामायण

Indonesia Shiva Temple
Indonesia Shiva Temple (source : social media)

19वीं और 20वीं शताब्दी की खुदाई में मिले शिलालेखों से पता चलता है कि इस भव्य मंदिर परिसर का निर्माण मताराम साम्राज्य के हिंदू संजय राजवंश के राजा रकाई पिकातन ने लगभग सन 850 में शुरू करवाया था. इसके बाद उनके उत्तराधिकारी राजा लोकपाल ने सन 856 में मुख्य शिव मंदिर को पूरा कर इसका उद्घाटन किया.

यह परिसर केवल भगवान शिव को समर्पित नहीं है, बल्कि यहां ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों की पूजा होती है, इसलिए इसे स्थानीय लोग ‘त्रिमूर्ति मंदिर’ भी कहते हैं.

Indonesia Shiva Temple
Indonesia Shiva Temple

परिसर के ठीक केंद्र में स्थित मुख्य शिव मंदिर लगभग 47 मीटर ऊंचा है. इस पूरे आर्किटेक्चरल कॉम्प्लेक्स में लगभग 250 छोटे-बड़े मंदिर शामिल हैं, जिनकी पत्थरों की दीवारों पर पूरी रामायण की कहानी को बेहद बारीकी से नक्काशी कर उकेरा गया है.

यूनेस्को तक का सफर

Shiv Temple Indonesia
Shiv Temple Indonesia (source : social media)

बताया जाता है कि इस विशाल मंदिर के निर्माण के करीब 100 साल बाद पास के मेरापी ज्वालामुखी में भीषण विस्फोट हुआ और कई विनाशकारी भूकंप आए, जिसके चलते आसपास के लोगों को पूर्व की ओर पलायन करना पड़ा. इसके बाद हिंदू धर्म मुख्य रूप से बाली द्वीप पर सिमट गया और जावा के ये खूबसूरत मंदिर सदियों तक मलबे और गुमनामी में दबे रहे.

20वीं सदी की शुरुआत में डच सरकार ने इस धरोहर को दोबारा खोजने के बाद एनेस्टिलोसिस तकनीक से इसका रेस्ट्रोरेशन शुरू किया, जिसमें बिखरे हुए पुराने पत्थरों को आपस में मैच करके ढांचा दोबारा खड़ा किया जाता है. साल 1991 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया. अब भारत सरकार इसी एनेस्टिलोसिस तकनीक का उपयोग कर शुरुआत में एक या दो छोटे मंदिरों पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू करेगी, ताकि इतिहास के बिखरे पन्नों को एक बार फिर सहेजा जा सके.

यह भी पढ़ें – पीएम मोदी को ‘किया ओरा’ कहने के लिए तैयार न्यूजीलैंड, प्रवासी भारतीय बोले- प्रधानमंत्री ने हमारा मान बढ़ाया

Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।