जिनेवा, 8 अगस्त (आईएएनएस)। जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र के ‘पैलेस डेस नेशंस’ परिसर में भारत से पहुंचे पांच मोरों का स्वागत किया गया। यूएन में भारत के स्थायी मिशन ने इस तोहफे को संयुक्त राष्ट्र के साथ “हमारी साझेदारी का एक और आयाम” करार दिया। वहीं जिनेवा कार्यालय ने इन ‘चमकदार राजनयिकों’ से सबको रूबरू कराया।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने इस उपहार को भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच साझेदारी का “एक और आयाम” बताया। मिशन ने एक्स पर लिखा, “साझेदारी का एक और आयाम शुरू हुआ। यूएन जिनेवा को हमने उपहार स्वरूप मोर भेंट किए। राष्ट्रीय पक्षी होने के कारण मोरों का हर भारतीय के दिल में विशेष स्थान है।”
शुक्रवार को इन पांचों पक्षियों का स्वागत किया गया। इसके साथ ही इस परिसर में मोरों को रखने की दशकों पुरानी परंपरा भी जारी है।
यूएन न्यूज के अनुसार, “भारत की ओर से उपहार में दिए गए पांच युवा मोर यूएन जिनेवा पहुंच गए हैं। यह उस परंपरा को जारी रखता है जो खुद संयुक्त राष्ट्र से भी पुरानी है। जिनेवा के सबसे नए और सबसे चमकदार राजनयिकों से मिलिए!”
इस पहल के तहत चार नीले और एक दुर्लभ सफेद नर मयूर भेंट किया गया है। इसका उद्देश्य परिसर में मोरों की संख्या को फिर से बढ़ाना है, जो घटकर केवल एक रह गई थी। इन मोरों को फिलहाल एरियाना पार्क के विशाल एवियरी (पक्षीघर) में रखा गया है, ताकि वे नए वातावरण के अभ्यस्त हो सकें। करीब तीन महीने बाद उन्हें परिसर में स्वतंत्र रूप से घूमने की अनुमति दी जाएगी।
जिनेवा की महानिदेशक तातियाना वालोवाया ने कहा, “हम पांच नए मोरों का स्वागत करके बहुत खुश हैं। चार नीले और एक सफेद, संयुक्त राष्ट्र के पारंपरिक नीले और सफेद रंगों को भी रेखांकित करते हैं। हमने उनके लिए एक अस्थायी घर बनाया है। वे अगले तीन महीने यहां रहेंगे और उसके बाद उन्हें स्वतंत्र रूप से घूमने और एरियाना पार्क की मेहमाननवाजी का आनंद लेने की अनुमति दी जाएगी।”
यह सजीव भेंट संयुक्त राष्ट्र और भारत के बीच पुरानी राजनयिक परंपरा को आगे बढ़ाता है। 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जिनेवा को दो मोर भेजे थे।
भारत के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत एवं स्थायी प्रतिनिधि अरिंदम बागची ने कहा, “यह भारतीय मिशन के लिए वास्तव में गौरव की बात है कि हम यूएन जिनेवा को पांच मोर ‘पावो क्रिस्टेटस’ उपहार में दे पा रहे हैं। यहां मोरों को रखने की एक परंपरा रही है। हमने 1981 में भी मोर उपहार में दिए थे और उसे जारी रखते हुए हमें खुशी हो रही है।”
–आईएएनएस
केआर/
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