क्या है अमेरिका का ‘बोर्ड ऑफ़ ट्रेड’ फार्मूला, जिसे राष्ट्रपति जिनपिंग ने नहीं दी तवज्जो, समझिए ट्रम्प का 5B फार्मूला

Summary :

Trump Board of Trade : बीते दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 3 दिवसीय चीन यात्रा पर थे. इस बीच दोनों नेताओं के बीच व्यापर संबधित चर्चा हुई. हालाँकि ट्रम्प अब अमेरिका वापस लौट चुके हैं. बता दें, पिछले 9 सालों में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति का ये पहला चीन दौरा था. वहीं, बुसान के बाद दोनों देशों के नेताओं के बीच ये दूसरी मुलाकात थी. हालांकि इस यात्रा के बाद से विश्व में नई वैश्विक बदलती परिस्थितियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है. अमेरिका का बोर्ड ऑफ़ ट्रेड बहस अमेरिका के ‘बोर्ड ऑफ ट्रेड’ और चीन के ‘रचनात्मक रणनीतिक और…

Trump Board of Trade : बीते दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 3 दिवसीय चीन यात्रा पर थे. इस बीच दोनों नेताओं के बीच व्यापर संबधित चर्चा हुई. हालाँकि ट्रम्प अब अमेरिका वापस लौट चुके हैं. बता दें, पिछले 9 सालों में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति का ये पहला चीन दौरा था.

वहीं, बुसान के बाद दोनों देशों के नेताओं के बीच ये दूसरी मुलाकात थी. हालांकि इस यात्रा के बाद से विश्व में नई वैश्विक बदलती परिस्थितियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है.

अमेरिका का बोर्ड ऑफ़ ट्रेड

Trump Board of Trade
Trump Board of Trade

बहस अमेरिका के ‘बोर्ड ऑफ ट्रेड’ और चीन के ‘रचनात्मक रणनीतिक और स्थिर संबंध’ के इर्द-गिर्द घूम रही है. इस दौरे से पहले दोनों देशों ने यह साफ़ कर दिया था कि यह मुलाक़ात व्यापारिक होगी. हुआ भी कुछ ऐसे ही. अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ तमाम बड़ी कंपनियों के सीईओ आए थे.

क्रमांक नाम कंपनी पद
1 क्रिस्टियानो एमन क्वालकॉम सीईओ
2 टिम कुक एप्पल सीईओ
3 लॉरेंस कल्प जूनियर जीई एयरोस्पेस सीईओ
4 लैरी फिंक ब्लैकरॉक सीईओ
5 जेन फ्रेजर सिटीग्रुप सीईओ
6 जेनसन हुआंग एनवीडिया सीईओ
7 रयान मैकइनर्नी वीज़ा सीईओ
8 संजय मेहरोत्रा माइक्रोन टेक्नोलॉजी सीईओ
9 माइकल मीबैक मास्टरकार्ड सीईओ
10 एलन मस्क टेस्ला / स्पेसएक्स सीईओ
11 केली ऑर्टबर्ग बोइंग सीईओ
12 स्टीफन श्वार्ज़मैन ब्लैकस्टोन सीईओ
13 ब्रायन साइक्स कारगिल सीईओ
14 डेविड सोलोमन गोल्डमैन सैक्स सीईओ
15 जैकब थायसन इल्यूमिना सीईओ

बता दें, इस व्यापारिक यात्रा को लेकर अमेरिका ने ‘5B’ का फॉर्मूला (बीफ, बीन्स, बोइंग, बोर्ड ऑफ ट्रेड और बोर्ड ऑफ इन्वेस्टमेंट) पेश किया था. अमेरिका का मकसद एक ऐसा व्यापारिक तंत्र बनाना था, जिससे भविष्य के विवादों को बढ़ने से रोका जा सके. हालांकि, चीन को अमेरिका का ये फॉर्मूला पसंद नहीं आया.

चीन का रुख

हालाँकि चीन इसे लेकर शंका में है. चीन को लगा कि ट्रंप नियमों के जाल में फंसाकर उसे काबू करना चाहते हैं. वहीं, चीन ने ‘रचनात्मक रणनीतिक और स्थिर संबंध’ का प्रस्ताव रखा. यह फॉर्मूला चीन के अनुसार अगले तीन साल या उससे ज्यादा समय के लिए दोनों देशों के रिश्तों को दिशा देगा.

इस बीच चर्चा है कि चीन की मंशा वैश्विक मुद्दों पर एक रेड लाइन खींचने की थी. वहीँ ताइवान पर अपना रूख भी पेश करना था.

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।