Bihar Minor Girl Gangraped: बिहार के जमुई जिले से सामने आए एक बेहद गंभीर और दर्दनाक गैंगरेप मामले में विशेष पॉक्सो कोर्ट ने कड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने तीनों दोषियों को “अंतिम सांस तक कठोर आजीवन कारावास” की सजा दी है। इसके साथ ही हर आरोपी पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यह फैसला नाबालिगों की सुरक्षा के लिए बने पॉक्सो कानून के तहत दिया गया, जो ऐसे अपराधों पर सख्त सजा का प्रावधान करता है।
Bihar Minor Girl Gangraped: क्या था पूरा मामला?

यह घटना दिसंबर 2025 की है। 15 साल की एक लड़की अलीगंज बाजार से अचानक लापता हो गई थी। परिवार ने उसकी काफी तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल पाई। करीब 23 दिन बाद, 24 दिसंबर 2025 को पुलिस ने उसे कटिहार के एक कमरे से बेहोशी की हालत में बरामद किया। होश में आने के बाद पीड़िता ने जो बताया, वह बेहद चौंकाने वाला था। उसने कहा कि 1 दिसंबर को तीन लोगों ने उसे कार में जबरन बैठाकर अगवा कर लिया। इसके बाद उसे एक कमरे में रखा गया, जहां लगातार 23 दिनों तक उसके साथ दुष्कर्म किया गया।
पीड़िता के साथ हुई क्रूरता
पीड़िता ने बताया कि उन दिनों उसे बहुत कम खाना दिया जाता था, दिन में सिर्फ दो रोटी। इससे उसकी हालत बेहद कमजोर हो गई थी। आरोपियों ने उसे डराकर रखा और धमकी दी कि अगर उसने किसी को कुछ बताया तो उसकी हत्या कर दी जाएगी। इतना ही नहीं, आरोपियों ने पीड़िता की मां को भी फोन कर धमकी दी कि उनकी बेटी अब वापस नहीं आएगी। इस वजह से परिवार लंबे समय तक डर और तनाव में रहा।
Bihar Minor Girl Gangraped : आरोपी और गिरफ्तारी
इस मामले में मुख्य आरोपी मोहम्मद इमरान उर्फ चांद, मोहम्मद आफताब अंसारी और मोहम्मद सद्दाम हुसैन हैं। पुलिस ने इन्हें कटिहार से गिरफ्तार किया। जांच के दौरान पीड़िता के बयान और अन्य सबूतों के आधार पर इनके खिलाफ मजबूत केस तैयार किया गया।
तेजी से चला ट्रायल
पुलिस ने 17 जनवरी 2026 को चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद 22 जनवरी को अदालत ने मामले को संज्ञान में लिया। केस की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने स्पीडी ट्रायल की मांग की। अदालत में पीड़िता, उसकी मां, डॉक्टर, पुलिस अधिकारी और स्कूल के प्रिंसिपल समेत कई गवाहों ने बयान दिए। 19 फरवरी से 28 फरवरी के बीच दोनों पक्षों की बहस चली। इसके बाद 16 मार्च 2026 को अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया।
Bihar Crime News: कोर्ट का फैसला और कानूनी प्रावधान

24 मार्च 2026 को विशेष न्यायाधीश महेश्वर दुबे ने सजा सुनाई। अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) और 96 के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 6 और 17 के तहत यह सजा दी। इन धाराओं में न्यूनतम 20 साल की सजा से लेकर मृत्युदंड तक का प्रावधान है। अदालत ने इस मामले में उम्रभर की कठोर सजा को उचित माना, ताकि समाज में कड़ा संदेश जाए।
यह फैसला न केवल पीड़िता के लिए न्याय है, बल्कि समाज के लिए भी एक बड़ा संदेश है कि नाबालिगों के साथ होने वाले अपराधों को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही, यह केस दिखाता है कि अगर जांच और सुनवाई तेजी से हो, तो न्याय जल्दी मिल सकता है।


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