कोरोना महामारी में किसानों के लिए अलग फंड की व्यवस्था करें सरकार : मंजुबाला पाठक

Summary :

बिहार महिला कांग्रेस की पूर्व उपाध्यक्ष मंजुबाला पाठक ने कहा कि देश का किसान देश की रीढ़ की हड्डी हैं। किसान अन्नदाता हैं और किसान यदि खुशहाल नहीं रहेगा तो देश की कृषि उत्पादकता प्रभावित होगी और देश का अर्थव्यवस्था कमजोर होगी। किसानों के कल्याणार्थ सरकार को फंड की व्यवस्था करनी चाहिए।

पटना : देश इस वक्त कोरोना संकट से जूझ रहा है। कोरोना के चलते देश में लॉकडाउन लगा हुआ है। इस बीच, बिहार महिला कांग्रेस की पूर्व उपाध्यक्ष मंजुबाला पाठक ने कहा कि देश का किसान देश की रीढ़ की हड्डी हैं। किसान अन्नदाता हैं और किसान यदि खुशहाल नहीं रहेगा तो देश की कृषि उत्पादकता प्रभावित होगी और देश का अर्थव्यवस्था कमजोर होगी। किसानों के कल्याणार्थ सरकार को फंड की व्यवस्था करनी चाहिए। देश और राज्यों में मंडियों की संख्या बढ़ाने का प्रयास केंद्र और राज्य सरकारों को करना चाहिए। 
फसल चक्र हेतु किसानों की काउंसलिंग और तकनीकी ज्ञान का प्रबंध सरकार की तरफ से होनी चाहिए। किसानों के लिए इस कोविड- 19 महामारी में अलग से फंड की व्यवस्था होनी चाहिए। पंचायतों और उसके प्रतिनिधियों की सहभागिता किसान हित के लिए सुनिश्चित किया जाना चाहिए। पाठ्यक्रमों में खेती किसानी के विषय को मजबूत रूप से शामिल करने की जरूरत है। अत्यधिक उत्पादन बढ़ाने हेतु फंड और उत्तम बीज तथा खाद की व्यवस्था करनी चाहिए। किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट को बढ़ाने की जरूरत है मृदा जांच केंद्र व्यापक पैमाने पर होनी चाहिए। उत्तम बीज और खाद सरकार की तरफ से आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए। 
बिहार के चंपारण में किसानों की गन्ना फसल का अभी तक भुगतान नहीं किया गया। किसानों की माली स्थिति बहुत ही खराब है। अब फिर समाज में साहूकारी व्यवस्था का प्रचलन बढ़ने लगा है। किसानों को पैदावार की उचित कीमत नहीं मिल रही है। फसल क्षतिपूर्ति भी नहीं मिल रही है। इस महामारी में कुछ किसानों का पेट भरना मुश्किल हो गया है। उनके बच्चों का विकास अवरुद्ध है। भारत में कृषि पर निर्भरता बहुत अधिक है। यहां जीवन के इस संघर्ष में जो कोरोना महामारी फैली है उससे देश को किसान ही उबार सकते हैं। 
आज हमारे समाज में कृषि बहुत जगहों पर ट्रेडिशनल तरीके से की जाती है इसका कारण मूलभूत सुविधाओं का अभाव और फंड की कमी है। चंपारण में व्यावसायिक खेती की जरूरत है और यह सरकार द्वारा फंड की उपलब्धता के कारण हो सकती है। हमारे किसान बहुत मेहनती होते हैं बस उन्हें थोड़ा सहयोग और तकनीकी चीजों की उपलब्धता की आवश्यकता है। किसान किसी भी संगठन और मार्ग द्वारा लाभ प्राप्त कर सकते हैं बशर्ते उन्हें फंड देकर उनका मनोबल बढ़ाया जाए।

Desk Team