भरत तिवारी एनकाउंटर पर जीतन राम मांझी का बड़ा बयान, उठाया हिंदू-मुस्लिम और दलित एंगल

Summary :

बिहार के भोजपुर के भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में जीतन राम मांझी का बयान सामने आया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर एनकाउंटर पर सवाल उठाने वालों को आड़े हाथ लिया है। उन्होंने इस एनकाउंटर को सही बताया है। इससे एक कदम और आगे बढ़ उन्होंने इस मामले हिन्दू-मुस्लिम एंगल भी डाल दिया है। जीतन राम मांझी का ये बयान काफी चर्चा में है। देश संविधान से चलेगा या फिर अवैध पिस्टल की नोक से? केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने मंगलवार, 23 जून को अपने एक्स हैंडल से पोस्ट कर लिखा, ‘दलितों का एंकाउंटर हो तो…

बिहार के भोजपुर के भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में जीतन राम मांझी का बयान सामने आया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर एनकाउंटर पर सवाल उठाने वालों को आड़े हाथ लिया है। उन्होंने इस एनकाउंटर को सही बताया है। इससे एक कदम और आगे बढ़ उन्होंने इस मामले हिन्दू-मुस्लिम एंगल भी डाल दिया है। जीतन राम मांझी का ये बयान काफी चर्चा में है।

देश संविधान से चलेगा या फिर अवैध पिस्टल की नोक से?

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने मंगलवार, 23 जून को अपने एक्स हैंडल से पोस्ट कर लिखा, ‘दलितों का एंकाउंटर हो तो “नक्सली था मारा गया”, मुसलमान का एंकाउंटर हो तो “आतंकवादी था मारा गया”, ऐसा कहने वाले लोग ही भरत तिवारी के एंकाउंटर पर सवाल उठा रहें हैं।’

मांझी ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर भरत तिवारी के पास अवैध पिस्टल कहां से आया? किन लोगों के शह पर इस आपराधिक वारदात पर राजनीति हो रही है? देश संविधान से चलेगा या फिर अवैध पिस्टल की नोक से?

“भरत तिवारी कोई क्रांतिकारी नहीं था”

उन्होंने कहा कि भरत तिवारी कोई क्रांतिकारी नहीं था जिनका जातिवादी मानसिकता के लोग समर्थन कर रहें हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी अपराधिक मामले को लेकर इनकी गिरफ़्तारी हो चुकी थी।
उन्होंने जोर देकर कहा कि इस दोहरे रवैये पर भी बात होनी चाहिए और यह गहराई से समझने की जरूरत है कि आखिर कुछ चुनिंदा लोग इस पूरे मुद्दे पर इतना शोर क्यों मचा रहे हैं।

“एनकाउंटर नहीं,  हत्या हुई है”

बिहार कांग्रेस के नेता अखिलेश प्रसाद सिंह ने इस मामले को लेकर कहा, “मैं इस बात को पूरी तरह खारिज करता हूं कि भरत तिवारी का एनकाउंटर हुआ है; असल में यह उसकी हत्या हुई है। डीएसपी ने एक साजिश के तहत अंजाम दिया। मैंने सरकार से मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच किसी सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) जज से कराने के बजाय पटना हाईकोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश से कराई जाए। साथ ही, पीड़ित परिवार को तुरंत राहत के तौर पर 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएं।”

Bhawana Rawat

भावना रावत पिछले 2 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम की खबरें लिखने में रुचि है। दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं।