Roshan Anand on Bharat Tiwari Encounter : भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी पुलिस एनकाउंटर मामले में अब सियासी और सामाजिक हलकों से तीखे सवाल उठने लगे हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर ‘ज्ञान बिंदु GS एकेडमी’ के डायरेक्टर रोशन आनंद की बड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है।
रोशन आनंद ने पुलिसिया कार्रवाई को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पुलिस का काम जनता की रक्षा करना है, शिकारी बनना नहीं। भरत तिवारी मर्डर केस इसका ताजा उदाहरण है। उन्होंने सीधा सवाल दागा कि जब भरत तिवारी पहले ही आत्मसमर्पण कर चुके थे, तो फिर उन्हें एनकाउंटर में क्यों मार गिराया गया?
Roshan Anand Statement : ‘रक्षक हैं शिकारी नहीं’, रोशन सर

रोशन आनंद ने अपना दर्द और गुस्सा जाहिर करते हुए कहा, ‘आप जनता के रक्षक हैं, शिकारी नहीं। अगर मुझे झूठे केस में फंसाकर गिरफ्तार न किया गया होता, तो मेरा भाई आज हमारे बीच जिंदा होता। भरत तिवारी के मामले में भी प्रशासन को यह संवेदनशीलता समझनी चाहिए। इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए क्योंकि जनता आज भी आपसे न्याय की उम्मीद लगाए बैठी है।’
Bharat Tiwari Encounter Bihar : SHO समेत कई पुलिसकर्मियों पर FIR

इस बीच, मामले को बढ़ता देख प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई हुई है। बिहार के भोजपुर जिले में हुए इस एनकाउंटर को लेकर मंगलवार को पुलिस के कई आला अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौती गांव के रहने वाले भरत भूषण तिवारी की बीते बुधवार, 17 जून को एक कथित पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी।
भोजपुर एसपी कार्यालय से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, मृतक की मां द्वारा दी गई लिखित शिकायत के आधार पर शाहपुर थाने में यह मामला दर्ज किया गया है।
बयान में साफ किया गया है कि यह FIR तत्कालीन जगदीशपुर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी SDPO, तत्कालीन शाहपुर थाना प्रभारी और उस दिन घटना में शामिल रहे अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ नामजद दर्ज की गई है।
Bharat Tiwari Encounter : सरकार ने दिए न्यायिक जांच के आदेश
भरत तिवारी की मौत के बाद से ही बिहार में सियासी पारा चढ़ा हुआ है और विपक्ष लगातार पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। विवाद बढ़ता देख बिहार सरकार ने पिछले शनिवार को ही इस पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने के आदेश दे दिए थे।
बता दें कि घटना के बाद पुलिस ने अपने शुरुआती बयान (16 जून) में तिवारी को कथित तौर पर ‘मानसिक रूप से अस्वस्थ’ करार दिया था। इसके उलट, भरत के परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वे जनसरोकार से जुड़े एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता थे, जो लगातार स्थानीय मुद्दों को लेकर प्रशासन के सामने आवाज उठाते रहते थे।
इस बीच, सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने पुलिस के दावों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस कथित वीडियो में मुठभेड़ से ठीक पहले भरत तिवारी को अपना हथियार नीचे फेंकते हुए देखा जा सकता है। हालांकि, घटना के तुरंत बाद पुलिस अधिकारियों ने दावा किया था कि भरत तिवारी लगातार पुलिस टीम पर फायरिंग कर रहे थे, जिसके जवाब में पुलिस ने ‘आत्मरक्षा’ में गोलियां चलाईं और गोली भरत के पैर में लगी थी। मामले की सच्चाई अब न्यायिक जांच के बाद ही साफ हो सकेगी।


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