CBFC Update on The Kerala Story 2: गोज़ बियॉन्ड’ को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने रिलीज़ से पहले 16 कट्स और अमेंडमेंट के साथ U/A सर्टिफिकेट दिया है। इसमें खास तौर पर प्यार, हिंसा और शारीरिक दृश्यों (जैसे किस और ज़ोरदार दृश्य) की अवधि और इंटेंसिटी कम करने के लिए कहा गया। kissing सीन को लगभग 50% घटा दिया गया, वहीं कुछ वायलेंट सीन, जैसे एक महिला को थप्पड़ मारना और सिर पर चोट पड़ना, को भी छोटा किया गया। इसके अलावा कुछ संवादों को म्यूट किया गया और दृश्य अमेंडमेंट किए गए ताकि फिल्म में संतुलन बना रहे।
CBFC Update on The Kerala Story 2: CBFC ने 16 कट लगाकर दी U/A सर्टिफिकेट, संवेदनशील दृश्य बदले

CBFC ने यह भी इंस्ट्रक्शन दिया कि फिल्म में स्पष्ट डिस्क्लेमर शामिल किया जाए, जिसमें कहा जाए कि कहानी “सत्य घटनाओं से प्रेरित” है और किसी विशेष समुदाय या राज्य को अपमानित नहीं करती। कट्स के बाद फिल्म की कुल लंबाई लगभग 2 घंटे 11 मिनट बनी। निर्माता विपुल अमृतलाल शाह ने बोर्ड का आभार जताया है कि U/A सर्टिफिकेट मिलने से फिल्म युवा दर्शकों और परिवारों तक भी पहुँच सकती है, जबकि मजबूत विषयवस्तु होने के बावजूद इसे A (प्रौढ़) के बजाय हल्का रेटिंग मिला।
CBFC 16 cuts : हाई कोर्ट ने CBFC और मेकर्स को नोटिस जारी किया, ‘सेक्युलर नमक’ सवाल!

CBFC द्वारा फिल्म को सर्टिफिकेट देने के फैसले के खिलाफ केरल हाई कोर्ट में पिटीशन दायर की गई है, जिसमें फिल्म की सर्टिफिकेशन को रद्द करने की मांग की गई। न्यायालय ने मेकर्स, CBFC और केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए 24 फरवरी को आगे सुनवाई के लिए कहा है। पिटीशनर का दावा है कि फिल्म “केरल स्टोरी 2” में केरल राज्य को गलत तरीके से दर्शाया गया है और इससे कम्युनल तनाव और मिसकन्सेप्शन फैल सकती है।
कोर्ट ने यह भी कहा है कि केरल एक सेक्युलर और दोस्ताना राज्य है और अगर फिल्म वास्तव में “सत्य घटनाओं पर आधारित” दिखाती है, तो इसके इफ़ेक्ट पर भी गंभीर सवाल उठते हैं। अदालत ने CBFC से इस पर जवाब देने को कहा है कि क्या सही प्रोसेस अपनाई गई और क्या सर्टिफिकेट देना जस्टिफिएबल था।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह न केवल फ़िल्म रिलीज़ से पहले कानूनी चुनौती पैदा कर रहा है, बल्कि भारतीय सिनेमा में सेंसर बोर्ड के निर्णय को जुडिशरी के सामने चुनौती देना भी एक बड़ी बात बन चुका है।
द केरल स्टोरी 2’ का ट्रेलर और उसके बाद का विवाद सिर्फ सेंसर कट या कानूनी लड़ाई तक सीमित नहीं है – यह अब सांस्कृतिक और राजनीतिक बहस का मुद्दा भी बन चुका है। कई फिल्म निर्माता, राजनेता और सामाजिक समूह इस फिल्म को “प्रोपगैंडा” कहते हुए क्रिटिसिज्म कर रहे हैं।
The Kerala Story 2 kissing Visuals reduced : विवाद सिर्फ कोर्ट तक सीमित नहीं, फिल्म पर ‘प्रोपगैंडा’ और सांस्कृतिक आरोप भी

बॉलीवुड निर्माता और निर्देशक अनुराग कश्यप ने फिल्म के प्रोड्यूसरों पर निशाना साधते हुए इसे पब्लिसिटी और पैसा कमाने की चाल बताया। इसके अलावा कुछ मुस्लिम और सामाजिक समूहों ने फिल्म को गलत कथाओं पर आधारित बताया और कहा कि इससे समाज में भ्रम और गलतफहमी फैल सकती है।
उधर, निर्माता विपुल शाह ने साफ कहा कि फिल्म किसी समुदाय या राज्य को निशाना नहीं बना रही है और यह केवल उन फैक्ट्स पर आधारित है जिन्हें उन्होंने “एक्सप्लोर और रिसर्च” किया है। उन्होंने कहा कि फिल्म का मकसद लोगों को जागरूक करना है, न कि किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना। इस बहस से यह साफ है कि ‘The Kerala Story 2: Goes Beyond’ सिर्फ एक फिल्म नहीं बनी – बल्कि सेंसर, कानून, संस्कृति और समाज के बीच एक बड़ी बहस का केंद्र बन गई है।


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