Nana Patekar Dialogues: ‘आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने?’- आवाज हुई खामोश लेकिन डायलॉग्स नहीं, जानें अब तक नाना के हिट हुए मोस्ट पॉपुलर डायलॉग्स की कहानी

Summary :

नाना पाटेकर के निधन से भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे दिग्गज अभिनेता को खो दिया, जिसकी आवाज और संवादों की अदायगी उनकी पहचान बन गई थी। ‘क्रांतिवीर’, ‘प्रहार’, ‘तिरंगा’ और ‘परिंदा’ जैसी फिल्मों में उनके दमदार किरदार और यादगार संवाद आज भी दर्शकों के जेहन में बसे हैं। उनकी आवाज भले खामोश हो गई हो, लेकिन उनके किरदार, अभिनय और संवाद आने वाली पीढ़ियों तक उन्हें जिंदा रखेंगे।

कुछ कलाकार सिर्फ पर्दे पर किरदार नहीं निभाते, बल्कि अपनी एक अलग पहचान छोड़ जाते हैं। नाना पाटेकर भी ऐसे ही कलाकारों में से एक थे। उनका नाम सुनते ही एक चेहरा याद आता है, एक आवाज कानों में गूंजती है और डायलॉग्स का वो खास अंदाज सामने आ जाता है, जिसे शायद ही कोई दूसरा कलाकार दोहरा सके।

नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया है। गुरुवार सुबह गोवा के डोना पाउला स्थित उनके घर पर उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी। उन्हें बेहोशी की हालत में अस्पताल ले जाया गया। मणिपाल अस्पताल में डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक CPR देकर उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। डॉक्टरों के मुताबिक सुबह 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित किया गया। शुरुआती जानकारी में मौत की वजह कार्डियक अरेस्ट ही बताई गई है।

लेकिन नाना पाटेकर की कहानी को सिर्फ उनके निधन की खबर तक लिमीटेड नहीं रखा जा सकता। उन्हें याद करने के लिए भारतीय सिनेमा के पास उनके कई ऐसे किरदार हैं, उनकी आंखों का गुस्सा है, चेहरे की कठोरता है और सबसे बढ़कर वो आवाज है, जो डायलॉग्स को महज शब्द नहीं रहने देती थी।

Nana Patekar Dialogues: जब नाना बोलते थे, किरदार बोलता था

Nana Patekar Dialogues
Nana Patekar Dialogues (Source: Google)

नाना पाटेकर की एक्टिंग स्टाइल में एक अजीब-सी इंटेंसिटी थी। वह डायलॉग्स बोलते नहीं थे, ऐसा लगता था जैसे डायलॉग्स उनके अंदर से निकल रहा हो। उनकी आवाज में गुस्सा भी सुनाई देता था, दर्द भी और गलत के खिलाफ खड़ा एक आम आदमी भी।

‘क्रांतिवीर’ का डायलॉग याद कीजिए— ‘आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने?’

Most Popular Dialogues Of Nana Patekar
Most Popular Dialogues Of Nana Patekar (Source: Google)

एक सिंपल-सी लाइन नाना की एक्टिंग में ऐसी बदल गई कि वह फिल्म के एक सीन से निकलकर दर्शकों की यादों का हिस्सा बन गई। इसी फिल्म का एक और डायलॉग था— ‘कुत्ते की तरह जीने की आदत पड़ गई है सबको…’ इन शब्दों में सिर्फ नाराजगी नहीं थी। इसमें उस समाज के खिलाफ आक्रोश था, जिसके सामने आम आदमी खुद को बेबस महसूस करता है। नाना के डायलॉग की यही खासियत थी कि वो कहानी का हिस्सा होते हुए भी अक्सर समाज की सच्चाई कह जाते थे।

‘तिरंगा’ से ‘प्रहार’ तक, हर किरदार की अपनी आवाज

Tiranga Film Nana Patekar
Tiranga Film Nana Patekar (Source: Google)

‘तिरंगा’ में नाना पाटेकर के अंदाज की बेबाकी कुछ यूं सुनाई देती थी, ‘अपना तो उसूल है… पहले लात, फिर बात, उसके बाद मुलाकात!’ इस डायलॉग को याद करते ही नाना का चेहरा सामने आ जाता है। आवाज में वही ठहराव, वही तेवर और वही अंदाज, जो उन्हें बाकी कलाकारों से अलग करता था।

‘प्रहार: द फाइनल एक्ट’ में उनका डायलॉग

Nana Patekar Prahaar Film
Nana Patekar Prahaar Film (Source: Google)

‘तू शेर है, शेर की तरह दहाड़… वरना कुत्तों की तरह भौंकते रह जाओगे!’ यह सिर्फ एक फिल्मी डायलॉग नहीं था। नाना जिस तरह शब्दों को वजन देते थे, उससे सिंपल सेंटेंस भी यादगार बन जाता था।

दर्द को भी आवाज दी

Actor Nana Patekar Aggresive Act
Actor Nana Patekar Aggresive Act (Source: Google)

नाना पाटेकर की पहचान सिर्फ गुस्सैल और एग्रेसिव किरदारों तक लिमीटेड नहीं थी। उनकी एक्टिंग में दर्द की भी उतनी ही गहराई थी।

‘परिंदा’ में उनका डायलॉग

Parinda Film Dialogue
Parinda Film Dialogue (Source: Google)

‘ये दुख नाम की बीमारी का इलाज किसी डॉक्टर के पास नहीं है… इसका इलाज खुद ही ढूंढना पड़ता है.’ वहीं नाना की खासियत यही थी कि उनके चेहरे पर एक्सप्रेशन्स आने से पहले उनकी आवाज किरदार की सिचुएशन बता देती थी। वह आंखों से जितनी एक्टिंग करते थे, उतना ही अपनी आवाज के उतार-चढ़ाव से भी। यही वजह है कि उनके निभाए किरदारों को याद करना, उनकी आवाज को याद किए बिना लगभग नामुमकिन है।

एक एक्टर नहीं, एक पूरा एक्टिंग स्टाइल

Nana Patekar's Acting Style
Nana Patekar’s Acting Style (Source: Google)

नाना पाटेकर ने अपने लंबे करियर में कई तरह के किरदार निभाए। ‘परिंदा’, ‘प्रहार’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘अब तक छप्पन’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में उनके किरदार एक-दूसरे से बिल्कुल अलग थे। सीरियस रोल से लेकर कॉमेडी तक, उन्होंने हर जगह अपनी अलग छाप छोड़ी। खास तौर पर वेलकम फिल्म में उनका डायलॉग ‘कंट्रोल उदय कंट्रोल’ आज भी लोगों के चेहरे पर मुस्कान ले आता है।

उन्होंने एक्टिंग के साथ निर्देशन और थिएटर में भी काम किया था। ‘प्रहार: द फाइनल एक्ट’ का निर्देशन भी उन्होंने किया था। उनके अभिनय को तीन नेशनल फिल्म अवॉर्ड सहित कई सम्मानों से नवाजा गया और 2013 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया। लेकिन किसी कलाकार की सबसे बड़ी अचीवमेंट सिर्फ अवॉर्ड्स के नंबर नहीं होते। असली सम्मान तब मिलता है, जब सालों बाद भी दर्शक उसके किसी किरदार को याद करके उसकी आवाज अपने मन में सुन सकें। नाना पाटेकर ने यही हासिल किया है।

पर्दा गिर गया, आवाज बाकी है

Nana Patekar Death
Nana Patekar Death (Source: Google)

आज नाना पाटेकर हमारे बीच नहीं हैं। एक ऐसा एक्टर चला गया है, जिसके पर्दे पर आते ही माहौल बदल जाता था। उनकी आंखों में गुस्सा दिखता था, चेहरे पर कहानी दिखाई देती थी और आवाज में पूरा किरदार सुनाई देता था। शायद आने वाले सालों में उनकी फिल्में फिर देखी जाएंगी। ‘परिंदा’ का दर्द फिर महसूस होगा, ‘प्रहार’ का जोश फिर सुनाई देगा। ‘तिरंगा’ के डायलॉग फिर दोहराए जाएंगे और ‘क्रांतिवीर’ की वो आवाज फिर कानों में गूंजेगी।

पर्दा गिरा है, आवाज़ नहीं

Nana Patekar dies at 75
Nana Patekar dies at 75 (Source: Google)

नाना पाटेकर की आवाज अब सचमुच खामोश है। लेकिन महान कलाकारों की आवाजें कभी पूरी तरह खामोश नहीं होतीं। वे फिल्मों में रहती हैं, डायलॉग्स में रहती हैं और सबसे ज्यादा उन दर्शकों की यादों में जिंदा रहती हैं, जिन्होंने उन्हें पर्दे पर देखा और महसूस किया है। अब भले ही पर्दा गिर गया है, लेकिन नाना पाटेकर का किरदार खत्म नहीं हुआ है। उनकी आवाज अब भी जिंदा है।

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Rishabh Pandey

ऋषभ पांडे पिछले पांच साल से पत्रकारिता के फील्ड में काम कर रहे हैं, उन्होंने अपनी शुरुआत Zee News चैनल से की थी, इसके बाद उन्होंने News 24 में पॉलिटिकल, एंटरटेनमेंट न्यूज और क्राइम से जुड़ी खबरें लिखीं और बतौर प्रोड्यूसर भी एंटरटेनमेंट बीट पर काम किया, अब ऋषभ Punjab Kesari में एंटरटेनमेंट और स्पोर्टस बीट पर बतौर Sub Editor (हिंदी में) काम कर रहे हैं।