Nana Patekar Struggle: कभी 35 रुपये की कमाई से चलता था घर, सड़क किनारे पोस्टर और जेब्रा क्रॉसिंग पेंट कर गुजारा करते थे एक्टर, ऐसे बदली किस्मत

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Nana Patekar Struggle: नाना पाटेकर का फिल्मी सफर संघर्ष और मेहनत की मिसाल रहा। परिवार का कारोबार डूबने के बाद आर्थिक मुश्किलों के बीच उन्होंने कम उम्र में काम शुरू किया। पोस्टर और जेब्रा क्रॉसिंग पेंट कर पैसे कमाए। कभी 35 रुपये की दिहाड़ी से घर चलाया, लेकिन हार नहीं मानी और आगे चलकर शानदार पहचान बनाई।

Nana Patekar Struggle: हिंदी और मराठी सिनेमा में अपने शानदार डायलॉग और  बेहतरीन  अभिनय के लिए मशहूर  दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर ने दुनिया को आज यानी 8  अक्टूबर 2026 को 75 साल की उम्र अलविदा कह दिया है।  दरअसल,  गोवा स्थित उनके घर पर उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों की कोशिश के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर से फिल्म इंडस्ट्री और उनके चाहने वालों में शोक की लहर दौड़ पड़ी है।

नाना पाटेकर ने करीब 50 साल  तक फिल्मों में काम किया। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत छोटे और सपोर्टिंग किरदारों से की, लेकिन अपनी दमदार आवाज, शानदार डायलॉग डिलीवरी और अलग तरह की एक्टिंग से धीरे-धीरे अपनी खास पहचान बना ली। आइए जानते हैं उनके संघर्षों का दौर कैसा रहा?

1978 में शुरू हुआ था फिल्मी सफर

नाना पाटेकर ने साल 1978 में फिल्म ‘गमन’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में छोटे और महत्वपूर्ण किरदार निभाए। ‘अंकुश’, ‘प्रतिघात’ और ‘परिंदा’ जैसी फिल्मों ने उन्हें एक गंभीर और प्रभावशाली अभिनेता के तौर पर पहचान दिलाई।

इसके बाद ‘क्रांतिवीर’, ‘तिरंगा’, ‘खामोशी’ और ‘अपहरण’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को खूब पसंद किया गया। नाना की खासियत यह थी कि वह हर किरदार को अपने अलग अंदाज में निभाते थे। गंभीर भूमिका हो या कॉमेडी, वह पर्दे पर अपनी अलग छाप छोड़ देते थे।

‘वेलकम’ के उदय शेट्टी ने भी खूब हंसाया

नाना पाटेकर को उनकी गंभीर और दमदार भूमिकाओं के लिए जाना जाता था, लेकिन फिल्म ‘वेलकम’ में उन्होंने कॉमेडी का शानदार अंदाज दिखाया। साल 2007 में रिलीज हुई इस फिल्म में उन्होंने डॉन उदय शेट्टी का किरदार निभाया था। इस किरदार की कॉमिक टाइमिंग और डायलॉग बोलने के अंदाज ने दर्शकों को खूब हंसाया। इस फिल्म के बाद नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी नाना की लोकप्रियता काफी बढ़ गई।

नाना पाटेकर अपने काम को लेकर काफी गंभीर रहते थे। फिल्म ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ के लिए उन्होंने करीब तीन साल तक सैन्य ट्रेनिंग ली थी।  वह इस फिल्म के निर्देशन से भी जुड़े थे। उनके काम के प्रति समर्पण की अक्सर मिसाल दी जाती रही है। नाना को उनके अभिनय के लिए कई बड़े सम्मान मिले। ‘क्रांतिवीर’ के लिए उन्हें नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला, जबकि ‘अग्निसाक्षी’ में उनके प्रदर्शन के लिए भी उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें पद्म श्री से भी नवाजा गया था।

संघर्ष भरा रहा शुरुआती जीवन

नाना पाटेकर के लिए फिल्म इंडस्ट्री में पहचान बनाना आसान नहीं था। उनका जन्म महाराष्ट्र में हुआ था। उनके पिता का टेक्सटाइल पेंटिंग का काम था, लेकिन कारोबार में नुकसान के बाद परिवार को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। कम उम्र में ही नाना ने परिवार की मदद करने के लिए छोटे-मोटे काम शुरू कर दिए थे। उन्होंने फिल्म पोस्टर और जेब्रा क्रॉसिंग की पेंटिंग जैसे काम भी किए। आर्थिक मुश्किलों के बावजूद उन्होंने अपने सपने को नहीं छोड़ा और थिएटर व फिल्मों की दुनिया में आगे बढ़ते रहे।

फिल्मों के अलावा नाना पाटेकर को खेती में भी काफी दिलचस्पी थी। गोवा स्थित अपने घर पर वह खेती-बाड़ी से जुड़े रहते थे। वह किसानों की परेशानियों को लेकर भी काफी संवेदनशील माने जाते थे और जरूरतमंद किसानों की मदद करने के लिए आगे आते रहे।

यादों में हमेशा जिंदा रहेंगे नाना

नाना पाटेकर ने अपने लंबे करियर में कई यादगार किरदार निभाए। उनकी आवाज, अभिनय का अंदाज और संवाद बोलने की शैली उन्हें दूसरे कलाकारों से अलग बनाती थी। उन्होंने गंभीर भूमिकाओं से लेकर कॉमेडी तक हर तरह के किरदार में अपनी प्रतिभा साबित की।

उनके निधन से भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया है, जिसने बिना किसी बड़े फिल्मी सहारे के अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर एक खास मुकाम बनाया। नाना पाटेकर के किरदार और उनका अभिनय आने वाले समय में भी दर्शकों को याद आते रहेंगे।

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Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।