पंजाबी सिंगर और एक्टर परमीश वर्मा पर हुए फायरिंग मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। गैंगस्टर दिलप्रीत सिंह बाबा और उसके साथियों से जुड़े इस मामले में गवाही के लिए बार-बार समन जारी होने के बावजूद अदालत में पेश नहीं होने पर चार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ गैरजमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं। इनमें तीन एएसआई और एक एसआई शामिल हैं।
अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया है कि इस मामले से जुड़े हुए अधिकारियों को गिरफ्तार कर के अगली सुनवाई के दौरान कोर्ट में पेश किया जाए। सरकारी पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि इन अधिकारियों को कई बार गवाही के लिए समन भेजे गए थे, लेकिन इसके बावजूद वे सुनवाई में एवेलेबल नहीं हुए। इसके बाद अदालत ने सख्त कदम उठाते हुए गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया।
Parmish Verma Firing Case update: इन अधिकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई

अदालत के आदेश के दायरे में गवाह गुरकीरत सिंह के साथ एएसआई सुखपाल सिंह, एएसआई जसपाल सिंह, एएसआई सेवा सिंह और एसआई मलकीत सिंह शामिल हैं। पुलिस को सभी संबंधित अधिकारियों को गिरफ्तार कर के निर्धारित तारीख पर अदालत में पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने मामले में रिकॉर्ड से जुड़ी प्रक्रिया में लापरवाही पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि अहलमद की ओर से जरूरी कार्रवाई नहीं की गई थी और उसे आने वाले समय में सावधानी बरतने की चेतावनी दी। अदालत ने यह भी साफ किया कि आदेश का पालन ना होने पर पंजाब कोर्ट्स एक्ट की धारा 36 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
बार-बार समन के बाद भी नहीं पहुंचे अधिकारी

मामले में गवाही के लिए संबंधित पुलिस अधिकारियों को 18 सितंबर 2024 को समन जारी किए गए थे। इसके बावजूद वे अदालत में पेश नहीं हुए, लगातार पेश ना होने को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने अब गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। ऐसे में अब मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 सितंबर की तारीख तय की गई है।
2018 में परमीश वर्मा पर हुआ था हमला

यह मामला साल 2018 का है। जब 13 अप्रैल की रात पंजाबी सिंगर और एक्टर परमीश वर्मा एक प्रमोशनल कार्यक्रम के बाद अपने दोस्त कुलवंत चहल के साथ चंडीगढ़ के एलांते मॉल से मोहाली स्थित अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान सेक्टर-91 के पास उनकी गाड़ी पर फायरिंग की गई थी। हमले में परमीश वर्मा घायल हुए थे और घटना के अगले दिन गैंगस्टर दिलप्रीत सिंह बाबा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए हमले की जिम्मेदारी ली थी और परमीश वर्मा को धमकी भी दी थी।
पुलिस जांच में सामने आया था कि परमीश वर्मा से रंगदारी की मांग की गई थी। फिर मांग पूरी नहीं होने के बाद उन्हें डराने के इरादे से हमला किए जाने की बात जांच में सामने आई। बाद में पुलिस ने दिलप्रीत सिंह बाबा और उसके कुछ साथियों को गिरफ्तार कर लिया था। अब सालों पुराने इस मामले में गवाही के लिए पुलिस अधिकारियों की गैरहाजिरी पर अदालत की सख्ती ने केस को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
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