Satluj Review: एक सच्ची घटना पर आधारित झकझोर देने वाली कहानी, देखें रिव्यू

Summary :

निर्देशक हनी त्रेहान की फिल्म ‘सतलुज’, जिसे पहले ‘पंजाब 95’ के नाम से जाना जाता था, अब बिना किसी कट के Zee5 पर रिलीज़ की गई है। वहीं खास बात यह है कि फिल्म को नए नाम ‘सतलुज’ के साथ दर्शकों के सामने लाया गया है। कहानी में आगे चलकर इसका महत्व समझ में आता है कि इस नाम को क्यों चुना गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, सेंसर बोर्ड (CBFC) ने फिल्म के सिनेमाघरों में रिलीज से पहले करीब 127 सीन काटने की सलाह दी थी, लेकिन अब दर्शक इसे इसके पूरे वर्जन में देख पा रहे हैं। यह फिल्म इमोशन…

निर्देशक हनी त्रेहान की फिल्म ‘सतलुज’, जिसे पहले ‘पंजाब 95’ के नाम से जाना जाता था, अब बिना किसी कट के Zee5 पर रिलीज़ की गई है। वहीं खास बात यह है कि फिल्म को नए नाम ‘सतलुज’ के साथ दर्शकों के सामने लाया गया है। कहानी में आगे चलकर इसका महत्व समझ में आता है कि इस नाम को क्यों चुना गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, सेंसर बोर्ड (CBFC) ने फिल्म के सिनेमाघरों में रिलीज से पहले करीब 127 सीन काटने की सलाह दी थी, लेकिन अब दर्शक इसे इसके पूरे वर्जन में देख पा रहे हैं। यह फिल्म इमोशन और दिल को झकझोर देने वाला एक्सपीरिएंस देती है।

  • Film: सतलुज
  • Star Cast: दिलजीत दोसांझ, अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की, कंवलजीत सिंह, गीतिका विद्या ओहल्याण
  • Director: हनी त्रेहान
  • Rating: 3.5/5
  • Where To Watch: Zee5

 Satluj Story: फिल्म की कहानी

Satluj Movie Review
Satluj Movie Review (Source: Google)

फिल्म की कहानी 1995 के पंजाब की पृष्ठभूमि पर बेस्ड है। यह वह समय है जब राज्य इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पैदा हुए तनाव और हिंसा से धीरे-धीरे उबरने की कोशिश कर रहा था। कहानी के सेंटर में बैंक कर्मचारी जसवंत सिंह खालरा (दिलजीत दोसांझ) हैं, जो तरन तारन में नॉर्मल जिंदगी जी रहे होते हैं। लेकिन एक दिन उनकी जिंदगी में बड़ा मोड़ आता है जब उन्हें पता चलता है कि उनका कोई करीबी लापता हो गया है।

इसके बाद जसवंत पुलिस से मदद मांगते हैं, लेकिन धीरे-धीरे वो एक बड़े और डरावने सच की ओर बढ़ते हैं। उन्हें पता चलता है कि हजारों लोगों को कथित रूप से मारा गया और बिना रिकॉर्ड के उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। यह सब पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा उग्रवाद के नाम पर किया जा रहा था। जैसे-जैसे जसवंत इस सच्चाई को सामने लाने की कोशिश करता हैं, वैसे-वैसे उनकी जान भी खतरे में पड़ जाती है।

Diljit Dosanjh Movie: कलाकार और निर्देशन

Diljit Dosanjh New Movie
Diljit Dosanjh New Movie (Source: Google)

फिल्म में दिलजीत दोसांझ के साथ अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की, कंवलजीत सिंह और गीतिका विद्या ओहल्याण जैसे कलाकार नजर आ रहे हैं। अर्जुन रामपाल एक सीबीआई अधिकारी समुद्र सिंह की भूमिका निभाते दिखाई दे रहे हैं, जिन्हें इस मामले की जांच के लिए भेजा जाता है। सभी कलाकारों ने अपने किरदारों को काफी प्रभावशाली ढंग से निभाया है। निर्देशक हनी त्रेहान ने इस फिल्म के जरिए एक ऐसी सच्चाई को दिखाने की कोशिश की है, जो बेहद संवेदनशील और दर्दनाक है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक आम इंसान सिस्टम के खिलाफ खड़ा होकर सच सामने लाने की कोशिश करता है।

फिल्म की खासियत

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diljit new movie (Source: Google)

‘सतलुज’ की कहानी शुरुआत से ही दर्शकों को झकझोर देती है। फिल्म में कई ऐसे दृश्य हैं जो दिल दहला देने वाले हैं। पुलिस की शुरुआती हल्की-फुल्की बातचीत जल्द ही गंभीर और डरावने मोड़ में बदल जाती है, जो कहानी की गंभीरता को बढ़ाती है। फिल्म में सतलुज नदी को एक प्रतीक के रूप में भी दिखाया गया है, जो पंजाब की पहचान से जुड़ती है। जैसे-जैसे जसवंत सच की परतें खोलते हैं, दर्शकों के सामने एक भ्रष्ट और क्रूर व्यवस्था का चेहरा सामने आता है। फिल्म यह भी दिखाती है कि कैसे राज्य को ‘साफ करने’ के नाम पर कई निर्दोष लोगों की जान चली जाती है और सिस्टम खुद ही हिंसा का हिस्सा बन जाता है।

क्या कमजोरियां हैं

Diljit Dosanjh Movie
Diljit Dosanjh Movie (Source: Google)

हालांकि फिल्म बहुत इम्प्रेसिव है, लेकिन कुछ जगहों पर कहानी थोड़ी लंबी लगती है। कुछ हिस्सों में जसवंत सिंह के बैकग्राउंड को और गहराई से दिखाया जा सकता था, जिससे उनके किरदार को और मजबूती मिलती। फिल्म की लंबाई भी कुछ दर्शकों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि लगभग 2 घंटे 43 मिनट की यह कहानी काफी गंभीर और भारी विषयों पर आधारित है।

निष्कर्ष

Satluj movie Conclusion
Satluj movie Conclusion (Source: Google)

‘सतलुज’ सिर्फ एक फिल्म नहीं है, बल्कि एक ऐतिहासिक और सामाजिक सच्चाई को दिखाने का प्रयास है। यह कहानी एक व्यक्ति के संघर्ष के जरिए यह सवाल उठाती है कि क्या एक इंसान व्यवस्था में बदलाव ला सकता है। यह फिल्म दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है और यह संदेश देती है कि भले ही अंधेरा कितना भी गहरा हो, एक छोटी सी रोशनी भी बदलाव ला सकती है। आज के समय में यह फिल्म और भी ज्यादा रलेवेंट हो जाती है, क्योंकि यह ह्यूमन राइट्स और सच्चाई की लड़ाई को सामने लाती है।

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Rishabh Pandey

ऋषभ पांडे पिछले पांच साल से पत्रकारिता के फील्ड में काम कर रहे हैं, उन्होंने अपनी शुरुआत Zee News चैनल से की थी, इसके बाद उन्होंने News 24 में पॉलिटिकल, एंटरटेनमेंट न्यूज और क्राइम से जुड़ी खबरें लिखीं और बतौर प्रोड्यूसर भी एंटरटेनमेंट बीट पर काम किया, अब ऋषभ Punjab Kesari में एंटरटेनमेंट और स्पोर्टस बीट पर बतौर Sub Editor (हिंदी में) काम कर रहे हैं।