टीवी का फेमस ड्रामा सीरियल ‘सहर होने को है’ (Seher Hone Ko Hai) इन दिनों अपने दिलचस्प मोड़ के कारण दर्शकों के दिलों पर राज कर रहा है। शो के नए प्रोमो ने सोशल मीडिया पर हंगामा मचा दिया है। एक तरफ जहाँ डॉक्टर बनकर एक बहन का हौसला सातवें आसमान पर है, वहीं दूसरी तरफ नाज़िमा की बेबसी और फूफी जान की नफरत ने कहानी में एक बड़ा भूचाल ला दिया है। आइए जानते हैं कि आने वाले एपिसोड में क्या नया ड्रामा होने वाला है।
परवेज़ बेग को मात देकर डॉक्टर बनी बहन, समाज के खिलाफ जाकर हासिल की बड़ी जीत

प्रोमो की शुरुआत बेहद पॉजिटिव और जोश से भरपूर होती है। कहानी में दिखाया गया है कि समाज और पूरी कम्युनिटी के खिलाफ जाकर, परवेज़ बेग को चकमा देकर आख़िरकार डॉक्टर बनने का सपना पूरा हो गया है। जब हौसला टूटने लगता है, तो भाई अपनी बहन को हिम्मत देते हुए कहता है, “पूरी कम्युनिटी तुम्हारे खिलाफ थी, तब भी तुमने हार नहीं मानी। हमारी बहन किसी से कम नहीं है, तुम हर प्रॉब्लम का सलूशन ढूंढ लेती हो।”
इस पर डॉक्टर साहिबा का आत्मविश्वास लौट आता है और वह कहती हैं, “हार मानना तो हमने सीखा ही नहीं है, जिंदगी में खुश होने के लिए बहुत कुछ है।” हालांकि, वे चाइल्ड स्पेशलिस्ट जेबा मैम से बहुत कुछ सीखने के लिए भी काफी एक्साइटेड हैं।
नाज़िमा के अम्मी-अब्बू को किया बर्बाद, कोर्ट-पुलिस से भाग रहे हैं पिता

कहानी का दूसरा पहलू बेहद दर्दनाक है। नाज़िमा अपनी फूफी जान के सामने गिड़गिड़ा रही है और उनके सारे काले राज खोल रही है। नाज़िमा रोते हुए कहती है, “आप जैसे अपने तो किसी गैर को भी ना मिलें फूफी जान, हमारे अम्मी-अब्बू को आपने बर्बाद करके रख दिया। अब्बू बेसहारा दर-बदर भटक रहे हैं और पुलिस से भाग रहे हैं।” फूफी जान की साज़िशों ने पूरे परिवार को सड़क पर ला दिया है, लेकिन उनके दिल में रत्ती भर भी रहम नहीं है।
फूफी ने घर से निकाला तो दी ‘सहर’ होने की खुली चेतावनी

नाज़िमा के साथ फूफी जान ने जो किया, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। नाज़िमा का निकाह मजबूरी में खालिद के साथ करवा दिया गया और उसे एक ‘दूसरी बीवी’ का दर्जा भुगतना पड़ रहा है। जब नाज़िमा ने फूफी से मदद मांगी, तो फूफी जान ने क्रूरता से कहा, “जिसकी मदद खुद खुदा नहीं करना चाहता, उसकी मदद हम क्या कर सकते हैं? जाओ दफा हो जाओ यहाँ से!”
घर से धक्के मारकर निकाले जाने के बाद नाज़िमा के तेवर बदल जाते हैं। वह रोना बंद कर फूफी जान को खुली चुनौती देते हुए कहती है, “हम इस घर में बेटी बनकर नहीं आए हैं फूफी जान… सहर होने की हैसियत से उन्हें हमारी फरियाद सुननी ही होगी” अब देखना यह होगा कि क्या माहिद अपनी बहन नाज़िमा को इंसाफ दिला पाएगा या फूफी जान का जुल्म यूँ ही जारी रहेगा?


Download Android App
Download iOS App




