टीवी का सबसे पसंदीदा शो ‘सहर होने को है‘ इस समय दर्शकों को अपनी सीट से बांधे हुए है। शो में इस समय जबरदस्त मोड़ देखने को मिल रहा है। श्रीनगर की खूबसूरत वादियों में सहर और माहिद एक-दूसरे के बेहद करीब आ चुके हैं, लेकिन किस्मत का खेल तो देखिए, दोनों ने अभी तक एक-दूसरे का चेहरा नहीं देखा है। चलिए आपको बताते हैं कि आज के एपिसोड में क्या-क्या बड़ा हंगामा हुआ है।
भरे मंच पर छलका मुफ्ती माहिद का दर्द, सहर की याद में खोए

कहानी की शुरुआत होती है श्रीनगर में चल रहे एक बड़े मुफ्ती जलसे (धार्मिक सभा) से। यहाँ हमारे हीरो यानी मुफ्ती माहिद साहब का गॉर्जियस वेलकम किया जाता है। पिछले 7 सालों से माहिद समाज सुधार, घरेलू हिंसा के खिलाफ लड़ाई और महिलाओं की शिक्षा के लिए काम कर रहे हैं। जब माहिद मंच पर भाषण देने आते हैं, तो वह लोगों को समझाते हैं कि खुदा हर इंसान का टेस्ट लेता है।
तभी माहिद की नजर पास ही बैठे दूसरे मुफ्ती के हाथ की तस्बीह (प्रार्थना की माला) पर पड़ती है। इसे देखते ही माहिद को सहर के साथ हुई अपनी पहली मुलाकात याद आ जाती है। माहिद सबके सामने इमोशनल हो जाते हैं और कहते हैं कि उनके दिल में एक ऐसा दर्द है, जिसकी दवा दुनिया के किसी डॉक्टर के पास नहीं है। वह आज भी सहर को नहीं भूल पाए हैं।
मेडिकल कैंप में सहर का अनोखा अंदाज, घरेलू हिंसा के खिलाफ उठाया कदम

दूसरी तरफ, हमारी प्यारी सहर पास ही के एक मेडिकल कैंप में मरीजों की सेवा कर रही है। वहाँ एक मरीज इंजेक्शन के डर से हंगामा कर देती है। सहर बड़ी चालाकी से उसका पसंदीदा गाना बजाकर उसका ध्यान भटकाती है और चुपके से इंजेक्शन लगा देती है। सहर कहती है कि दिल के हर दर्द का इलाज होता है, बस सही इलाज ढूंढने की जरूरत है।
तभी मेडिकल कैंप की हेड वहाँ आती हैं और कहती हैं कि गाँव के सभी लोग माहिद के प्रोग्राम में गए हैं, इसलिए कैंप में भीड़ नहीं है। वह सहर को माहिद के प्रोग्राम से लोगों को बुलाकर लाने के लिए कहती हैं। इसी दौरान सहर रास्ते में देखती है कि एक आदमी अपनी पत्नी को बुरी तरह पीट रहा है। सहर बिना डरे उस महिला को बचाने दौड़ती है। वह महिला को हौसला देती है कि कभी भी जुल्म के आगे झुकना नहीं चाहिए।
नदी में नाव पर हुआ जबरदस्त पीछा, और फिर आ गया महा-ट्विस्ट

सहर को देखकर वह जालिम पति वहाँ से भागता है और भागते-भागते सीधे माहिद से टकरा जाता है। माहिद दूर से सहर को उस पीड़ित महिला की मदद करते हुए देखते हैं, लेकिन सहर का चेहरा नहीं देख पाते। माहिद उस गुंडे को पकड़ने के लिए उसके पीछे भागता है। वह गुंडा जान बचाने के लिए नदी में नाव लेकर भागने लगता है।
माहिद भी हार नहीं मानते और दूसरी नाव में बैठकर उसका पीछा शुरू कर देते हैं। इसी समय सहर को भी अचानक अपने दिल में माहिद की मौजूदगी का अहसास होने लगता है। एपिसोड के आखिर में दिखाया गया कि दोनों एक-दूसरे के कितने करीब हैं। वहीं आने वाले एपिसोड के प्रोमो (Precap) में दिखाया गया है कि सहर का पैर अचानक फिसल जाता है और वह गिरने वाली होती है, तभी माहिद तेजी से आगे बढ़कर उसका हाथ थाम लेते हैं। अब देखना होगा कि क्या हाथ थामने के बाद दोनों की नजरें एक-दूसरे से मिलेंगी?


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