Siddhant Chaturvedi: आज सिद्धांत चतुर्वेदी अपने क्यूट और बॉय-नेक्स्ट-डोर चार्म के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस पहचान तक पहुँचने का उनका सफ़र आसान नहीं था। ये बात बहुत कम लोग जानते हैं कि ‘गली बॉय’ से पहले उन्हें कई रिजेक्शन झेलने पड़े थे और उनमें से एक ऐसा भी था, जिसने उन्हें अंदर से तोड़ दिया था। सबसे ज़्यादा आहत उन्हें इस बात से पहुंची थी कि उनको यह रिजेक्शन उनके टैलेंट के लिए नहीं, बल्कि शक्ल-सूरत के लिए था।
Siddhant Chaturvedi: एक्टर से बोला गया “कर्ली बाल वाले हीरो नहीं बनते”

हालांकि सिद्धांत की आगामी फ़िल्म ‘दो दीवाने सहर में’ उनके किरदार को अरेंज्ड मैरिज में हकलाने की वजह से ठुकरा दिया जाता है। ऐसे में जब सिद्धांत से पूछा गया कि क्या रील लाइफ की तरफ रियल लाइफ में भी उन्हें कभी रिजेक्शन का सामना करना पड़ा है, तो इस सवाल के जवाब में उन्होंने जो जवाब दिया, वो काफी निजी था। सिद्धांत ने बताया कि सीए की नौकरी छोड़ने के कुछ ही समय बाद वे एक बड़ी फ़िल्म के लिए शॉर्टलिस्ट हो गए थे। उसके बाद चला महीनों की वर्कशॉप्स।
महीनों की वर्कशॉप्स के बाद जब पॉज़िटिव फ़ीडबैक की उम्मीद में वे डायरेक्टर और कास्टिंग डायरेक्टर से मिले तो उन्हें जो जवाब मिला उसे सुनकर उनके होश उड़ गए। दरअसल प्रोड्यूसर ने उनका स्क्रीन टेस्ट देखकर उन्हें रिजेक्ट कर दिया था और जब उन्होंने उसकी वजह पूछी तो उन्होंने कहा था “कर्ली बाल वाले हीरो नहीं बनते।” प्रोड्यूसर के इस जवाब को सुनकर सिद्धांत सन्न रह गए थे।
Siddhant Chaturvedi: “बाल ज़्यादा स्ट्रेट हो गए हैं।”

हालांकि दिलचस्प बात यह है कि इंडस्ट्री के संकुचित मानकों में फिट होने की कोशिश में सिद्धांत जब अपने कर्ली बालों को स्ट्रेट करवाकर फिर ऑडिशन देने पहुँचे तो उन्हें फिर रिजेक्ट कर दिया गया और इस बार जवाबा मिला, “बाल ज़्यादा स्ट्रेट हो गए हैं।” इस जवाब पर सिद्धांत फिर हैरान रह गए। इस विषय में सिद्धांत कहते हैं, “मैं सोचता ही रह गया कि आखिर किस आधार पर किसी को रिजेक्ट किया जा रहा है? हालांकि बार-बार मिल रहे इस रिजेक्शन ने मुझे उलझन और दुख में डाल दिया था।”
इस पर अपने अनुभव साझा करते हुए सिद्धांत ने आगे कहा, ”इसका मुझ पर इतना गहरा प्रभाव पड़ा कि मैं घर गया और मैंने अपना सिर मुंडवा लिया। मैं बहुत दुखी था और वो बात मेरे दिमाग में लंबे समय तक रही। हालांकि अपने बालों को लेकर मिले इस फीडबैक से मैं इसलिए भी आहत था, क्योंकिमेरी माँ को मेरे कर्ली बाल बहुत पसंद थे।” गौरतलब है कि बॉलीवुड में यह किस्सा पुरुषों की बॉडी-शेमिंग और ऑब्जेक्टिफ़िकेशन से भी जुड़ा हुआ है, जहाँ ‘हीरो’ होने की परिभाषा को सख़्त साँचों में बाँध दिया जाता है।
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