Global Oil Price Surge: पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के 10वें दिन बाद कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है औऱ कीमत अब 100 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गई है। ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में 25 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज करते हुए यह 116.5 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। प्रति बैरल के उच्च स्तर पर भी पहुंच गईं, जो क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती चिंताओं को दर्शाती हैं।
Global Oil Price Surge: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
पश्चिम एशिया इस समय ईरान, इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच सैन्य संघर्ष की चपेट में है। ईरान पर अमेरिका और इज़राइल द्वारा साझा हमलों के बाद संकट और बढ़ गया, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता, अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। इन घटनाक्रमों ने वैश्विक तेल बाजारों में आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं को काफी हद तक बढ़ा दिया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा तनाव कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ा रहा है और निकट भविष्य में इन्हें और भी ऊपर ले जा सकता है।
वित्तीय बाजारों में चिंताएं बढ़ी
कच्चे तेल की कीमतों में हुई तेज वृद्धि ने वित्तीय बाजारों में चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि तेल की ऊंची कीमतें अक्सर वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति और आर्थिक अनिश्चितता को जन्म देती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता रहा और आपूर्ति में बाधाएँ जारी रहीं, तो तेल की कीमतें अस्थिर बनी रह सकती हैं और आने वाले समय में 150 डॉलर के स्तर तक पहुँच सकती हैं।
भारत के पास अभी 25 करोड़ बैरल तेल
एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास अभी 25 करोड़ बैरल से अधिक कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का संयुक्त ऊर्जा भंडार है, जो लगभग 40 करोड़ लीटर के बराबर है। यह भंडार पूरी आपूर्ति श्रृंखला में सात से आठ सप्ताह तक की आवश्यकता को पूरा करता है, जिससे उन दावों का खंडन होता है कि देश के पास केवल 25 दिनों का भंडार है। यह भंडार मंगलौर, पडूर और विशाखापत्तनम में स्थित रणनीतिक भूमिगत गुफाओं के साथ-साथ सतह पर स्थित टैंकों, पाइपलाइनों और जहाजों में बंटा है।
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