नई दिल्ली : तेजी से बढ़ते विमानन क्षेत्र और देश में कमर्शियल पायलटों की कमी को देखते हुये सरकार पायलट लाइसेंस हासिल करने के नियम आसान करने जा रही है। सरकार ने पायलट लाइसेंस के लिए उड़ान-अनुभव की शर्तों में ढील देने का प्रस्ताव किया है। इसके अनुसार, अब विमानों के कमर्शियल पायलट लाइसेंस के लिए जरूरी उड़ान-अनुभव का पिछले पांच साल में होना अनिवार्य नहीं होगा।
नागर विमानन मंत्रालय ने इसके लिए ‘एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937’ में संशोधन के लिए प्रारूप तैयार किया है। प्रारूप नियम पर 16 मार्च तक सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित की गयी हैं। कमर्शियल पायलट का लाइसेंस हासिल करने के लिए कम से 250 घंटे का उड़ान-अनुभव अनिवार्य है। मौजूदा नियमों के अनुसार, यह अनुभव आवेदन की तिथि से तुरंत पूर्व के पांच साल के भीतर का होना चाहिये।
नियमों में प्रस्तावित संशोधन के जरिये इस पांच साल की बाध्यता समाप्त करने की योजना है। उल्लेखनीय है कि देश में हवाई यात्रियों की संख्या पिछले लगातार चार साल में 20 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ी है। विमान सेवा कंपनियों ने बड़ी संख्या में विमानों के ऑर्डर दिये हुये हैं। इनके लिए प्रशिक्षत मानव संसाधन की कमी एक बड़ी चुनौती है। सरकार ने इसी के मद्देनजर पायलट लाइसेंस हासिल करने के नियम आसान करने की योजना बनायी है।


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