सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों के महाविलय के लिए तय एक अप्रैल की समयसीमा तेजी से नजदीक आ रही है, लेकिन ऐसा लगता है कि ये समयसीमा आगे बढ़ सकती है क्योंकि अभी कई नियामक मंजूरियां मिलनी बाकी हैं।
एक बैंक अधिकारी ने बताया कि प्रस्तावित महाविलय योजना को मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने के बावजूद शेयर आदान-प्रदान अनुपात तय करना, शेयरधारकों की सहमति और अन्य नियामक मंजूरियां मिलने में कम से कम 30-45 दिन का समय लग सकता है।
सार्वजनिक क्षेत्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ऐसे में अगले वित्त वर्ष की शुरुआत से विलय को अमलीजामा पहनाए जाने की संभावना इस समय थोड़ी अवास्तवित लग रही है।
पिछले साल अगस्त में सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों का विलय कर चार बड़े बैंक बनाने का फैसला किया था।
सिंडीकेट बैंक का केनरा बैंक के साथ विलय होना है, जबकि इलाहाबाद बैंक का विलय इंडियन बैंक में होगा।
साथ ही मानव संसाधन संबंधी मुद्दे कारोबार को नुकसान पहुंचा रहे हैं और ग्राहकों को असुविधा हो रही है। बैंक यूनियन भी प्रस्तावित विलय का विरोध कर रही हैं। उनका कहना है कि बैंकिंग क्षेत्र की समस्याओं और अर्थव्यवस्था में सुस्ती का समाधान बैंकों का विलय नहीं है।


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