SBI Report On Inflation: मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध का असर भारत में भी दिख रहा है और घरेलू-LPG सिलेंडर के दाम भी बढ़ गए है। इसी बीच एसबीआई रिसर्च की जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, खाड़ी में चल रहे संघर्ष के दूरगामी आर्थिक परिणाम हो सकते हैं, जिनमें वैश्विक मंदी का दबाव, बढ़ती मुद्रास्फीति और वित्तीय बाजार में उथल-पुथल शामिल हैं। लेकिन, आरबीआई के कि जी-सेक यील्ड को स्थिर करना और रुपये की अस्थिरता का प्रबंधन करना, घरेलू वित्तीय बाजारों को समर्थन प्रदान करता रहा है।
SBI Report On Inflation: RBI का बाजार में हस्तक्षेप
रिपोर्ट में चेतावनी दी कि लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष भारत के व्यापक आर्थिक पर दबाव डाल सकता है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ मत निर्माताओं की नाराजगी के बावजूद, आरबीआई का बाजार में हस्तक्षेप, अत्यधिक अस्थिरता पर बैन लगाना और रुपये को 92 के स्तर से नीचे लाना, विनिमय बाजार में बनी अनिश्चितता को देखते हुए एक साहसिक कदम है। वहीं होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से ब्रेंट क्रूड की कीमतों में पहले ही बढ़ोतरी हो चुकी है। जिससे होकर दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल का परिवहन होता है।
कच्चे तेल की कीमत बढ़ी
नए आंकड़ों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत बढ़कर 91.84 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई की कीमत 89.62 डॉलर हो गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि परिणामों से संकेत मिलता है कि कच्चे तेल की कीमतों में प्रति बैरल 10 डॉलर की बढ़ोतरी के लिए, वित्त वर्ष 27 में सीए 36 बीपीएस तक बढ़ सकती है। एसबीआई रिसर्च के अनुसार, सबसे खराब स्थिति में, अगर तेल की कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती है, तो जीडीपी की वृद्धि दर गिरकर 6 प्रतिशत हो सकती है।
आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ सकता है
एसबीआई रिसर्च ने बताया कि मौजूदा संघर्ष कोंड्राटिएफ वेव के बाद के चरणों के साथ मिलता है, जो कि लंबे समय तक आर्थिक चक्रों का सिद्धांत है और यह बताता है कि युद्ध का वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं पर स्थायी संरचनात्मक प्रभाव हो सकता है। रिपोर्ट में संभावित संकेतो की ओर भी इशारा किया गया। अमेरिका को तेल और गैस की ऊंची कीमतों और रूसी ऊर्जा आपूर्ति से यूरोप की ओर बदलाव से फायदा हो सकता है, जबकि अधिकांश अन्य क्षेत्रों को आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ सकता है।
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