सेंट्रम की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चीनी सीजन वर्ष 2025 में देश में गन्ना उत्पादन में पिछले साल की तुलना में 14 प्रतिशत की गिरावट आई है, जिसके कारण एसएसवाई25 के अनुमान से चूक हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा सीजन के लिए, उद्योग विश्लेषकों को उम्मीद है कि भारत का कुल चीनी उत्पादन लगभग 27 एमएमटी होगा, जो कि पहले के 28 एमएमटी के अनुमान से कम है। यह एसएसवाई24 में उत्पादित 31.8 एमएमटी से काफी कम होगा। इसमें कहा गया है कि “पिछले वर्ष की तुलना में चीनी उत्पादन में लगभग 14 प्रतिशत की कमी आई है, जिसका कारण इथेनॉल की ओर अधिक झुकाव और गन्ने की कम उपलब्धता हो सकती है।”
रिपोर्ट में बताया गया है कि साल-दर-साल गिरावट लगभग 2 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) है, जिसमें कुल उत्पादन 13.1 MMT है, जो पिछले सीजन में 15.1 MMT से कम है। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्यों में से एक महाराष्ट्र (MH) में इस सीजन में उत्पादन में 19 प्रतिशत की तीव्र गिरावट देखी गई है, जिसका मुख्य कारण पिछले पखवाड़े के दौरान गन्ने की उपलब्धता में 13 प्रतिशत की गिरावट और सीजन के लिए 17 प्रतिशत की गिरावट है।
इसकी तुलना में, उत्तर प्रदेश (UP) ने थोड़ी अधिक पेराई के बावजूद चीनी उत्पादन में अपेक्षाकृत कम 7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की है, जो गन्ने के इथेनॉल की ओर अधिक झुकाव को दर्शाता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि देश भर में, इस सीजन में अब तक गन्ने की पेराई 8 प्रतिशत घटकर 148 MMT रह गई है, जो पिछले साल की समान अवधि में 161 MMT थी।
हालांकि पिछले पखवाड़े में महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के बाहर के क्षेत्रों से बेहतर उत्पादन की बदौलत समग्र प्रदर्शन में थोड़ा सुधार हुआ है, लेकिन संचयी गिरावट महत्वपूर्ण बनी हुई है। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत सरकार (जीओआई) 1 एमएमटी के निर्यात कोटा पर विचार कर रही है। इस कदम से रुपये के मूल्यह्रास के कारण अनुकूल प्राप्तियां प्राप्त होने की उम्मीद है और इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे घरेलू चीनी कीमतों को समर्थन मिलेगा।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि चीनी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जो यूपी में 1,000-1,500 रुपये प्रति टन बढ़कर अब 39,500-40,000 रुपये प्रति टन तक पहुंच गई है। इससे उद्योग को काफी बढ़ावा मिलने की संभावना है।


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