Chhattisgarh News Update: छत्तीसगढ़ के बस्तर अन्चल में नक्सलवाद के खात्मे के लिए तय डेडलाइन के तहत अब उल्टी गिनती शुरू हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों के तहत बस्तर में अब सभी मास्टरमाइंड नक्सली लगभग मारे जा चुके हैं या आत्मसमर्पण कर चुके हैं। बस्तर में खूंखार नक्सली बारसे देवा और पापाराव अभी भी सुरक्षित ठिकाने की तलाश में भटक रहे हैं। सूत्र दावा करते हैं कि इनमें से देवा ने सरेंडर करने के लिए तैयारी कर ली है लेकिन अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
लगभग 23 खूंखार नक्सली मारे जा चुके हैं

वहीं बीते दो साल में बस्तर में लगभग 23 खूंखार नक्सली मारे जा चुके हैं। इनमें बसवराजू गणेश उइके और हिडमा जैसे नक्सली शामिल है। जबकि रूपेश और भूपति जैसे नक्सली नेताओं ने आत्म समर्पण किया है। इधर बस्तर आईजी पी. सुंदरराज ने बीते साल 2025 को नक्सल ऑपरेशन की दिशा में बहुत ही निर्णायक माना है। उन्होंने दावा किया कि नक्सलियों की मांद में घुसकर बीते साल कई बड़े नक्सली नेताओं को मुठभेड़ में ढेर किया गया है।
वहीं उनके पास से एके-47, एसएलआर और एलएमजी जैसे ऑटोमेटिक अत्याधुनिक हथियार भी बरामद किए गए हैं। बस्तर आईजी सुंदर राज के मुताबिक इस क्षेत्र में 52 से अधिक सुरक्षा बलों के कैंप खोले गए हैं। जिससे यहां विकास कार्यों को काफी गति मिली है। साथ ही डेढ़ हजार से ज्यादा नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बाद उनका पुनर्वास किया गया है।
‘2026 में नक्सली गतिविधियों को खत्म करेंगे’

बस्तर आईजी ने दावा किया कि वर्ष 2026 में एक मजबूत संकल्प के साथ नक्सली गतिविधियों का पूरी तरह खत्म करेंगे। यहां बताना जरूरी होगा कि नक्सली संगठनों में अब पोलित ब्यूरो के सदस्यों में यह बताना जरूरी होगा कि नक्सली संगठनों में अब पोलित ब्यूरो के सदस्यों में केवल देवजी मिशिर बेसरा और गणपति ही बचे हुए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नक्सलवाद को बस्तर से पूरी तरह खत्म करने के लिए मार्च 2026 तक की डेडलाइन तय की है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 के पहले तक बस्तर में पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों पर नक्सली पूरी तरह हावी थे।
नक्सली ऑपरेशंस में तेजी
वर्ष 2023 के बाद से परिस्थितियां बदली। राज्य में नई सरकार आने के बाद नक्सली ऑपरेशन में तेजी आई। वहीं रणनीति के तहत एनकाउंटर की शुरुआत हुई। इधर राज्य सरकार ने बेहतर पुनर्वास नीति तैयार करते हुए स्थानीय नक्सलियों को हथियार डालने के लिए प्रेरित भी किया। बस्तर में प्रत्येक 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में सुरक्षा बलों के कैंप भी खोले गए। इसके अलावा नियद नेल्लानार योजना के तहत यहां विकास कार्यों को भी आगे बढ़ाया गया। सड़क, पुल, पुलिया अस्पताल समेत अन्य सुविधाएं मिलने से नक्सलियों का प्रभाव सिमटता गया। वहीं स्थानीय ग्रामीणों का भरोसा भी सुरक्षा बलों पर बढ़ता गया।
इंद्रावती नदी पर पुल बनने से सुरक्षा बलों को मिली मदद

दूसरी तरफ बस्तर की जीवन दायनी मानी जाने वाली इंद्रावती नदी पर भी पुल बनने से सुरक्षा बलों को मदद मिली। वहीं मानसून में भी नक्सली ऑपरेशन तेजी से जारी रहा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खुद छत्तीसगढ़ आकर नक्सल प्रभावित ओडीशा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के अफसरों से बैठक कर रणनीति तय की। वही उन्हें दिशा निर्देश भी दिए। इस रणनीति के तहत ही सुरक्षा बलों ने पूरे अभियान को अमलीजामा पहनाया। यही वजह है कि अब बस्तर में शांति बहाली के साथ विकास की रोशनी नजर आने लगी है।
रिपोर्ट- आशीष शर्मा
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